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40 साल बाद फिर बेचैन हो उठा ये ज्वालामुखी, हलचल देख वैज्ञानिकों की छूटी कपकपी, क्या दोहराएगा 1982 जैसा विस्फोट?

पहाड़ खामोश है, लेकिन उसके अंदर कुछ सुलग रहा है. झील का रंग बदल गया है, पानी उबल रहा है और जमीन हल्की सी कांप रही है. मेक्सिको का एल चिचोन ज्वालामुखी फिर चर्चा में है और साइंटिस्ट्स की बेचैनी साफ नजर आ रही है.

40 साल बाद फिर बेचैन हो उठा ये ज्वालामुखी, हलचल देख वैज्ञानिकों की छूटी कपकपी, क्या दोहराएगा 1982 जैसा विस्फोट?
क्रेटर झील का बदला रंग, एल चिचोन ज्वालामुखी में बढ़ी हलचल, क्या मेक्सिको पर मंडरा रहा खतरा

El Chichon volcano Mexico: मेक्सिको के चियापास इलाके में स्थित El Chichon ज्वालामुखी, जिसे चिचोनाल भी कहा जाता है, एक बार फिर हलचल दिखा रहा है. 1982 का खौफनाक विस्फोट आज भी लोगों के जहन में जिंदा है. अब 2025 से 2026 के बीच नए संकेत मिले हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों को अलर्ट कर दिया है.

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Photo Credit: social media

क्रेटर झील में अजीब बदलाव (Strange Changes in Crater Lake)

नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मेक्सिको यानी National Autonomous University of Mexico के रिसर्चर्स ने जून से दिसंबर 2025 तक मॉनिटरिंग की. उन्होंने पाया कि क्रेटर लेक का रंग हरे से ग्रे हो गया है. तापमान 118 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो उबलते पानी से भी ज्यादा है.

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सल्फेट और सिलिका की मात्रा बढ़ी है. हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाइऑक्साइड गैसें निकल रही हैं. जून से अगस्त 2025 के बीच 1.4 से 3.6 मैग्निट्यूड तक के कई छोटे भूकंप दर्ज हुए. 2026 में भी 100 से ज्यादा क्वेक रिकॉर्ड किए गए.

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1982 की तबाही की याद (Memory of 1982 Eruption)

1982 में इसी ज्वालामुखी ने तीन बड़े विस्फोट किए थे, जो VEI 5 लेवल के थे. हजारों लोगों की जान गई, नौ गांव मिट गए और राख 40 सेमी तक गिरी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सल्फर डाइऑक्साइड ने ग्लोबल टेम्परेचर तक प्रभावित किया था. फिलहाल वैज्ञानिक इसे हाइड्रोथर्मल एक्टिविटी बता रहे हैं. यानी गर्म पानी और गैसों की हलचल, मैग्मा ऊपर नहीं आ रहा, इसलिए बड़े विस्फोट का खतरा कम है, लेकिन छोटे फ्रिएटिक एक्सप्लोजन संभव हैं.

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क्यों जरूरी है नजर रखना (Why Monitoring Is Crucial)

चियापास की सिविल प्रोटेक्शन एजेंसी ने येलो अलर्ट फेज 1 जारी किया है. क्रेटर के पास जाने पर रोक है, क्योंकि गैसें खतरनाक और जमीन अस्थिर है. वैज्ञानिक लगातार डेटा कलेक्ट कर रहे हैं. अगर सिस्मिक एक्टिविटी या मैग्मा मूवमेंट बढ़ता है तो अलर्ट लेवल बढ़ सकता है. फिलहाल हालात काबू में हैं, लेकिन 40 साल की खामोशी के बाद यह हलचल एक खामोश इशारा जरूर है कि धरती के अंदर कुछ चल रहा है.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
 

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