राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर में एक स्कूल में एक छोटे बच्चे की मौत को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है. बच्चे के परिजन और स्थानीय लोग स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए हैं. उनका कहना है कि बच्चा पानी पीने के लिए स्कूल में ही लगे वाटर कूलर पर गया लेकिन उसमें करंट आ रहा था. बच्चा करंट लगने के बाद गिर गया और आनन-फानन में जब उसे हॉस्पिटल ले जाया गया तो वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कूलर में काफी पहले से करंट आ रहा था और स्कूल प्रबंधन से इसकी शिकायत भी की गई थी. लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और इसी वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया. घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग राजकीय चिकित्सालय पहुंचे और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश जताया.
स्कूल परिसर में हुई मौत
सादुलशहर के बाल भारती स्कूल में यह हादसा सोमवार, 10 अगस्त की शाम को हुआ. जानकारी के अनुसार, 10 वर्षीय बच्चा बाल भारती स्कूल परिसर में खेलने के लिए गया था. शाम लगभग 6 बजे वह वॉटर कूलर से पानी पीने गया. परिजनों के अनुसार, इसी दौरान बच्चे को करंट लगा और वह अचेत होकर नीचे गिर गया.
मृतक बच्चे के भाई ने कहा,"मेरा भाई पानी पीने गया और वहां गिरा हुआ था. हमारी बॉल कूलर की ओर गई तब हमने उसे देखा और हाथ-पांव सहलाने लगे. फिर प्रिंसिपल सर उसे कार से हॉस्पिटल ले गए."
आसपास मौजूद लोगों ने बच्चे को संभाला और तत्काल राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

स्कूल के बाहर परिजन और स्थानीय लोग जुट गए
Photo Credit: NDTV
परिजनों का आरोप
बाल भारती स्कूल परिसर में बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद हड़कंप मच गया. बच्चे की मौत को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल के वॉटर कूलर में करंट होने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
घटना के बाद बच्चे की मां ने आरोप लगाया कि स्कूल के वॉटर कूलर में करंट आ रहा था. उनका कहना है कि इस संबंध में पहले भी स्कूल में शिकायत की गई थी, लेकिन समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया. बच्चे की मां का कहना है कि यदि समय रहते वॉटर कूलर की विद्युत व्यवस्था को ठीक करवा दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता.
'मैडम को बताया था'
मृतक बच्चे के भाई ने इस घटना के बारे में स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए. भाई ने कहा, "हमने कई बार मैडम को कूलर में करंट होने की शिकायत की थी. वो कहती थीं कि ठीक करवा देंगे. लेकिन कई हफ्ते होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ."
बच्चे के एक पड़ोसी ने भी वॉटर कूलर में करंट होने की बात कही और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. पड़ोसी के अनुसार, यदि पहले की शिकायतों पर ध्यान दिया जाता और वॉटर कूलर की जांच करवा दी जाती तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी.
घटना के बाद राजकीय चिकित्सालय में बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग एकत्रित हो गए. लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
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