Indian Parenting: एक भारतीय को हमसफर को चुनकर भारत में बस गई एक यूरोपीय महिला केन्सिया कला आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गईं हैं. भारतीय मिट्टी, परंपरा और बच्चों की परवरिश में भारतीय शैली से प्रभावित केन्सिया कला ने हाल में एक इंस्टाग्राम पोस्ट किया है, जो देखते ही देखते वायरल हो गया है और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर अब प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है.
'कई पेरेंटिंग आदतें भारत में अलग और बिल्कुल नई लगीं'
केन्सिया कहती हैं कि शादी के बाद जब वो पहली बार भारत आईं, तब उन्हें यहां की कई पेरेंटिंग आदतें अलग और बिल्कुल नई लगीं. समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि बच्चों की परवरिश में छोटी-छोटी भारतीय परंपराओं के पीछे गहरी भावनाएं और जुड़ाव छिपी हैं. अपने चारों बच्चों की भारतीय परंपरा से पालने वाली केन्सिया का कहना है कि यह बच्चों की परवरिश का सबसे अच्छा और कारगर तरीका है.

अपने चारों बच्चों के साथ केन्सिया कला
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अपने बच्चों को भारतीय तरीकों से पालने का फैसला किया
केन्सिया को बच्चों की परवरिश की भारतीय शैली इतनी भायी कि उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश भारतीय तरीकों से पालने का फैसला किया. केन्सिया कहती हैं कि दूसरे देशों की रीति-रिवाजों को अपनाना एक विदेशी के लिए मुश्किल होता है, लेकिन उन्हें अपने बच्चों की परवरिश करने के सफर में गहरा जुड़ाव और बड़ा सुकून मिला. केन्सिया अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कुल चार भारतीय परवरिश के तरीकों को साझा किया है.
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1- साथ सोने की परंपरा
केन्सिया कला कहती हैं कि भारतीय संस्कृति में अपने बच्चों की परवरिश करने के सफर में उनके लिए सबस बड़ा बदलाव अपने बच्चों के साथ एक ही बिस्तर पर सोना था, जबकि पश्चिमी देशों में कुछ साल की उम्र के बाद पैरेंट्स और बच्चों का एक अलग कमरे में सोना आम बात है, लेकिन बच्चों के साथ एक ही बिस्तर पर सोना उनको एक अलग और अद्भुत अनुभव दे गया. इससे रात के समय बच्चों की देखभाल आसान हो गया. इससे उनका बच्चों के साथ न केवल भावनात्मक रिश्ता मजबूत हुआ, बल्कि रात में बच्चे की जरूरतों को समझना भी सरल हो गया.
2-तेल मालिश की परंपरा
केन्सिया ने लिखा कि भारतीय संस्कृति में बच्चों की परवरिश का महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों की तेल मालिश करना है. भारतीय घरों में नवजात शिशुओं की तेल मालिश का रिवाज उन्हें शुरूआत से ही पसंद आया, जो बच्चे की देखभाल का न सिर्फ एक तरीका नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार को जोड़ने वाला अनुभव कराता है. बच्चों के तेल मालिश में दादी-नानी के शामिल होने से एक नई मां को इससे काफी भावनात्मक सहारा मिलता है. केन्सिया लिखती हैं, आधुनिक जीवनशैली में न्यूक्लिर फेमिली जहां लोगों को अलग करती है, लेकिन तेल मालिश की परंपरा परिवारों को जोड़ने का काम करती है.
3- नामकरण की परंपरा
भारतीय परिवारों में बच्चों का नाम चुनना एक खास परंपरा है. भारतीय परिवार बच्चों का नाम रखते समय उसके अर्थ, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को वरीयता देते हैं. केन्सिया कहती हैं कि उन्हें यह बात बहुत पसंद आई. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने सभी बच्चों के लिए भारतीय नाम चुने हैं, क्योंकि उन्हें लगा कि नाम सिर्फ पहचान नहीं होते, बल्कि इतिहास, परंपरा और परिवार की कहानी लेकर साथ चलते हैं, क्योंकि नाम के पीछे छिपे अर्थ बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करते हैं.
4- जन्मदिन की परंपरा
बच्चों के जन्म दिन पर भारतीय माताओं द्वारा साड़ी पहनकर तैयार होने की परंपरा भी केन्सिया को काफी पसंद आई और केन्सिया ने अपने बच्चों के जन्मदिन पर साड़ी पहनने का फ़ैसला किया. केन्सिया कहती हैं, आप मुझे अपने बच्चों के जन्मदिन के जश्न में हर बार अब साड़ी पहने हुए पाएंगे, क्योंकि इससे यह एहसास होता है कि बच्चे का जन्मदिन सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि मां के लिए भी उतना ही खास है. केन्सिया कहती है कि भारतीय परिवारों में निभाए जाने वाले ऐसे छोटे-छोटे रिवाज परिवार की खुशियों को यादगार बनाने में मदद करते हैं.
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शादी के बाद से भारत में रह रही हैं केन्सिया कला
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इंस्टाग्राम पर आई प्रतिक्रियाओं की बाढ़
कमेंट में एक यूजर ने लिखा, "यह बहुत सुंदर है, क्योंकि इससे पता चलता है कि मातृत्व आत्मा की एक यूनिवर्सल भाषा है. इन परंपराओं में आपने जो देखा, वह सिर्फ़ बच्चों की परवरिश के तरीके नहीं हैं, बल्कि यह मां और बच्चे के बीच के उस दिव्य जुड़ाव का एहसास है."
दूसरे यूजर ने लिखा, "अरे, भारत में ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं, जो हमें हमारी माताओं से मिलती हैं..यहां एक बार जब कोई महिला मां बन जाती है, तो उसके लिए अपने बच्चे से ज़्यादा ज़रूरी कुछ नहीं होता. यहां तक कि पति को भी नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है..हमारे लिए मां ही सब कुछ है, वह भगवान से भी बढ़कर है, वह एक सुपरवुमन है, वह ज़िंदगी में मिलने वाले असीम प्यार का स्रोत है,"
तीसरे यूजर ने लिखा, पेरेंटिंग और मातृत्व ज़िंदगी का एक अनमोल हिस्सा हैं और भारत में मातृत्व एक अलग ही स्तर पर है, जहां ऐसी परंपराएं और रीति-रिवाज़ हैं , जो बच्चे की परवरिश में मदद करते हैं."
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