रामायणम् फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ है. जिसके बाद से हर जगह इसी के चर्चे हो रहे हैं. भगवान राम और सीता माता ऐसे किरदार हैं जिनको लेकर के सदियों से लोगों के मन में एक छवि बनी हुई है. बीते कई सालों में रामायण को लेकर के कई तरह की फिल्में और सीरियल बने हैं. अब वहीं एक बार फिर से बॉलीवुड के दमदार कलाकार रणबीर कपूर, नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित और शानदार फिल्म 'रामायण' में इस महान महाकाव्य को जीवंत करने की तैयारी कर रहे हैं...
भारत में राम को पूजा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम की गाथा केवल भारतीय उपमहाद्वीप की सीमाओं तक ही सीमित नहीं थी. दक्षिण-पूर्व एशिया के घने वर्षावनों से लेकर दक्षिण अमेरिका की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं तक राम जी का वर्णन मिलता है. आप देख सकते हैं कि इस कालजयी महाकाव्य की ऐतिहासिक जड़ें और विरासत वैश्विक धरोहर में गहराई से समाई हुई हैं.
रामायण की कहानी सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि सदियों पहले ही इसकी छाप दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगी थी. भगवान राम की विरासत एशिया से लेकर पश्चिमी देशों तक फैली हुई है.
थाइलैंड
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत थाईलैंड से करते हैं. इस थाइलैंड के शाही राजवेश के कई राजाओं ने अपने नाम के साथ राम की उपाधि अपनाई है. रामायण यहां की संस्कृति और राजपरंपरा का अहम हिस्सा है.
इंडोनेशया
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन इसके बावजूद भी यहां पर रामायण का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है. प्राचीन मंदिरों में पत्थर पर बनी नक्काशी और रामायण पर बने नाटक और नृत्य आज भी वहां लोकप्रिय हैं.
श्रीलंका
ऐसा कहा जाता है कि रामायण में बताए गए कई स्थान श्रीलंका में स्थित कई जगहों से मेल खाती हैं. इसके साथ ही राम सेतु पुल का भी जिक्र करें तो ऐसा कहा जाता है कि श्रीलंका में ये पुल स्थित है. हालांकि इसको लेकर के कई अलग-अलग मत हैं.
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कंबोडिया
कंबिडिया में स्थित मंदिर अंगकोर वाट मंदिर की दीवारों में भी रामायण से जुड़े कई तथ्य मिलते हैं. इस मंदिर की गैलरियां में उन कालातीत आध्यात्मिक लड़ाइयों को हमेशा के लिए संजोए हुए हैं.
नेपाल
नेपाल को माता सीता का जन्म स्थान माना जाता है. वहां पर आज भी रामायण से जुड़े प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां और ऐतिहासिक धरोहरों को आज तक सुरक्षित रखा गया है.
जब भारतीय सिनेमा दुनिया के मंच पर इस विशाल सांस्कृतिक विरासत को नए नजरिए से पेश करता है, तो यह हमें याद दिलाता है कि कर्तव्य और हिम्मत का सिद्धांत पूरी तरह से सार्वभौमिक है.
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