Corporate Work Life Balance: आजकल की कॉर्पोरेट दुनिया में जहां देर रात तक जागकर काम करने को कामयाबी की निशानी माना जाता है, वहीं मुंबई की एक फाउंडर ने इससे बिल्कुल उल्टी राह चुनी है. एसाजीस एटेलियर (Essajees Atelier) की मुख्य डिजाइनर और जिया (Jea) की सह-संस्थापक सारा शाम (Sarah Sham) ने सोशल मीडिया पर अपने ऑफिस रूल्स का खुलासा किया है. उनका मानना है कि, 'थका हुआ इंसान कभी भी नया और अच्छा काम नहीं कर सकता', इसलिए उन्होंने दफ्तर का समय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक तय कर दिया है.
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वीकेंड पर काम बंद (Weekend rules)
उनकी कंपनी का सबसे कड़ा नियम यही है कि शनिवार और रविवार को कोई भी क्लाइंट कॉल नहीं उठाई जाएगी और न ही कोई संडे डेडलाइन तय होगी. सारा बताती हैं कि, 'जब काम का दबाव बढ़ता है, तो वे अपनी टीम से एक्स्ट्रा टाइम कराने के बजाए नया डिजाइनर रख लेती हैं.' इस सख्त पॉलिसी की वजह से कई ऐसे क्लाइंट्स कंपनी छोड़कर चले गए, जो वीकेंड पर काम की उम्मीद रखते थे, लेकिन सारा ने बिना किसी झिझक के क्लाइंट्स को जाने दिया और अपने उसूलों को बनाए रखा.
'क्रिएटिविटी नल नहीं, कुआं है' (Creativity is a well not a tap)
सारा ने अपनी सोच को बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया है. उनका कहना है कि, 'क्रिएटिविटी किसी नल की तरह नहीं है जो लगातार बहती रहे, बल्कि ये एक कुएं की तरह है. अगर कुएं से सारा पानी खींच लिया जाए और उसे भरने का समय न दिया जाए, तो वह सूख जाता है. इंसान का दिमाग भी ऐसा ही है, जब तक उसे सही आराम नहीं मिलेगा, उसमें नए और अच्छे विचार आ ही नहीं सकते.'
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सोशल मीडिया पर जमकर मिली तारीफ (Social media reaction on work life balance)
अब सारा शाम का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनके इस कदम की खूब तारीफ कर रहे हैं. कई नौकरी करने वालों का कहना है कि, 'आज के दौर में ऐसे लीडर्स की बहुत जरूरत है, जो सिर्फ मुनाफे के पीछे न भागें.' लोगों ने माना कि, 'सही मायने में अच्छी डिजाइनिंग और क्रिएटीविटी तभी निकलकर आती है, जब टीम मेंटली कॉम और फ्रेश फील करे.'
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