Kuldhara Village Mystery: जैसलमेर से करीब 17 किलोमीटर दूर बसा कुलधरा गांव कभी पालीवाल ब्राह्मणों का समृद्ध ठिकाना था. साल 1291 में बसाए गए इस गांव में खेती, व्यापार और संस्कृति फल फूल रही थी रेगिस्तान में रहते हुए भी यहां पानी की शानदार व्यवस्था थी. उत्सव, संगीत और खुशहाली इस गांव की पहचान थी, लेकिन फिर एक दिन अचानक रातोंरात पूरा गांव खाली हो गया. न किसी के जाने आवाज, न कोई चीख...अब बस रह गया सन्नाटा, जो सालों से पसरा हुआ है.
एक रात में उजड़ गया सब कुछ (kuldhara village experience)
साल 1825 की एक रात कुलधरा और आसपास के 84 गांव अचानक खाली हो गए. मान्यता है कि जैसलमेर रियासत के दीवान सलीम सिंह की बुरी नीयत गांव के मुखिया की बेटी पर थी. जबरन शादी की धमकी से आहत गांववालों ने सम्मान बचाने के लिए गांव छोड़ने का फैसला किया और जाते समय श्राप दिया कि यहां कोई कभी बस नहीं पाएगा.
भूतिया अनुभव या वहम...डर और दावे (Paranormal Claims)
कई लोग दावा करते हैं कि कुलधरा में आज भी परछाइयां दिखती हैं, पायल और कदमों की आवाजें सुनाई देती हैं. 2013 में एक पेरानॉर्मल टीम ने यहां रात बिताई और कुछ असामान्य घटनाओं का जिक्र किया.

हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि भूतों से ज्यादा वजह पानी की कमी और कर अत्याचार हो सकते हैं.
अब पर्यटन स्थल बना रहस्य...आज का कुलधरा (kuldhara gaon ke bare me jankari)
आज कुलधरा गांव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है. सुबह 8 से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है. सूर्यास्त के बाद दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं.

Photo Credit: kuldhara__village
देश विदेश से लोग यहां Kuldhara Village Mystery देखने आते हैं. कुलधरा का सन्नाटा आज भी सवाल करता है कि क्या ये सच में श्राप है या इतिहास की मार, जवाब शायद कभी न मिले.
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