चीन और अमेरिका में AI वॉर छिड़ा हुआ है. साइबर सिक्योरिटी कंपनी 'प्रूफपॉइंट' ने बृहस्पतिवार को कहा कि चीनी हैकर्स अब थिंक टैंक, यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थाओं में AI एक्सपर्ट्स के ईमेल चुराने की कोशिश में अमेरिकी AI एक्सपर्ट्स का रूप धर रहे हैं. यही नहीं अमेरिका के एक पूर्व सरकारी अधिकारी का रूप भी धर लिया. एक रिपोर्ट में प्रूफपॉइंट ने कहा कि उसने इन हैकर्स (जिन्हें वह "TA419" कहती है) को 2025 से ही अमेरिकी या जापानी थिंक टैंक, डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर, यूनिवर्सिटी और लॉ फर्म में काम करने वाले लोगों के पासवर्ड चुराने की कोशिश करते देखा है.
हैकिंग का कैसे किया गया प्रयास
प्रूफपॉइंट ने इन हैकिंग कोशिशों के लिए चीन के ग्रुप को जिम्मेदार ठहराया. इसके पीछे ग्रुप द्वारा इस्तेमाल किए गए मैलवेयर, हमलों के लिए इस्तेमाल किए गए इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रुप के टारगेट (जिन पर वे ध्यान केंद्रित कर रहे थे) जैसे कारण थे, जो चीन की इंटेलिजेंस इकट्ठा करने की प्राथमिकताओं से मेल खाते हैं.प्रूफपॉइंट ने कहा कि हैकर्स के हालिया कैंपेन में AI या स्टेटक्राफ्ट (शासन-कला) के एक्सपर्ट्स की तरफ से ईमेल लिखना शामिल था, जिनमें लिन पार्कर भी शामिल थीं. पार्कर पहले व्हाइट हाउस के 'ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी' में प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं. प्रूफपॉइंट ने बताया कि ये ईमेल आमतौर पर AI से जुड़े सहयोग या पहल का प्रस्ताव देते थे और फिर टारगेट को पासवर्ड चुराने वाली वेबसाइट्स पर ले जाते थे.
वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने टिप्पणी मांगने वाले संदेश का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. बीजिंग लंबे समय से साइबर जासूसी ऑपरेशन चलाने से इनकार करता रहा है.
प्रूफपॉइंट ने हैकर्स के टारगेट के नाम बताने से इनकार कर दिया, बस इतना कहा कि उनमें "AI रेगुलेशन, एक्सपोर्ट कंट्रोल और नेशनल AI स्ट्रैटेजी पर काम करने वाले एक्सपर्ट" शामिल थे. रॉयटर्स ने टारगेट किए गए लोगों में से एक की पहचान खुद की. इनका नाम एलेक्स एंग्लर है, जो व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी हैं और अब पेन सेंटर ऑन मीडिया, टेक्नोलॉजी एंड डेमोक्रेसी के प्रमुख हैं. एंग्लर ने बुधवार को रॉयटर्स को बताया कि उन्हें पार्कर की तरफ से एक ईमेल मिला था, जिसमें उन्हें "एक नए AI पॉलिसी प्रोजेक्ट में शामिल होने" के लिए बुलाया गया था. लेकिन उन्होंने कहा कि ईमेल "थोड़ा अजीब और संदिग्ध" लगा और जब उन्होंने इस क्षेत्र के दूसरे लोगों से बात की, तो उन्हें एहसास हुआ कि वे किसी धोखेबाज़ से बात कर रहे थे.
पार्कर बनकर हैकर्स ने एंग्लर से बात
एंग्लर ने कहा कि वे यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि किसी ने उन्हें हैक करने की कोशिश क्यों की, लेकिन प्रूफपॉइंट का कहना है कि इस टारगेटिंग से (जिसमें कुछ संगठनों के 10 से भी कम लोग शामिल थे) यह पता चलता है कि "मकसद सिर्फ टेक्नोलॉजी की चोरी नहीं, बल्कि अमेरिकी पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया में खुफिया दिलचस्पी लेना था."
पार्कर ने रॉयटर्स को बताया कि एंग्लर उन दो लोगों में से एक थे, जिन्हें जुलाई की शुरुआत में उनकी तरफ से संदिग्ध मैसेज मिले थे. उन्होंने कहा कि चीन के शामिल होने का आरोप सही लगता है.
पार्कर ने कहा, "अमेरिका और चीन के बीच AI को लेकर मुकाबला चल रहा है. AI पॉलिसी के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से उनकी AI पॉलिसी योजनाओं के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करना (अगर असल में मकसद यही था) तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है."
यह भी पढ़ें-
आ रही महंगाई की महामार-खाने-पीने की चीजों पर दो-दो मंत्रियों की चेतावनी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं