यूरोप के पश्चिमी हिस्से में भीषण गर्मी का दौर जारी है. ब्रिटेन में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. भीषण गर्मी की वजह से ब्रिटेन समेत यूरोप के दूसरे देशों में आम लोगों का हाल बेहाल है. ब्रिटेन समेत यूरोप के दूसरे देश, फ्रांस, स्पेन और इटली में गर्मी की वजह से स्कूलों को बंद करना पड़ा है, जबकि बिजली सप्लाई पर भी असर दिखना शुरू हो गया है. मौसम विभाग ने यहां हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया है. आलम यह है कि ब्रिटेन का सबसे बड़ा शहर लंदन फिलहाल दिल्ली से भी ज्यादा गर्म हो रहा है. 30 से 35 डिग्री का तापमान भले ही भारतीय लोगों के लिए ज्यादा नहीं लग रहा हो. लेकिन ब्रिटेन और यूपरोपीय देशों के लिए यह तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है.
भारत के 45 डिग्री से ज्यादा गर्म होता है ब्रिटेन का 35 डिग्री
दरअसल, भारत में आमतौर पर गर्मियों के दिनों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर भी चला जाता है. जितनी गर्मी इंडिया में इस दौरान पड़ती है उतनी ही गर्मी यूरोप के देशों में 35 डिग्री तापमान में ही पड़ने लगती है. ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि भारत और यूरोप के देशों में मौसम के साथ-साथ घरों की बनावट और लोगों के रहन-सहन में भी बहुत अंतर दिखता है. इसके अलावा एक बड़ी वजह नमी भी है. ब्रिटेन अटलांटिक महासागर और कई समुद्रों से घिरा हुआ है. जिसके चलते यहां की हवा में कई गर्म इलाकों की तुलना में कहीं ज्यादा नमी होती है. इंसानी शरीर पसीना बहाकर खुद को ठंडा रखता है. लेकिन पसीना तभी काम करता है जब वह भाप बनकर उड़ता है. जब नमी का मौसम होता है तब मौसम में भाप बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है क्योंकि हवा में पहले से ही काफी नमी होती है. इसका नतीजा यह होता है कि शरीर को गर्मी बाहर निकालने में मुश्किल होती है, जिससे हीट एग्जॉशन यानि गर्मी से थकान का असर बढ़ता जाता है. ऐसे में डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक का खतरा भी रहता है.

यूरोप और भारत के घरों की बनावट
यूरोप और भारत के घरों की बनावट भी मौसम के हिसाब से अहम मानी जाती है. यूरोपीय देशों और ब्रिटेन में घरों की बनावट सर्दियों को रोकने के हिसाब से बनाई जाती है. यहां ईंट की दीवारें और इंसुलेटेड छतें बनाई जाती हैं. जिससे हवा के आने-जाने की खराब व्यवस्था होती है. ऐसा यहां जानबूझकर किया जाता है. क्योंकि इससे कई घर दिन के समय गर्मी सोख लेते हैं और रात के वक्त उसे धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं. यानि यह एक थर्मल बैटरी की तरह काम करते हैं. ऐसे में ब्रिटेन के घरों में गर्माहट ज्यादा रहती है. वहीं यहां ज्यादा सर्दी होती है जिससे एयर कंडीशनर भी ज्यादा नहीं लगे होते हैं.वहीं भारतीय घरों को गर्मी के हिसाब से बनाया जाता है. क्योंकि भारत में ज्यादा गर्मी होती है. जिनमें घर के अंदर का तापमान ठीक-ठाक रखने के लिए सीलिंग फैन, नैचुरल वेंटिलेशन, छायादार आंगन और आजकल एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किया जाता है.
ब्रिटेन यूरोप में एकदम आती है गर्मी
भारत और यूरोप के लोगों में भी गर्मी सहन करने की अपनी-अपनी क्षमता होती है. भारत के ज्यादातर हिस्सों में तापमान मार्च अप्रैल से धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो जाता है, मई-जून के वक्त यहां गर्मी पीक पर होती है. ऐसे में यहां के लोग गर्मी के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं. लगातार पसीना आता है, जिससे तापमान को नियंत्रित किया जाता है. वहीं भारत के उलट ब्रिटेन में गर्मी का एकदम से शुरू होता है. जिससे यहां के लोगों को गर्मी के हिसाब से शरीर को ढालने में बहुत कम समय मिलता है. जब रात का तापमान 20 डिग्री से ऊपर रहता है, जिसे 'ट्रॉपिकल नाइट्स' कहा जाता है तो शरीर को ठंडा होने और दिन की गर्मी से उबरने का बहुत कम मौका मिलता है. अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के साथ मिलकर, यह स्वास्थ्य जोखिमों को काफी बढ़ा सकता है, खासकर बुजुर्गों के लिए.

भारत और ब्रिटेन में अंतर
भारत में लोग इमारतें, अपनी दिनचर्या को भीषण गर्मी के हिसाब से ढाला है. लेकिन ब्रिटेन ने अपने देश को सर्दी से बचाने के हिसाब से बसाया है. यहां ज्यादातर ठंडी रहती है ऐसे में लोगों को गर्मी की ज्यादा आदत नहीं होती है. लेकिन जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में ज्यादा गर्मी और बार-बार हीटवेव आ रही हैं. उससे यहां भीषण गर्मी का असर साफ दिखना शुरू हो गया है. जिससे यहां के लोग परेशान नजर आते हैं.
ब्रिटेन में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड
फिलहाल ब्रिटेन में गर्मी का रिकॉर्ड लगातार टूट रहा है. जून के महीने में तापमान यहां पहली बार 36 डिग्री तक चला गया है. जिससे एक तरह से देखा जाए तो लंदन का तापमान दिल्ली के तापमान के बराबर चला गया है. यहां गर्मी का 50 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है. माना जा रहा है कि जून के आखिरी हफ्ते तक ब्रिटेन में गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है. अगर यहां तापमान 40 डिग्री तक जाता है तो यह अब तक की सबसे ज्यादा भीषण गर्मी होगी. फिलहाल ब्रिटेन में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. जिसके चलते इमरजेंसी अलर्ट भी जारी है. मौसम विभाग के मुताबिक 1957 में तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस तक गया था. जबकि 1976 में भी तापमान इतना ही गया था. लेकिन अब तापमान 2026 में इसी स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. ऐसे में फिलहाल यहां गर्मी से बचाव की सलाह दी गई है.
फ्रांस में भीषण गर्मी
यूरोप के फ्रांस में भीषण गर्मी का दौर जारी है. यहां का तापमान 43 डिग्री से ज्यादा हो गया है. भीषण गर्मी की वजह से स्कूलों को बंद कर दिया गया है. जबकि हीटवेव के चलते यहां बड़ी संख्या में लोग बीमार होने की वजह से अस्पताल पहुंचे हैं. बढ़ती गर्मी को देखते हुए आइफिल टॉवर समेत फ्रांस के दूसरे सभी पर्यटन स्थलों पर भी लोगों को आने जाने पर रोक लगी है. दोपहर के वक्त में सबसे ज्यादा सावधानी बरती जा रही है.
स्पेन और इटली में अलर्ट
स्पेन और इटली में अलर्ट जारी किया गया है. स्पेन में भी तापमान 41 से 44 डिग्री तक चला गया है. यहां मौसम विभाग ने रेड अलर्ट लागू किया है. वहीं इटली में भी तापमान 40 डिग्री के पार हो गया है. यहां रोम समेत 15 से 16 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया है. खास बात यह है कि भीषण तापमान की वजह से पहली बार यूरोपीय देशों में पहली बार एयर कंडीशनर की बिक्री बहुत ज्यादा बढ़ गई है. स्पेन में लोग सबसे ज्यादा एयर कंडीशनर खरीद रहे हैं. क्योंकि आम तौर पर लोग यहां एसी का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करते हैं. लेकिन पहली बार गर्मा का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है.
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