छोटे शहरों और कस्बों से हर रोज हजारों युवा अपनी आंखों में बड़े-बड़े सपने लेकर मेट्रो शहरों का रुख करते हैं. उन्हें लगता है कि यहां कदम रखते ही उनकी जिंदगी संवर जाएगी और करियर को नई उड़ान मिलेगी, लेकिन कुछ ही महीनों में जब हर महीने का हिसाब सामने आता है, तो कई लोगों के पसीने छूट जाते हैं. हाल ही में एक ऐसे ही युवक के सीधे और तीखे सवाल ने सोशल मीडिया पर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
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कमाई और किराए का हिसाब
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से आए अखंड नाम के युवक ने नोएडा की ऊंची सोसायटियों को दिखाते हुए एक वीडियो बनाया है. इसमें उसने खुलकर अपनी बात रखी कि, 'अगर कोई इंसान महीने के 25 हजार रुपये कमाता है और उतना ही पैसा किराए में चला जाए, तो फिर बचत कैसे होगी.' अखंड ने अपने गांव-कस्बे की जिंदगी से तुलना करते हुए बताया कि, 'वहां लोगों के पास अपने मकान हैं और वहां रहने का कोई किराया नहीं देना पड़ता, जबकि नोएडा जैसे शहरों में मैचबॉक्स जितने कमरों के लिए भारी भरकम रकम ली जाती है.'
सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
ये वीडियो सामने आते ही दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों का दर्द छलक पड़ा. कई यूजर्स ने लिखा कि, 'सैलरी का आधा से ज्यादा हिस्सा सिर्फ फ्लैट के किराए और मेंटेनेंस में ही निकल जाता है.' वहीं कुछ लोगों का कहना था कि, 'बड़े शहरों में करियर के अवसर जरूर हैं, लेकिन जब तक बेहतर सैलरी पैकेज न मिले तब तक यहां टिकना एक बड़ी चुन्नौती बन जाता है.'
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