Electronic Monitoring Device: अक्सर फिल्मों में या विदेशों की खबरों में आपने देखा होगा कि, कुछ आरोपियों के पैर में एक काली पट्टी या डिवाइस बंधी होती है. इसे इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटर या जीपीएस ट्रैकर कहा जाता है. ये कोई नॉर्मल ट्रैकर नहीं होता, बल्कि पुलिस और कानूनी व्यवस्था का एक हाईटेक जरिया है. इसके जरिए किसी व्यक्ति को जेल में बंद किए बिना उस पर 24 घंटे नजर रखी जाती है.
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क्या है ये डिवाइस और कैसे करती है काम (What is Ankle Monitor and How it Works)
ये डिवाइस जीपीएस और सेल्यूलर नेटवर्क पर काम करती है. इसमें एक मजबूत स्ट्रैप होता है, जो पैर के निचले हिस्से में बांधा जाता है. इसके अंदर हिडन वायर सर्किट लगा होता है. अगर कोई इसे काटने या जबरदस्ती खोलने की कोशिश करता है, तो सर्किट टूटते ही तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम में इमरजेंसी अलर्ट पहुंच जाता है. इसके साथ ही इसमें रियल टाइम लोकेशन ट्रैकिंग चलती रहती है, जिससे व्यक्ति की हर मूवमेंट पर नजर रहती है.
किन देशों में होता है यूज और किसे पहनाई जाती है (Which Countries Use GPS Tracker for Criminals)
अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों में इसका बड़े पैमाने पर यूज किया जाता है. भारत में भी कुछ विशेष मामलों और ट्रायल के तौर पर इसका प्रयोग देखा गया है. ये डिवाइस उन कैदियों या आरोपियों को पहनाई जाती है, जो जमानत पर बाहर होते हैं और पैरोल पर आए होते हैं या फिर जिन्हें घर में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखा जाता है. जिन लोगों पर गंभीर अपराध का आरोप नहीं होता या जिन्हें एक सीमित दायरे में रहने की इजाजत मिलती है, उन्हें ये पहनाया जाता है.
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