बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और डायरेक्टर नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) की आने वाली फिल्म रामायण का ट्रेलर (Ramayana Trailer) जब से लॉन्च हुआ है, तब से हर तरफ बस इसी की चर्चा हो रही है. इस फिल्म के जरिए इंडियन सिनेमा भले ही महाकाव्य को एक ग्लोबल स्केल पर पेश करने की तैयारी कर रहा हो, लेकिन सच तो यह है कि भगवान राम की कहानी पहले से ही एक 'ग्लोबल हेरिटेज' है. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों से लेकर श्रीलंका, नेपाल और दक्षिण अमेरिका की ऊंचाइयों तक, रामायण के निशान फैले हुए हैं.
आइए जानते हैं दुनिया के उन देशों के बारे में, जहां आज भी रामायण की जड़ें गहराई से जुड़ी हुई हैं.
1. 'भारत में रामायण, थाईलैंड में रामाकियन'

पारंपरिक खमेर नृत्य करते हुए तस्वीर.
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सबसे पहले बात करते हैं थाईलैंड (Thailand) की, जो भले ही मुख्य रूप से एक बौद्ध देश हो, लेकिन रामाकियन (Ramakien) की कहानी वहां के DNA में रची-बसी है. इसकी कहानी असल में रामायण के जैसी ही है, जिसमें वीर फ्रा राम (राम), उनकी पत्नी नांग सिदा (सीता) और राक्षस राजा थोत्साकान (रावण) कहा गया है. वहां का विश्व-प्रसिद्ध मुखौटा नृत्य 'खोन' हो या बैंकॉक के मंदिरों की शानदार पेंटिंग्स, हर जगह रामायण जीवंत हो उठती है. यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि रामायण सिर्फ अतीत का कोई पन्ना नहीं, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक पुल है जो आज भी अलग-अलग देशों को एक धागे में पिरो रहा है.
2. इंडोनेशिया की रग-रग में बसती है 'काकाविन रामायण'

सूर्यास्त के समय होने वाले बाली के प्रसिद्ध केचक नृत्य की तस्वीर.
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अब बात करते हैं दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया की, जो भगवान राम की कहानी में रंगा हुआ है. सदियों पहले जब रामायण वहां पहुंची, तो वह काकाविन रामायण (Kakawin Ramayana) के नाम से हमेशा के लिए उनकी अपनी हो गई. उन्होंने इस कहानी को इतने प्यार से अपनाया कि राम-सीता के साथ अपने स्थानीय देवी-देवताओं को भी इसमें जोड़ लिया. आज भी इंडोनेशिया का टूरिज्म विभाग इसे बड़े गर्व से दुनिया को दिखाता है. वहां के प्राचीन प्रम्बानन मंदिर की दीवारों पर पूरी रामायण आपको पत्थरों पर उकेरी हुई मिल जाएगी. रात के वक्त इसी मंदिर के साए में होने वाला रामायण बैले हो या फिर बाली का मशहूर केचक फायर डांस, इंडोनेशिया ने भगवान राम की इस विरासत को आज भी अपनी रगों में जिंदा रखा है.
3. श्रीलंका में आज भी मिलते हैं रामायण के भौगोलिक सबूत

सीता अम्मन मंदिर की तस्वीर.
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श्रीलंका वह जगह है, जहां के चप्पे-चप्पे पर रामायण की कहानी के भौगोलिक सबूत मिलते हैं. ऐतिहासिक और प्रमाणित राम सेतु (Ram Setu) से लेकर अशोक वाटिका (Ashok Vatika) तक, रामायण में जिन जगहों का जिक्र है, वे आज भी श्रीलंका के भूगोल से हूबहू मेल खाती हैं. श्रीलंका टूरिज्म बोर्ड आधिकारिक तौर पर पर्यटकों के लिए रामायण ट्रेल (Ramayana Trail) आयोजित करता है, जिसमें रामायण से जुड़ी 50 से अधिक प्रमाणित ऐतिहासिक जगहों के दर्शन कराए जाते हैं. यहां की नुवारा एलिया का सीता अम्मन मंदिर (Seeta Amman Kovil Temple Sri Lanka) वही जगह बताई जाती है, जहां रावण ने माता सीता को बंदी बनाकर रखा था. वहां बहने वाली नदी के पत्थरों पर आज भी हनुमान जी के विशाल पैरों के निशान देखे जा सकते हैं. इतना ही नहीं, रुमास्सला पर्वत को संजीवनी बूटी वाले पहाड़ का हिस्सा कहते हैं, जिसे हनुमान जी उठाकर लाए थे. इस पहाड़ की मिट्टी और पेड़-पौधे पूरे श्रीलंका में पाई जाने वाली हरियाली से बिल्कुल अलग हैं.
4. कंबोडिया में पत्थरों पर दिखता है राम-रावण युद्ध

अंगकोर वाट मंदिर की दीवारों पर पौराणिक कथाओं को दर्शाती पत्थर की नक्काशी.
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कंबोडिया में रामायण को रीमकेर (Reamker) के नाम से जाना जाता है, जो वहां की बौद्ध संस्कृति और कर्म के सिद्धांतों से गहराई से जुड़ी हुई है. अंगकोर वाट मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए राम-रावण युद्ध से लेकर कंबोडियाई कला और क्लासिकल डांस-ड्रामा तक, यह महाकाव्य वहां की आत्मा में बसा है. भारत से अलग, यहां किरदारों को भगवान का अवतार नहीं बल्कि इंसान माना जाता है, जहां रावण का पतन उसके बुरे कर्मों का परिणाम है और हनुमान जी शांत, अनुशासित और बौद्ध आदर्शों के प्रतीक रूप में नजर आते हैं. इसके अलावा, इस संस्करण में माता सीता के दुख, धैर्य और उनकी भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि युद्ध और सत्ता की इस आग में सबसे बड़ी कीमत हमेशा महिलाओं को ही चुकानी पड़ती है.
5. नेपाल को कहते हैं माता सीता का मायका

रामायण की चर्चा हो और नेपाल का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, माता सीता का जन्म जनकपुर में हुआ था. यहीं उन्होंने भगवान राम से विवाह से पहले का अधिकांश समय बिताया था. रामायण में वर्णित जनकपुर का ऐतिहासिक जानकी मंदिर, वह पावन रंगभूमि मैदान जहां भगवान राम ने शिवजी का पिनाक धनुष तोड़ा था, और धनुषा धाम में आज भी मौजूद उस धनुष के पावन अवशेष इस बात की गवाही देते हैं कि यह भूमि रामायण के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है. माता सीता का मायके कहे जाने वाले जनकपुरी से लेकर अयोध्या तक जल्द ही एक सीधी ट्रेन भी शुरू होने वाली है, जिससे दोनों देशों के बीच आना जाना काफी आसान हो जाएगा.
7. सात समंदर पार कैरेबियन से पेरू तक
रामायण का प्रभाव सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है. कैरेबियन देशों के बागानों में काम करने गए भारतीय प्रवासियों ने आज भी वहां 'रामलीला' को जिंदा रखा है. इतना ही नहीं, दक्षिण अमेरिका के पेरू में मौजूद प्राचीन नाज्का लाइन्स (Peruvian geoglyphs) के भौगोलिक आंकड़े, रामायण में सुग्रीव द्वारा बताए गए दुनिया के नक्शे से मेल खाते हैं.
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