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3 हजार रुपये का प्रोजेक्ट बना मुसीबत का सबब, क्लाइंट ने देर रात कॉल कर निजी बातें शुरू कर दीं

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पोस्ट वायरल हो रही है. उसने बताया कि कैसे एक सस्ता साधारण वेबसाइट बनाने का प्रोजेक्ट क्लाइंट की वजह से बड़ा सिरदर्द बन गया.

3 हजार रुपये का प्रोजेक्ट बना मुसीबत का सबब, क्लाइंट ने देर रात कॉल कर निजी बातें शुरू कर दीं
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फ्रीलांसर का बताया अनुभव
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किसी भी फ्रीलांसर के लिए नया प्रोजेक्ट मिलना अच्छी बात मानी जाती है. खासकर करियर की शुरुआत में कई लोग कम पैसे लेकर भी काम करने को तैयार हो जाते हैं, ताकि अनुभव मिल सके और पोर्टफोलियो मजबूत हो. लेकिन कभी-कभी सस्ता दिखने वाला काम इतना महंगा सबक दे जाता है कि इंसान उसे सालों तक नहीं भूलता. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ऐसी ही कहानी वायरल हो रही है. उसने सोचा था कि 3 हजार रुपये लेकर एक साधारण वेबसाइट बना देगा और काम खत्म हो जाएगा, लेकिन आगे जो हुआ, उसने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कम फीस लेकर हर प्रोजेक्ट स्वीकार करना शायद सबसे बड़ी गलती हो सकती है.

काम से ज्यादा अजीब थीं मीटिंग्स

वायरल पोस्ट के मुताबिक, इंजीनियर ने एक क्लाइंट के लिए 3 हजार रुपये में वेबसाइट बनाने का काम स्वीकार किया था. टेक्निकल तौर पर यह कोई मुश्किल प्रोजेक्ट नहीं था, लेकिन असली परेशानी काम में नहीं, बल्कि लगातार होने वाली मीटिंग्स में थी. इंजीनियर का दावा है कि क्लाइंट रोज करीब दो घंटे की मीटिंग करता था. हैरानी की बात यह थी कि कई बार चर्चा वेबसाइट या प्रोजेक्ट से हटकर बिल्कुल अलग विषयों पर पहुंच जाती थी.

इंजीनियर के मुताबिक वेबसाइट बनाना मुश्किल नहीं था, लेकिन क्लाइंट के साथ होने वाली मीटिंग्स धीरे-धीरे उसके लिए सिरदर्द बन गईं. उसका दावा है कि रोज करीब दो घंटे की मीटिंग होती थी, लेकिन उनमें प्रोजेक्ट की बात कम और दूसरी बातें ज्यादा होती थीं. कभी क्लाइंट ज्योतिष की चर्चा शुरू कर देता. इंजीनियर ने बताया कि एक बार उसने उसकी जन्मतिथि पूछ ली और फिर भविष्य और कुंडली से जुड़ी बातें करने लगा. इंजीनियर को हैरानी इस बात की थी कि जिस समय में वेबसाइट पर चर्चा होनी चाहिए थी, वह पूरी तरह दूसरे विषयों में निकल रहा था.

वेबसाइट के बजाय देने लगा 'ट्रेनिंग'

इंजीनियर का कहना है कि एक दिन तो पूरी मीटिंग वेबसाइट से हटकर एआई कोडिंग टूल 'कर्सर' पर ही निकल गई. उसका दावा है कि उसने पूरा समय क्लाइंट को यह समझाने में बिताया कि वह काम कैसे करता है और यह टूल कैसे इस्तेमाल किया जाता है. यानी जिस प्रोजेक्ट के लिए उसे 3 हजार रुपये मिल रहे थे, उसमें उसे डेवलपर के साथ-साथ ट्रेनर की भूमिका भी निभानी पड़ रही थी.

देर रात कॉल

इंजीनियर के मुताबिक, हालात तब और अजीब हो गए जब एक देर रात की कॉल के दौरान क्लाइंट ने निजी बातें शुरू कर दीं. एक बार तो क्लाइंट ने उसकी आंखों की तरफ देखकर कहा कि वह बता सकता है कि उसने शराब पी रखी है या नहीं. यह सुनकर वह खुद हैरान रह गया. इसके बाद उसने तय कर लिया कि किसी भी तरह बचा हुआ काम खत्म करके इस प्रोजेक्ट से बाहर निकलना है. काम पूरा होने के बाद उसने साफ कहा कि वह आगे साथ काम नहीं करना चाहता. लेकिन उसका दावा है कि जवाब में क्लाइंट ने कहा, "ये तो करना ही पड़ेगा."

आखिर में ब्लॉक करना पड़ा

इंजीनियर का कहना है कि इसके बाद उसने क्लाइंट को ब्लॉक कर दिया. बाद में उसकी नजर कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स पर पड़ी, जिनमें कथित तौर पर क्लाइंट ने लिखा था कि उसने डेवलपर से बहुत कम पैसे में जल्दी वेबसाइट बनवा ली. साथ ही उसने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर कोई उसके स्टार्टअप आइडिया की नकल करेगा तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. इंजीनियर ने लिखा कि उसे उस स्टार्टअप आइडिया में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उसके लिए सबसे बड़ी राहत यही थी कि प्रोजेक्ट खत्म हो चुका था.

करीब छह महीने बाद जब उसने यह अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया तो पोस्ट वायरल हो गई. इंजीनियर का कहना है कि इस पूरे मामले ने उसे एक बड़ी सीख दी. उसके मुताबिक कम पैसे में काम लेना कभी-कभी महंगा पड़ सकता है, क्योंकि असली चुनौती कोड लिखना नहीं, बल्कि ऐसे क्लाइंट्स को संभालना बन जाती है.

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