सोशल मीडिया पर आजकल एक नाम बहुत वायरल हो रहा है 'चक्रवात अर्नब'. दावे किए जा रहे हैं कि यह तूफान भारत के पूर्वी तट की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन ठहरिए. इससे पहले कि आप घबराएं, हम आपको इसका पूरा सच बताते हैं. मौसम विभाग (IMD) के सरकारी रिकॉर्ड में 'चक्रवात अर्नब' नाम का कोई तूफान है ही नहीं. बंगाल की खाड़ी में ऐसा कोई चक्रवात उठा ही नहीं है. तो फिर यह पूरा मामला क्या है? आइए बहुत ही आसान भाषा में इसे समझते हैं.
असल में इस समय जो मौसम प्रणाली सक्रिय है, वैज्ञानिक भाषा में उसे 'डीप डिप्रेशन' यानी गहरे दबाव का क्षेत्र कहा जाता है. इसकी वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश और तेज हवाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन इसने अभी तक चक्रवात यानी साइक्लोन का रूप नहीं लिया है. किसी भी मौसमी सिस्टम को चक्रवात घोषित करने के लिए कुछ कड़े वैज्ञानिक नियम होते हैं, जिन पर यह खरा नहीं उतरा है.
मौसम विभाग किसी भी सिस्टम को हवा की रफ्तार के हिसाब से बांटता है.
डिप्रेशन (कम दबाव): जब हवा की रफ्तार 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा हो.
डीप डिप्रेशन (गहरा दबाव): जब हवा की रफ्तार 52 से 61 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाए.
चक्रवाती तूफान (साइक्लोन): जब हवा की रफ्तार हर हाल में 63 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे ज्यादा हो जाए.
बंगाल की खाड़ी में उठा यह सिस्टम अभी 'डीप डिप्रेशन' के स्तर पर ही रुका हुआ है. हवाओं की रफ्तार ने 63 किलोमीटर प्रति घंटे की उस लक्ष्मण रेखा को पार नहीं किया है, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर कोई नाम दिया जा सके.
तो फिर यह 'अर्नब' नाम आया कहां से?
दरअसल, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले तूफानों का नाम रखने के लिए 13 देशों का एक पैनल है. इस लिस्ट में अगला नाम 'अर्नब' है, जिसे बांग्लादेश ने दिया है. बंगाली में इसका मतलब 'महासागर' होता है. यह नाम अपनी बारी के इंतजार में लिस्ट में सबसे ऊपर जरूर है, लेकिन इसे तभी एक्टिव किया जाएगा जब कोई सिस्टम वाकई चक्रवाती तूफान में तब्दील होगा. सोशल मीडिया ने बिना सच जाने इसे पहले ही चक्रवात घोषित कर दिया.
नाम भले ही न हो, खतरा अभी टला नहीं है
भले ही इसे चक्रवात का तमगा न मिला हो, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हमें इसे हल्के में लेना चाहिए. यह डीप डिप्रेशन अपने साथ भारी नमी लेकर आया है, जिससे आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम और दक्षिणी ओडिशा के इलाकों में मूसलाधार बारिश हो रही है. नदियां उफान पर हैं, पेड़ उखड़ रहे हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूल बंद कर दिए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. हमारी आपसे यही अपील है कि सोशल मीडिया की अफवाहों के बजाय मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर भरोसा करें.
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