विज्ञापन

स्टार्टअप फाउंडर के रिटायरमेंट प्लान को सुनकर उड़े जनता के होश, बोले- इतने में तो पूरा गांव रिटायर हो जाए!

क्या आपने कभी सोचा है कि बुढ़ापे में चैन की रोटी तोड़ने के लिए बैंक में कितना बैलेंस होना चाहिए? हाल ही में एक स्टार्टअप फाउंडर ने एक ऐसा आंकड़ा फेंक कर मारा है, जिसे सुनकर अच्छे अच्छों का ब्लड प्रेशर हाई हो गया है. 40 करोड़ की इस गुत्थी को आइए जरा देसी अंदाज में समझते हैं.

स्टार्टअप फाउंडर के रिटायरमेंट प्लान को सुनकर उड़े जनता के होश, बोले- इतने में तो पूरा गांव रिटायर हो जाए!
रिटायरमेंट का नया गणित...क्या वाकई 60 की उम्र तक चाहिए 40 करोड़?

40 Crore Retirement Corpus: आजकल सोशल मीडिया पर एक चर्चा है...पैसा, पैसा और सिर्फ पैसा. वेल्थ मैनेजमेंट फर्म 'डेजर्व' (Dezerv) के को-फाउंडर संदीप जेठवानी ने एक इंटरव्यू में कुछ ऐसा कह दिया कि मिडिल क्लास आदमी अपनी सैलरी स्लिप देखकर सोच में पड़ गया है. संदीप जेठवानी का कहना है कि, अगर आप आज किसी बड़े शहर में 1 से 2 लाख रुपये महीने के खर्चे पर ऐश कर रहे हैं, तो 60 की उम्र तक आते आते आपको सुकून की जिंदगी जीने के लिए कम से कम 40 करोड़ का 'खजाना' चाहिए होगा.

महंगाई और लाइफस्टाइल का तगड़ा झटका (Sandeep Jethwani on retirement corpus)

ये खबर आग की तरह इसलिए फैली क्योंकि इसमें सिर्फ दाल-रोटी का खर्चा नहीं, बल्कि भविष्य की बढ़ती महंगाई (Inflation), मेडिकल के मोटे बिल और लंबी उम्र का हिसाब भी जोड़ा गया है. मजेदार बात ये है कि इस 40 करोड़ में न तो आपका घर शामिल है और न ही आपकी चमकती कार, यानी ये वो 'नेट कैश' है जो आपकी जेब में होना चाहिए, ताकि आप बिना अपनी मूल पूंजी को छुए बस उसके ब्याज और रिटर्न से अपनी नवाबी ठाठ बरकरार रख सकें.

सोशल मीडिया पर मचा बवाल 'भाई, मजाक हो रहा है?' (Social Media Reaction on Retirement Corpus)

जैसे ही ये आंकड़ा बाहर आया, इंटरनेट की जनता ने अपना सिर पकड़ लिया. किसी ने कहा, 'भैया, इतने में तो पूरा गांव रिटायर हो जाए,' तो किसी ने तंज कसा कि ये 40 करोड़ सिर्फ भारत के टॉप 0.01% लोगों के बस की बात है. आईजेन (IIM) वाले स्टार्टअप फाउंडर की इस गणित ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि, क्या आम आदमी कभी रिटायरमेंट का सपना देख भी पाएगा या नहीं?

ये भी पढ़ें:-घर का दरवाजा खुला छोड़कर चली गई महिला, फिर जो डिलीवरी बॉय ने किया...वो सोशल मीडिया पर हो गया वायरल

लोगों का कहना है कि ये आंकड़ा व्यावहारिक कम और डरावना ज्यादा लग रहा है. भले ही 40 करोड़ का नंबर पहाड़ जैसा लग रहा हो, लेकिन इसके पीछे का असल संदेश यही है कि कल की प्लानिंग आज से ही शुरू करनी होगी. महंगाई जिस रफ्तार से भाग रही है, उसमें गुल्लक जोड़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि निवेश के नए और स्मार्ट रास्ते तलाशने होंगे, बाकी 40 करोड़ हो न हो, पर सुकून की नींद के लिए थोड़ी बहुत बचत तो लाजिमी है.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com