Indian Banking System VS US: अमेरिका में बसे भारतीय मूल के बिजनेसमैन श्रेयंस जैन (Shreyans Jain) ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (एक्स) पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसने इंटरनेट पर लोगों के बीच खलबली मचा दी है. श्रेयंस जैन वाई कॉम्बिनेटर समर्थित मैनिक्यूल (Y Combinator-backed Manicule) कंपनी के सह संस्थापक हैं. उन्होंने भारत और अमरीका के बैंकों से लोन लेने के अपने एक्सपीरियंस को सामने रखा है. उनका कहना है कि, 'अमरीका में अच्छे क्रेडिट स्कोर (credit score) और शॉट क्रेडिट हिस्ट्री (short credit history) के आधार पर आसानी से बड़ा लोन मिल जाता है.'
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अमरीका और भारत में बैंकिंग का अंतर (Difference Between US and Indian Banking)
श्रेयंस जैन के मुताबिक, 'भारत में छोटा लोन लेने के लिए भी कागजों का ढेर लगाना पड़ता है. बैंकों को आईटीआर, नेट वर्थ स्टेटमेंट, बैलेंस शीट और कई अन्य तरह के दस्तावेज चाहिए होते हैं. इतने सारे कागजात देने के बाद भी कम राशि का लोन खारिज कर दिया जाता है.' उन्होंने कहा कि, 'भारत में बैंकिंग सिस्टम में जोखिम उठाने की बिल्कुल भी केपेसिटी नहीं है.'
My experiences dealing with banks in India vs the US differ so wildly and it tells you a lot about where the countries are going
— Shreyans Jain (@shreyansj) August 11, 2026
If you walk into a US bank or credit union, all you need is a decent credit score and a short credit history to get a loan worth many times your…
सोशल मीडिया पर मिला-जुला रिएक्शन (Mixed Reactions on Social Media)
श्रेयंस की पोस्ट पर अब लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं. विशाल सिंह जैन नामक यूजर ने बताया कि, 'उन्हें 2011 में बिना एसएसएन के अमरीका में 20 लाख डॉलर की क्रेडिट लाइन मिल गई थी.' वहीं आर्ची नामक यूजर ने तर्क दिया कि, 'एंथ्रोपिक या गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां बैंक लोन से नहीं, बल्कि वेंचर कैपिटल से बनती हैं.' इसके जवाब में श्रेयंस ने कहा कि, 'वेंचर कैपिटल और क्रेडिट एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.'
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