टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी प्रमोटर कंपनी टाटा संस से बड़ी खबर सामने आई है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपना पद छोड़ दिया है. बुधवार, 12 अगस्त को उन्होंने शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए बताया कि उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक है. इसे बढ़ाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन प्रस्ताव के 6 महीने बाद भी फैसला नहीं हुआ. उनका अचानक से रिजाइन देना औद्योगिक गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है.
टाटा ग्रुप में करीब 4 दशक का सफर तय करने वाले चंद्रशेखरन ने टीसीएस से लेकर टाटा संस तक कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. आप सोचिए न, कभी टाटा ग्रुप में इंटर्न के तौर पर उन्होंने काम किया था और फिर वे टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी में सबसे ऊंचे पद तक पहुंचे. वे ऐसे पहले शख्स रहे, जो टाटा परिवार से बाहर के होते हुए टॉप पर काबिज हुए.
कौन है एन. चंद्रशेखरन?
एन. चंद्रशेखरन का पूरा नाम नटराजन चंद्रशेखरन है. वे भारत के प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट जगत के चर्चित चेहरों में से एक हैं. उन्होंने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. खास बात ये भी है कि चंद्रशेखरन टाटा परिवार से बाहर के पहले पेशेवर कार्यकारी हैं, जिन्हें ग्रुप की कमान सौंपी गई. उनकी नियुक्ति को टाटा समूह के इतिहास में एक अहम बदलाव के तौर पर देखा जाता है.
TCS में इंटर्न से की थी शुरुआत, यहीं CEO बने
आपको जानकर हैरानी होगी कि एन. चंद्रशेखरन ने साल 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में अपने करियर की शुरुआत एक प्रशिक्षु (ट्रेनी) के रूप में की थी. अपनी कड़ी मेहनत, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच के दम पर उन्होंने संगठन में लगातार तरक्की की और आगे चलकर टीसीएस के सीईओ बने.
फिर टाटा संस के चेयरमैन बने. उनका सफर इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि समर्पण और मेहनत के बल पर कोई भी व्यक्ति छोटे पद से शुरुआत करके कॉर्पोरेट जगत के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है.
एक के बाद एक बड़ी उपलब्धियां
TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में कंपनी दुनिया के सबसे मूल्यवान आईटी सेवा ब्रांड्स में शामिल हुई. उनके नेतृत्व में TCS का राजस्व कई गुना बढ़ा और कंपनी देश में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक बन गई. इसके बाद टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उन्होंने समूह के कई बड़े रणनीतिक फैसलों का नेतृत्व किया.
इतना ही नहीं, वर्ष 2022 में एयर इंडिया की टाटा समूह में वापसी के बाद उसके पुनरुद्धार की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली. साथ ही सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे भविष्य के क्षेत्रों में टाटा समूह की मौजूदगी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से नवाजा
उद्याेग जगत में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया, जबकि 2023 में भारत-फ्रांस आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उन्हें फ्रांस के प्रतिष्ठित 'लीजन ऑफ ऑनर' सम्मान से नवाजा गया. इसके अलावा भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान उन्होंने बी20 इंडिया (B20 India) की भी अध्यक्षता की.
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