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कराची की इस मजार में रहता है 200 मगरमच्छों का खानदान, मांस की जगह खाते हैं मिठाइयां

एक ऐसी दरगाह जहां दुआ के साथ मगरमच्छों को मिठाई खिलाई जाती है. जहां खौफ नहीं, अकीदत नजर आती है. कराची की इस अनोखी जगह की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर सनसनी बनी हुई है.

कराची की इस मजार में रहता है 200 मगरमच्छों का खानदान, मांस की जगह खाते हैं मिठाइयां
मजार की झील में है मगरमच्छों का पहरा, बाबा फरीद से जुड़ी रहस्यमयी दास्तान

Crocodiles In Mazar: पाकिस्तान के कराची में स्थित Manghopir Shrine इन दिनों वायरल है. यहां एक झील है जिसमें 200 से ज्यादा मगरमच्छ रहते हैं. हैरत की बात यह है कि श्रद्धालु इन मगरमच्छों को अपने हाथ से मीट, अंडे और मिठाई तक खिलाते हैं.

सूफी संत से जुड़ी दास्तान (Manghopir shrine Karachi)

यह मजार 13वीं सदी के सूफी संत Pir Mangho की दरगाह मानी जाती है, जो कराची के गडाप टाउन में है. कहा जाता है कि वे महान संत Baba Farid के शिष्य थे. लोककथा के मुताबिक, बाबा फरीद ने आशीर्वाद दिया और उनकी जुओं से झील में मगरमच्छ पैदा हुए. तभी से लोग इन्हें पवित्र मानते हैं. हर साल यहां शीदी मेला भी लगता है, जहां धम्माल और सूफी रस्में होती हैं. लोग फतेहा पढ़ते हैं और मगरमच्छों को चढ़ावा देते हैं. मान्यता है कि अगर मगरमच्छ खाना स्वीकार कर ले तो मुराद पूरी होती है.

कहां से आए मगरमच्छ (Baba Farid Lice Crocodiles)

कुछ इतिहासकार मानते हैं कि ये मार्श क्रोकोडाइल्स यानी Crocodylus palustris हैं, जो सदियों पहले बाढ़ के दौरान यहां आ गए. झील का गर्म पानी और सल्फर स्प्रिंग्स इनके लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं. वैज्ञानिक नजर से देखें तो यह एक प्राकृतिक आवास है, लेकिन अकीदतमंद इसे करामात मानते हैं. केयरटेकर कहते हैं कि ये मगरमच्छ कभी हमला नहीं करते, क्योंकि यह दरगाह की हिफाजत करते हैं.

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क्यों खास है यह जगह (Why This Place Is Important)

Manghopir shrine Karachi सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, सूफी संस्कृति और लोककथाओं का संगम है. यह जगह बताती है कि आस्था और प्रकृति का मेल कितना दिलचस्प हो सकता है. रहस्य आज भी बरकरार है और शायद यही इसकी असली कशिश है.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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