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खराब परफॉर्मेंस का बहाना बनाकर कंपनी ने महिला को नौकरी से निकाला, अब देना होगा 19 लाख रुपये का जुर्माना

अगर आपकी कंपनी भी बिना किसी ठोस वजह या चेतावनी के खराब परफॉर्मेंस का बहाना बनाकर नौकरी से निकालती है, तो ये खबर आपके लिए बहुत काम की है. एक महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, लेकिन उसके बाद महिला ने जो किया उसकी चर्चा हर जगह हो रही है.

खराब परफॉर्मेंस का बहाना बनाकर कंपनी ने महिला को नौकरी से निकाला, अब देना होगा 19 लाख रुपये का जुर्माना
बिना किसी चेतावनी के कर्मचारी को निकाला बाहर, अब कंपनी भरेगी 19 लाख का हर्जाना

Probation Period Termination Rules: सिंगापुर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अप्रैल 2025 को एक महिला ने ऑडिट मैनेजर के तौर पर अपना काम संभाला था. महिला को कंपनी ने 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड पर रखा था, जो कि अक्सर कॉरपोरेट जगत में एक सिंपल प्रोसेस है. जैसे-जैसे दिन बितते गए. महिला पूरी लॉयल्टी के साथ अपना काम करती रही, लेकिन जैसे ही छह महीने का टाइम पीरियड कंप्लीट हुआ कंपनी के सुर बदलने लगे. कंपनी ने महिला से कहा कि, आपकी परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं है, इसलिए अब आपकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं. अचानक मिली इस खबर से यकीनन कोई भी टूट सकता है, लेकिन महिला ने हार नहीं मानी. उसने अपने राइट्स के लिए लड़ने का फैसला किया.

अचानक कर दिया बर्खास्त (singapore audit manager fired)

Straits Times की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी कंपनी के खिलाफ महिला ने एम्प्लॉयमेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (ECT) का रूख किया और कंपनी के फैसले को चुनौती दी. जब मामला ट्रिब्यूनल के पास पहुंचा, तो कंपनी ने अपनी सफाई में बड़े-बड़े आंकड़े पेश करने शुरू कर दिए. कंपनी का कहना था कि, प्रोबेशन पास करने के लिए एम्पलाई को 80 परसेंट नंबर और 10 की क्वालिटी में से कम से कम 3 रेटिंग हासिल करनी पड़ती है, लेकिन महिला को महज 71 परसेंट नंबर और 2.4 की रेटिंग मिली थी, जिस कारण महिला की सेवाएं समाप्त कर दी गईं. 

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नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश

सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट जोएल तान के सामने कंपनी की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. महिला के सुपरवाइजर ने ये एक्सेप्ट किया कि, जॉब की शुरुआत से ही महिला को इन रेटिंग सिस्टम के बारे में नहीं समझाया गया था. इसके अलावा कंपनी खुद की पॉलिसी के तहत होने वाले रिव्यू भी कभी कंप्लीट नहीं करती थी. ट्रिब्यूनल की जांच में ये बात सामने आई कि कंपनी ने महिला पर जो भी आरोप लगाए थे, उनके पीछे कोई प्रूफ नहीं था. कंपनी की मानें तो महिला कर्मचारी डेडलाइन मिस कर देती थी और इसके साथ उसके काम में फॉर्मेटिंग की गलतियां होती थीं. मजिस्ट्रेट ने जांच में देखा कि, सुपरवाइजर ने कभी भी महिला के काम यानि की ऑडिट की क्वालिटी पर कभी कोई सवाल नहीं उठाया था. मजिस्ट्रेट ने कहा कि, बिना किसी समझाइस के किसी का करियर बर्बाद कर देना पूरी तरह से गलत है.

नियम न होते तो बनता बड़ा जुर्माना (kharab performance par naukri se nikala)

वहीं ट्रिब्यूनल ने महिला को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए कानून के तहत मिलने वाला अधिकतम 30,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 19 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया. महिला की मंथली सैलरी 11,500 सिंगापुर डॉलर थी. इस हिसाब से उसे तीन महीने की सैलरी मिलना चाहिए था, लेकिन लॉ के तहत 19 लाख रुपये ही तय हुए. मजिस्ट्रेट ने ये भी कहा कि, अगर लॉ में मुआवजे की सीमा तय न होती तो, महिला को मानसिक तनाव देने के लिए भी अतिरिक्त सैलरी दिलवाई जाती.

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