India News: दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji Temple) की कुल संपत्ति लगभग 3.38 लाख करोड़ रुपये है, जो आज के समय में कई छोटे देशों की कुल GDP से भी ज्यादा है. इसी कुबेर के खजाने में 15 जुलाई का दिन एक नया इतिहास रच गया. महज 24 घंटे के अंदर मंदिर में 96.98 करोड़ रुपये का छप्परफाड़ दान आया.
डेक्कन क्रॉनिकल के आंकड़ों के मुताबिक, एक ही दिन में 2460 दानदाताओं ने अपनी तिजोरियां खोल दीं. इनमें से 1212 लोगों ने 1 से 10 लाख रुपये, 1246 लोगों ने 10 से 25 लाख रुपये और 2 भक्तों ने तो एक-एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम दान की.
हालांकि इस भारी-भरकम दान के पीछे सबसे बड़ी वजह तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड की एक नई नीति रही, जिसे 15 जुलाई की आधी रात ठीक 12 बजे से लागू होना था.
खत्म हो रहा था 'लाइफटाइम' VIP सुविधाओं का फायदा
पुराने नियमों के तहत, मंदिर में एक तय रकम से ऊपर दान करने वाले भक्तों को 'जीवन भर' के लिए VIP दर्शन और खास सुविधाएं मिलती थीं. इनमें स्पेशल एंट्री, गर्भगृह तक जाने के लिए सुपाथम एंट्री, ब्रेक दर्शन, भोर में होने वाली सुप्रभात सेवा, भगवान वेंकटेश्वर की वैदिक शादी कल्याणोत्सवम में शामिल होने के साथ-साथ रहने की सुविधा, सोने-चांदी के सिक्के और प्रसाद शामिल था.
लोगों को अच्छी तरह पता था कि अगर उन्होंने 15 जुलाई की रात 12 बजे से पहले दान कर दिया, तो नई नीति उन पर लागू नहीं होगी और उन्हें पुरानी नीति के हिसाब से जिंदगी भर ये शाही सुविधाएं मिलती रहेंगी. इसी आजीवन लाभ को अपने नाम करने के लिए करोड़पतियों की भीड़ लग गई और डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले रिकॉर्ड दान जमा हो गया.
अब आजीवन नहीं, सिर्फ 15-20 साल ही मिलेंगी सुविधाएं
TTD के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने ईटीवी भारत को बताया कि पिछले 4 महीनों में ही 10 लाख रुपये दान करने वालों की संख्या में लगभग 3000 का इजाफा हुआ है. ऐसे में आम श्रद्धालुओं को दर्शन में होने वाली परेशानी को दूर करने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए 'आजीवन' वाला नियम खत्म करना जरूरी हो गया था. नई नीति में रेंज-बेस्ड स्लैब को हटाकर दान की रकम के आधार पर 4 नई कैटेगरी बनाई गई हैं. अब व्यक्तिगत दानदाताओं को VIP सुविधाएं सिर्फ 20 साल और संस्था या ट्रस्ट को 15 साल तक ही मिलेंगी. इसके साथ ही, वीआईपी सुविधाओं के लिए सिफारिश और मैन्युअल दखल पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अब दर्शन से लेकर कमरा बुक करने तक का सारा काम ऑनलाइन 'डोनर मैनेजमेंट सिस्टम' के जरिए होगा.
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इस मंदिर में रोजाना आता है 4.75 करोड़ का चढ़ावा
तिरुपति मंदिर से जुड़े रजिस्टर्ड डोनर्स की संख्या 1,97,888 है. इनमें से करीब 1.5 लाख लोगों ने 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा का योगदान दिया है, जबकि 22000 लोग ऐसे हैं जिन्होंने 10 लाख रुपये से ज्यादा दान किए हैं. अनुमान है कि साल 2025-26 में मंदिर की दान पेटी में 1738 करोड़ रुपये से ज्यादा का चढ़ावा आएगा, जो रोजाना औसतन 4.75 करोड़ रुपये बैठता है.
जितना बड़ा दान, उतना ज्यादा सम्मान और सुविधाएं
मंदिर प्रबंधन दान की रकम के हिसाब से भक्तों का पूरा सम्मान करता है. 1 हजार रुपये से ऊपर के सभी दान पर इनकम टैक्स में छूट का सर्टिफिकेट मिलता है. सोने-चांदी के सिक्के जीवन में सिर्फ पहली बार दर्शन पर मिलते हैं, जबकि दर्शन, प्रसाद और कमरे की सुविधाएं साल में एक बार दी जाती हैं.
1 रुपये से 99 हजार तक के दान परअगर दान 1 रुपये से 999 रुपये तक का है तो सिर्फ रसिद दी जाती है. जबकि 1 हजार से 99,999 रुपये तक के दान पर रसीद और टैक्स छूट का सर्टिफिकेट मिलता है.
1 लाख से 5 लाख रुपये तक के दान परभक्त और उनके परिवार (अधिकतम 5 लोग) को साल में 1 दिन सुपाथम (गर्भगृह जाने का रास्ता) से दर्शन, 100 रुपये किराये वाला एक दिन का कमरा, 6 छोटे लड्डू और सम्मान स्वरूप एक दुपट्टा व ब्लाउज पीस भेंट किया जाता है.
5 लाख से 25 लाख रुपये तक का दानसाल में 3 दिन सुपाथम दर्शन और 3 दिन के लिए 100 रुपये किराये वाला कमरा मिलता है. साथ ही 10 छोटे लड्डू, 5 महाप्रसाद और दुपट्टा-ब्लाउज पीस दिया जाता है.
10 से 25 लाख रुपये के दान परयहां से सुविधाएं वीआईपी हो जाती है. इसमें 3 दिन का 'शुरुआती ब्रेक दर्शन', 1000 रुपये किराये वाला कमरा, 20 छोटे लड्डू, 10 महाप्रसाद, दुपट्टा-ब्लाउज पीस और पहली बार दर्शन पर 50 ग्राम का एक चांदी का सिक्का मिलता है.
25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का दानसाल में 1 दिन सुपाथम और 3 दिन ब्रेक दर्शन मिलता है. रुकने के लिए 1500 रुपये किराये वाला कमरा, 4 बड़े व 5 छोटे लड्डू, 10 महाप्रसाद और दुपट्टे के साथ 5 ग्राम का सोने का डॉलर व 50 ग्राम का चांदी का सिक्का मिलता है.
50 से 75 लाख रुपये देने परभोर में होने वाली खास 1 दिन की 'सुप्रभात सेवा', 2 दिन सुपाथम, 3 दिन ब्रेक दर्शन, 2000 रुपये का कमरा और 6 बड़े व 10 छोटे लड्डू मिलते हैं.
75 लाख से 1 करोड़ रुपये के दान परयह सम्मान और बढ़कर 2 दिन सुप्रभात सेवा, 3 दिन सुपाथम, 3 दिन ब्रेक दर्शन, 2500 रुपये वाले कमरे और 8 बड़े व 15 छोटे लड्डुओं तक पहुंच जाता है (सोने-चांदी के सिक्के और महाप्रसाद समान रहते हैं).
1 करोड़ और उससे ज्यादा के दान परजो भक्त एक करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी दान करते हैं, उनके परिवार (5 लोगों) के लिए मंदिर के दरवाजे खास तौर पर खुलते हैं. इन्हें साल में 3 दिन सबसे महंगे वीआईपी सुइट (3,000 रुपये या समय-समय पर तय किराये वाले) में मुफ्त ठहराया जाता है. दर्शन के लिए 3 दिन 'सुप्रभात दर्शन', 4 दिन सुपाथम और 3 दिन 'ब्रेक दर्शन' (सुप्रभात और वीआईपी दर्शन अलग-अलग दिनों में) की सुविधा मिलती है. इस विशेष श्रेणी के भक्तों के लिए साल के किसी एक चुने हुए दिन मंदिर के अंदर रंगनायकुल मंडपम में वेद पंडितों द्वारा खास 'वेद आशीर्वादवचनम' किया जाता है. हर साल बहुमानम (दुपट्टा-ब्लाउज) के साथ प्रसाद में 10 बड़े लड्डू, 20 छोटे लड्डू और 10 महाप्रसाद पैकेट दिए जाते हैं. पहली यात्रा पर 5 ग्राम सोने के डॉलर के साथ श्रीवरु और देवी पद्मावती की तस्वीर वाला सोने का पानी चढ़ा हुआ खास चांदी का पदक भेंट किया जाता है.
सबसे अहम बात, अगर यह 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का दान 'वेद परिरक्षण ट्रस्ट' को दिया गया है, तो भक्त की पसंद के दिन श्रीनिवासमंगलपुरम में एक विशेष 'सर्व काम प्रदा लक्ष्मी श्रीनिवास महा यज्ञ' भी करवाया जाता है. इस यज्ञ को भक्त अपनी और अपने रिश्तेदारों की मौजूदगी में करवा सकते हैं, या उनकी इच्छा से उनकी अनुपस्थिति में भी इसे पूरे विधि-विधान से संपन्न किया जाता है.
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