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जहां सूरज कभी नहीं ढलता! एक साल सिर्फ 11 घंटे के बराबर, अंतरिक्ष में मिला ‘नरक जैसा’ ग्रह, वैज्ञानिक भी हैरान

TOI-561 b सिर्फ एक ग्रह नहीं, बल्कि एक रहस्य है जो हमें ब्रह्मांड के बारे में नई सोच अपनाने के लिए मजबूर करता है. लावा के समुद्र, बिना रात वाला आसमान और फिर भी मौजूद वायुमंडल, यह सब इसे बेहद खास बनाता है.

जहां सूरज कभी नहीं ढलता! एक साल सिर्फ 11 घंटे के बराबर, अंतरिक्ष में मिला ‘नरक जैसा’ ग्रह, वैज्ञानिक भी हैरान
लावा के समुद्र वाला ग्रह! जहां कभी नहीं होती रात, वैज्ञानिक भी रह गए हैरान

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक बेहद अनोखे और रहस्यमयी ग्रह की खोज की है, जिसे ‘सुपर अर्थ' कहा जा रहा है. इस ग्रह का नाम TOI-561 b है और इसकी सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां लावा के विशाल समुद्र मौजूद हैं और इसका एक हिस्सा हमेशा दिन की रोशनी में रहता है. यह ग्रह पृथ्वी से करीब 560 प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा में स्थित है.

लावा के महासागर और बेहद ज्यादा तापमान

इस ग्रह का तापमान करीब 1800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे इसकी सतह पूरी तरह पिघले हुए पत्थरों यानी लावा से ढकी हुई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां ‘मैग्मा ओशन' यानी लावा के महासागर बने हुए हैं. इतनी गर्मी के बावजूद इस ग्रह के पास एक मोटा वायुमंडल (Atmosphere) होना वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं है, क्योंकि पहले माना जाता था कि इतने गर्म ग्रह अपना वायुमंडल बनाए नहीं रख सकते.

एक साल सिर्फ 11 घंटे का!

TOI-561 b अपने तारे के बेहद करीब है, इसलिए यह बहुत तेजी से उसका चक्कर लगाता है. यहां एक साल सिर्फ 11 घंटे के बराबर होता है. इसकी एक साइड हमेशा सूरज की तरफ रहती है, जिससे वहां कभी रात नहीं होती. हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि वायुमंडल की वजह से गर्मी दूसरी तरफ भी पहुंचती रहती है.

वायुमंडल में हो सकते हैं पानी और ऑक्सीजन

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से मिले डेटा के अनुसार, इस ग्रह के वायुमंडल में पानी, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें मौजूद हो सकती हैं. यह खोज इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले ऐसा संभव नहीं माना जाता था.

कैसे हुई खोज?

इस ग्रह की खोज TESS मिशन के जरिए साल 2021 में की गई थी. बाद में वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से इसका और गहराई से अध्ययन किया. साइंस डेली के मुताबिक, वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर लावा और वायुमंडल के बीच एक संतुलन बना हुआ है, जहां गैसें बाहर भी निकलती हैं और फिर वापस अंदर भी चली जाती हैं.

साइंस के लिए क्यों खास है ये खोज?

यह ग्रह करीब 10 अरब साल पुराना माना जा रहा है, जो हमारे सूरज से भी लगभग दोगुना पुराना है. इसकी मौजूदगी यह दिखाती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती समय में ही चट्टानी ग्रह बनने लगे थे. इस खोज ने वैज्ञानिकों की पुरानी धारणाओं को चुनौती दी है और यह साबित किया है कि अंतरिक्ष में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे समझना बाकी है.

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संज्ञा सिंह
Chief Sub Editor
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