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4300 साल पुराने मकबरे में मिली ड्रैगन और फीनिक्स की जोड़ी, कंकाल के पास रखा था फिरोजा जड़ा जेड पत्थर

ड्रैगन और फीनिक्स चीन की पौराणिक कथाओं के दो आइकॉनिक फिगर हैं. साल 1913 से 1928 तक यह जोड़ी चीन का सरकारी निशान थी और सिक्कों पर भी छपती थी. बाद में च्यांग काई-शेक की कुओमिंतांग सरकार आने पर इसे बदल दिया गया.

4300 साल पुराने मकबरे में मिली ड्रैगन और फीनिक्स की जोड़ी, कंकाल के पास रखा था फिरोजा जड़ा जेड पत्थर
इसे जाइजिता पत्थर की दीवार वाली जगह पर मकबरा M38 से निकाला गया है. (सांकेतिक तस्वीर)
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Trending: चीन के इनर मंगोलिया में आरकेलॉजिस्ट्स को 4300 साल पुराने एक मकबरे में मिट्टी से बनीं ड्रैगन और फीनिक्स की मूर्तियां मिली हैं. इन्हें एक कंकाल के दोनों तरफ रखा गया था. उत्तरी चीन में ड्रैगन और फीनिक्स के एक साथ मिलने का अब तक का सबसे पुराना मामला माना जा रहा है, जिसने चीनी सभ्यता, वहां के रीति-रिवाजों और आध्यात्मिक मान्यताओं के इतिहास को एक नया पन्ना दे दिया है.

गर्दन पर कीमती जेड पत्थर जड़ा था

यह खोज ऑर्डोस शहर के झाइजिटा में हुई है. रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला है कि यह मकबरा 2300 ईसा पूर्व लोंगशान संस्कृति का है. रेक्टेंगल शेप के इस मकबरे में दफनाए गए व्यक्ति को पीठ के बल लिटाया गया था, उसके हाथ-पैर फैले हुए थे और सिर उत्तर-पूर्व की ओर था. उसके गर्दन के दाहिनी ओर शरीर पर फिरोजा जड़ा एक कीमती जेड डिस्क रखा था. कंकाल के दाईं ओर सिर की सीध में ड्रैगन रखा था, जबकि बाईं ओर ऊपर की तरफ उड़ने की मुद्रा में फीनिक्स की मूर्ति थी.

मकबरे में दफ्न यह शख्स कौन था?

मकबरे में दफ्न यह शख्स कौन था, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने कंकाल के दांतों की आइसोटोप एनालिसिस की. इससे पता चला कि यह व्यक्ति मुख्य रूप से बाजरे की खेती पर निर्भर था, लेकिन इसके भोजन में जानवरों के मांस और खास तरह के प्रोटीन की मात्रा आम लोगों से कहीं ज्यादा थी. मकबरे में मिली कीमती चीजों और खानपान के इस एनालिसिस से साफ है कि यह शख्स अपने समय में समाज का कोई बहुत शक्तिशाली और रसूखदार व्यक्ति रहा होगा, जिसे मौत के बाद इतनी भव्यता के साथ विदा किया गया.

इतिहास के लिए अहम है यह खोज

इनर मंगोलिया इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चरल रेलिक्स एंड आर्कियोलॉजी के प्रमुख सन जिनसोंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि इस खोज ने उत्तरी चीन में ड्रैगन-फीनिक्स के प्रतीकों की टाइमलाइन को ही बदल कर रख दिया है. यह दिखाता है कि पीली नदी के किनारे बसी लोंगशान सभ्यता न सिर्फ पत्थर के बड़े शहर बनाने में माहिर थी, बल्कि उनके यहां अंतिम संस्कार और आत्मा से जुड़ी बेहद एडवांस्ड आध्यात्मिक मान्यताएं भी मौजूद थीं. यह खोज साबित करती है कि चीन की शुरुआती सभ्यता को गढ़ने में इस इलाके का कितना बड़ा और अनोखा योगदान रहा है.

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