मसूरी और नैनीताल तो हर कोई जाता है. इस वीकेंड पर अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और धार्मिक जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का हनोल महासू देवता मंदिर अच्छा विकल्प हो सकता है. दिल्ली से करीब 410 किलोमीटर दूर यह प्राचीन मंदिर जौनसार-बावर क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे स्थित है. अगर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो यहां पहुंचने में करीब 8 से 9 घंटे लगते हैं. खास बात यह है कि यहां महासू देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है.
चार भाइयों में से एक महासू देवता

अगर इस मंदिर के बात करें तो हनोल में मुख्य रूप से बौठा महासू विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि महासू देवता चार भाई हैं बौठा महासू, बासिक महासू, पबासिक महासू और चालदा महासू. स्थानीय लोगों की इस मंदिर में गहरी आस्था है और दूर-दूर से लोग अपनी मुरााद लेकर यहां पहुंचते हैं.
लकड़ी और पत्थर से बना है मंदिर
हनोल महासू देवता मंदिर अपनी खास बनावट के लिए भी जाना जाता है. मंदिर लकड़ी और पत्थर की पारंपरिक कााठ-कौनी शैली में बना है. इसकी वास्तुकला जौनसार-बावर की स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलकक दिखाती है. इसे क्षेत्र की प्राचीन कला और संस्कृति की अहम धरोहर मना जाता है.

इस जगह है न्याय के देवता का दरबार
हनोल गांव में रहने वाले लोगों ने बताया कि महासू देवता को न्याय का देवता माना जाता है. यही वजह है कि लोग अपनी समस्याओं और मनोकामनाओं को लेकर यहां पहुंचते हैं. मंदिर का शांत माहौल और आसपाास का पहाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य इसे खास बनाता है.

दिल्ली से ऐसे पहुंचें महासू देवता
दिल्ली से हनोल सड़क मार्ग से करीब 410 किलोमीटर दूर है. अगर आप परिवार में मम्मी-पापा, भाई-बहन या पत्नी और बच्चों के साथ प्लान बना रहे हैं तो आप दिल्ली से पानीपत, करनाल, यमुनानगर, पांवटा साहिब, विकासनगर और त्यूणी होते हुए हनोल पहुंच सकते हैं. वीकेंड पर उत्तराखंड की अलग और यादगार यात्रा चाहते हैं, तो हनोल को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
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