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भारत का वो रहस्यमयी गांव, जहां 17 परिवार जानबूझकर बिना बिजली और मोबाइल के जी रहे हैं जिंदगी!

जब पूरी दुनिया 5G नेटवर्क और AI की तरफ भाग रही है, तब भारत के एक कोने में 17 परिवार बिल्कुल अलग जिंदगी बिता रहे हैं. न जेब में मोबाइल, न घर में बिजली का स्विच, फिर भी लोग खुश हैं. आखिर क्या है इस अनोखी लाइफस्टाइल का राज?

भारत का वो रहस्यमयी गांव, जहां 17 परिवार जानबूझकर बिना बिजली और मोबाइल के जी रहे हैं जिंदगी!
आंध्र प्रदेश का वो अनोखा गांव जहां बिना बिजली और मोबाइल के जी रहे 17 परिवार, हैरान कर देगी ये लाइफस्टाइल
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Unique Village: अगर आपसे कहा जाए कि आज के समय में कोई बिना मोबाइल, इंटरनेट और बिजली के भी अपनी मर्जी से रह सकता है, तो शायद आप यकीन न करें, लेकिन आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले की एंथकापल्ली पहाड़ियों के बीच एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही लगता है जैसे वक्त कई सदी पीछे चला गया है. घने जंगलों और शांत वादियों के बीच बसे इस गांव का नाम है कुर्मा ग्रामम. यहां के लोगों ने जो लाइफस्टाइल चुनी है, उसने हर किसी को हैरान कर रखा है.

60 एकड़ में फैली एक अलग ही दुनिया

वीडियो के मुताबिक, इस गांव में कुल मिलाकर सिर्फ 17 परिवार रहते हैं. बाहर से देखने पर ये गांव किसी आम बस्ती जैसा लग सकता है, लेकिन इसके अंदर का सच बिल्कुल अलग है. यहां न तो किसी के हाथ में स्मार्टफोन दिखता है और न ही छतों पर डिश एंटीना. शाम होते ही जब बाकी शहर लाइटों से जगमगा उठते हैं, तब इस गांव में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है. लोग बिजली के बल्ब के बजाय अरंडी के तेल के दीए जलाकर रोशनी करते हैं.

न पंखा न स्मार्टफोन, फिर भी खुश हैं इस गांव के लोग

कहते हैं यहां के घर सीमेंट या लोहे के गार्टर से नहीं बने हैं. ग्रामीण अपने आशियाने मिट्टी, चूने, लकड़ी और पत्थरों से तैयार करते हैं. फर्श को खासतौर पर गोबर से लीपा जाता है, ताकि कीटाणु पास न फटकें. खाना पकाने के लिए यहां गैस सिलेंडर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद है. महिलाएं मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी जलाकर खाना बनाती हैं, जिसकी महक पूरे गांव में फैली रहती है. वहीं साबुन की जगह रीठा या प्राकृतिक चीजें इस्तेमाल होती हैं. 

तड़के 3 बजे से शुरू होता है अनोखा रूटीन

सोशल मीडिया के मुताबिक, जैसे ही घड़ी में सुबह के साढ़े तीन बजते हैं, पूरा गांव एक साथ जाग जाता है. ब्राह्म मुहूर्त में गांव के सभी लोग नहा-धोकर एक जगह जमा होते हैं और दीए की धीमी रोशनी में भजन और ध्यान करते हैं. बच्चों के लिए यहां कोई कॉन्वेंट या आधुनिक स्कूल नहीं है. उन्हें गुरुकुल में बिठाकर वेदों, रामायण और भागवत गीता के साथ-साथ बेसिक अंग्रेजी और गणित का ज्ञान दिया जाता है. 2018 में शुरू हुए इस अभियान का मकसद सिर्फ इतना था कि लोग प्रकृति के करीब रहें और तनावमुक्त जिंदगी जिएं.

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