कोटा की वुशू खिलाड़ी दिव्यांशी को एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम से ऐन वक्त पर बाहर कर दिया गया. भारतीय वुशू फेडरेशन की ओर से जारी लिस्ट में 60 किग्रा वर्ग में दिव्यांशी की जगह मणिपुर की नाओरेम रोशिबिना देवी को शामिल किया गया है. इसके बाद दिव्यांशी ने वीडियो जारी कर फेडरेशन पर आरोप लगाया है. उन्होंने वीडियो में जान देने की बात करते हुए कहा कि मम्मी पापा मुझे माफ कर दो. कभी भी नहीं करना चाहती थी, पर मैं मजबूर हूं.
ट्रायल में पहले नंबर रहीं थीं दिव्यांशी
दिव्यांशी ने वीडियो में आरोप लगाया कि जून में हुए चयन ट्रायल में उसने सेमीफाइनल में रोशिबिना देवी (Roshibina Devi) और फाइनल में चंडीगढ़ की मानसी को हराकर पहला स्थान हासिल किया था. जून ट्रायल के बाद उन्होंने SCO टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल भी जीता था. इसके बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. उन्होंने श्रीनगर कैंप में मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और चोट के बावजूद खेलने की अनुमति नहीं देने के आरोप भी लगाए.
'पोर्थ पोजीशन वाले को लेकर जा रहे'
वुशू प्लेयर दिव्यांशी ने वीडियो में कहा कि मेरी जगह फोर्थ पोजीशन वाले को लेकर जा रहे हैं. ये बिल्कुल भी फेयर नहीं है. क्यों कर रहे हो आप ऐसा मत करिए और सर जो कोई भी देख रहा है, स्पोर्ट्स मिनिस्टर, प्राइम मिनिस्टर... सबसे हाथ जोड़ के मैं आपसे विनती करती हू कि ये एकदम गलत है. डॉक्टर ने लिखा था ना कि She is Capable to Play. मंडे को हमें जाना है और आज मेरा नाम कैंसल हो गया. मेरी इंजरी का फायदा उठाया जा रहा है. वहा न ही तो मुझे मेरा पक्ष रखने दिया, न ही तो कुछ और सीधा जाके बोल दिया. कम से कम फेडरेशन तो मुझे बताती.
कोटा की दिव्याशी ने आगे वीडियो में मरने की बात करते हुए कहा कि मम्मी-पापा मुझे माफ कर दो. कभी भी नहीं करना चाहती थी. पर मैं मजबूर हूं. आज मुझे ऐसा करना पड़ रहा है. मुझे माफ कर दो. मैं अच्छी बेटी थी, मैं लेकिन बेटी नहीं रहेगी तो मेरा भाई है, उसको सिखाओ और उसको जीताओ और उसके साथ कभी ऐसा मत होने देना.
इंडिया वुशू टीम के कोच राजेश टेलर ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है और दस्तावेज सामने आने पर ही कुछ कहा जा सकता है. राजस्थान वुशू संघ के अध्यक्ष हीरानंद कटारिया ने कहा कि दिव्यांशी अच्छी खिलाड़ी हैं और उनका टीम से बाहर होना राजस्थान के लिए दुखद है. यदि कहीं गलत हुआ है तो मामला फेडरेशन के सामने रखा जाएगा.
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