समुद्र की गहराइयों में रहने वाले एक छोटे से जीव ने वैज्ञानिकों के सामने एक पहेली खड़ी कर दी है, “जिंदा” क्या है, इसी की परिभाषा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोचिए, अगर किसी जीव का शरीर काट दिया जाए और उसके अलग हुए टुकड़े मरने के बजाय खुद को ठीक करने लगें, बढ़ने लगें और बिना मुंह के भी जिंदा बने रहें, तो क्या उसे सच में “जिंदा” कहा जाएगा? वैज्ञानिकों के सामने अब यही बड़ा सवाल खड़ा है. उत्तरी अटलांटिक महासागर में पाए जाने वाले एक समुद्री जीव ने विज्ञान की दुनिया को चौंका दिया है.
समुद्र में ऐसा क्या मिला है?
यह जीव है Psolus fabricii (पसोलस फैब्रिकी) जो समुद्री खीरे यानी “सी कुकुंबर” की एक प्रजाति है. वैज्ञानिकों ने देखा कि जब इसके शरीर के कुछ हिस्से अलग हो गए, तो वे सामान्य तरीके से सड़कर खत्म नहीं हुए. उल्टा वे बढ़ते हुए दिखाई देने लगे. यह देखकर रिसर्चर्स हैरान रह गए. इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए और एक्सपेरिमेंट किए. उन्होंने इस समुद्री जीव के पैर, मुख्य शरीर और टेंटेकल यानी बाहरी हिस्सों से छोटे-छोटे टुकड़े अलग किए और उन्हें सामान्य समुद्री पानी में रखा. जो नतीजे सामने आए, उन्होंने सबको चौंका दिया.
ये कटे हुए हिस्से मरने से मानो इनकार कर रहे थे. वे खुद को ठीक कर रहे थे और सबसे हैरानी वाली बात यह थी कि उनके पास मुंह नहीं था, फिर भी वे पोषण ले पा रहे थे.
हालांकि ये कटे हुए हिस्से नए जीव में नहीं बदले. वे बस अपने आप जिंदा बने रहे. इसी वजह से वैज्ञानिक उन्हें मजाक में “जॉम्बी” कह रहे हैं. सारा जॉब्सन ने कहा कि ये टिश्यू मानो जिंदगी और मौत के बीच की सीमा पर खड़े हैं. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये छोटे-छोटे टुकड़े आखिर क्यों खुद को जिंदा रख रहे हैं, जबकि उनका कोई प्रजनन उद्देश्य भी नहीं है. आखिर ऐसा कौन-सा विकासवादी कारण है जो उन्हें ऐसा करने की क्षमता देता है?
छिपकली से अलग क्यों है?
अब आपके मन में कहीं यह सवाल तो नहीं आ रहा कि ऐसा तो छिपकली के साथ भी होता है. जब छिपकली की पूंछ कट जाती है तो वह फिर से उग जाती है. लेकिन यहां अंतर समझिए. छिपकली की कटी हुई पूंछ खुद कुछ नहीं करती. जबकि इस समुद्री जीव के मामले में ऐसा लगता है जैसे छिपकली की कटी हुई पूंछ खुद को ठीक करे, जंगल में घूमे, खाना जुटाए और सालों तक जिंदा रहे.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये कटे हुए टिश्यू तीन साल से भी ज्यादा समय तक जिंदा बने रहे. वैज्ञानिकों के मुताबिक उनमें सड़ने, खराब होने या कोशिकाओं के मरने के कोई संकेत नहीं दिखे. अब वैज्ञानिक मानते हैं कि यह रिसर्च भविष्य में इंसानी शरीर के घाव भरने, उम्र बढ़ने और शरीर के हिस्सों को दोबारा बनाने जैसी चीजों को समझने में मदद कर सकती है.
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