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VIDEO: धरती बनी दहकती भट्टी! यूरोप से अमेरिका तक गर्मी का ऐसा तांडव...पिघल रही सड़कें और डस्टबिन

यूरोप इन दिनों अब तक के सबसे भयानक हीटवेव की चपेट में है. भीषण गर्मी के कारण जहां जर्मनी में पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, वहीं नीदरलैंड और अन्य देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर पिघलने और टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं.

VIDEO: धरती बनी दहकती भट्टी! यूरोप से अमेरिका तक गर्मी का ऐसा तांडव...पिघल रही सड़कें और डस्टबिन
यूरोप में भीषण गर्मी का कहर, बर्लिन की सड़कों पर पानी की बौछार, पिघल रही डामर की सड़कें

Global Heatwave Crisis: क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मी इतनी भयंकर हो सकती है कि सड़क का डामर ही पिघलने लग जाए, इसके अलावा प्लास्टिक के डस्टबिन भी अपना आकार खो बैठें? इस समय दुनिया के कई हिस्से एक ऐसी भीषण 'हीटवेव' की चपेट में हैं, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह से थमने पर मजबूर कर दिया है. एक तरफ जहां यूरोप की सड़कों पर पुलिस को लोगों को राहत देने के लिए वाटर कैनन से पानी की बौछार करनी पड़ रही है, वहीं अमेरिका के शहरों में तापमान इतना ज्यादा है कि प्लास्टिक के डस्टबिन और सड़क का डामर तक पिघलने लगा है. यह सिर्फ एक गर्म मौसम नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरनाक असर का संकेत है, जिससे निपटने के लिए अब बुनियादी ढांचे भी कम पड़ते नजर आ रहे हैं.

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वहीं फीनिक्स जैसे शहरों में पारा 114 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने से सड़कें और ट्राम पटरियां तक चरमरा गई हैं. वैज्ञानिकों ने इसे 'ओमेगा ब्लॉक' नाम का एक खतरनाक मौसमी पैटर्न करार दिया है, जहां गर्म हवाओं का गुब्बारा एक जगह ठहरकर जीवन को झुलसा रहा है. यह जलवायु परिवर्तन का वह भयावह चेहरा है, जो अब हमारे दैनिक जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है. बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में गर्मी का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ता ही चला जा रहा है.

यूरोप में 'हीटवेव' का तांडव (Heatwave Crisis in Europe)

यूरोप में इस वक्त गर्मी का आलम यह है कि इंसान तो क्या, मशीनें और सड़कें तक जवाब दे रही हैं. जर्मनी, डेनमार्क और चेक रिपब्लिक जैसे देशों में तापमान ने इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जर्मनी के मॉकर्न-ड्रूविट्ज (Mockern-Drewitz)  में तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. भीषण गर्मी का यह असर केवल तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक हेल्थ इमरजेंसी बन चुका है. यूरोप ही नहीं, दुनिया के कई बड़े हिस्से इस वक्त भीषण लू की चपेट में हैं. बर्लिन में पुलिस को सड़कों पर वाटर कैनन का उपयोग कर लोगों को ठंडा करने की कोशिश करनी पड़ रही है.

सड़कों पर पुलिस, आखिर क्यों? (Police Water Cannons for Relief)

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में गर्मी का सितम इतना बढ़ गया है कि, वहां पुलिस को मजबूरन वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा. आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल होने वाले इन वाटर कैनन से पुलिस अब सड़कों पर आम लोगों और बच्चों पर पानी की बौछार कर रही है, ताकि उन्हें थोड़ी राहत मिल सके.

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पिघल रही सड़कें, थमा यातायात (Infrastructure Under Heat Stress)

गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिख रहा है. नीदरलैंड में डामर की सड़कें गर्मी से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, वहीं जर्मनी में तेज गर्मी के कारण कहीं सड़कें फट रही हैं, तो कहीं रेल की पटरियां मुड़ रही हैं. बर्लिन और अन्य शहरों में कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं और लोगों को पानी बचाने की सलाह दी जा रही है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सब 'ओमेगा ब्लॉक' नाम के मौसम प्रणाली की वजह से हो रहा है, जो गर्म हवाओं को एक ही जगह पर फंसाकर रख देती है. फिलहाल, यूरोप का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है और वैज्ञानिक इसे बढ़ते जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मान रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों में भारी बारिश और गरज के साथ राहत की उम्मीद है, लेकिन यह आपदा भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है.

सिर्फ यूरोप ही नहीं, अमेरिका भी झुलस रहा (Scorching Heat in USA and Beyond)

गर्मी की यह लहर केवल यूरोप तक सीमित नहीं है. अमेरिका के फीनिक्स जैसे शहरों में भी अत्यधिक गर्मी की चेतावनी जारी की गई है, जहां तापमान 114 डिग्री फॉरेनहाइट (लगभग 45.5 डिग्री सेल्सियस) के करीब पहुंच गया है. वीडियो में यह देखा जा सकता है कि भीषण गर्मी के कारण कचरे के डिब्बे (डस्टबिन) भी पिघलकर अपना आकार खो रहे हैं. न्यूयॉर्क में भी गर्मी का असर ऐसा है कि लोग घरों की बालकनी में पैन रखकर अंडा तलकर गर्मी का सितम भांपने की कोशिश करने को मजबूर हैं, जो यह दिखाता है कि तापमान कितना जानलेवा हो गया है.

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जलवायु परिवर्तन का गहरा असर (climate change impact)

वैज्ञानिकों का मानना है कि भीषण गर्मी की यह घटनाएं अब पहले से कहीं ज्यादा बार हो रही हैं और यह मानवीय जलवायु परिवर्तन का ही परिणाम है. ओमेगा ब्लॉक नाम के इस मौसम की एक अजीब स्थिति के कारण गर्म हवाएं एक ही स्थान पर लंबे समय तक फंसी रह जाती हैं, जिससे यह खतरा और बढ़ जाता है. इसके कारण न केवल इंसानी स्वास्थ्य पर संकट है, बल्कि खेती, बिजली उत्पादन और ग्लेशियरों के अस्तित्व पर भी बुरा असर पड़ रहा है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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