VIRAL POST: मंगलवार की रात के 11 बज रहे थे. एक कर्मचारी गहरे असमंजस में थी. तबीयत बेहद खराब थी, लेकिन दिक्कत यह थी कि उसकी सारी पेड लीव खत्म हो चुकी थीं. उसे समझ नहीं आ रहा था कि अगले दिन सुबह काम पर लॉगिन करे या नहीं. आखिरकार उसने भारी मन से अपने बॉस को मैसेज भेज ही दिया. बॉस ने जो जवाब दिया, उसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है. बॉस का जवाब था- "Don't think twice" (यानी दोबारा मत सोचो, छुट्टी ले लो). यह वाकया 'रेव ग्रोथ' (Revv Growth) के फाउंडर और सीईओ कार्तिक राजा ने खुद लिंक्डइन पर शेयर किया है. कार्तिक ने बताया कि उनकी कर्मचारी इस बात को लेकर परेशान थी कि बिना लीव बैलेंस के छुट्टी मांगना ठीक है या नहीं. लेकिन कार्तिक ने बिना देर किए उसे काम की चिंता छोड़ पहले सेहत पर ध्यान देने को कहा.
'रिमोट वर्किंग में बिना बोले कोई नहीं समझता परेशानी'
कार्तिक ने वर्कप्लेस पर सहानुभूति की वकालत करते हुए एक बहुत पते की बात कही. उन्होंने लिखा, "हमारी कंपनी रिमोट (घर से काम करने वाली) है. यहां सामने कोई मैनेजर नहीं बैठा है जो आपका चेहरा देखकर आपकी तकलीफ समझ सके. जब तक आप खुद नहीं बताएंगे, किसी को पता नहीं चलेगा कि आप किसी परेशानी में हैं." उनका मानना है कि लीडर्स को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां कर्मचारी अपनी निजी दिक्कतों को लेकर ग्लानि महसूस न करें. कार्तिक कहते हैं, "आपकी टीम कोई मशीन या रिसोर्स नहीं है. वे जीते-जागते इंसान हैं, जो अपने दिन के आठ घंटे आपके सपने को सच करने में लगा रहे हैं."
काम से बड़ा कुछ भी हो, तो छुट्टी पूरी और सैलरी भी पूरी
कार्तिक की कंपनी का एक सीधा और बेहद सरल नियम है. वे कहते हैं, "अगर आपकी जिंदगी में कोई ऐसी चीज चल रही है जो काम से ज्यादा जरूरी है, तो बेशक वह काम से बड़ी है. ऐसी स्थिति में- पूरा दिन छुट्टी और पूरी सैलरी. जाइए, पहले अपनी परेशानी सुलझाइए." उनका मानना है कि काम तो आज नहीं तो कल पूरा हो ही जाएगा, लेकिन अगर किसी कर्मचारी को यह महसूस करा दिया जाए कि कंपनी के लिए उसकी कोई कीमत नहीं है, तो वह ठेस कभी नहीं भरती.
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
कार्तिक की इस सोच ने इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत लिया है. खासकर घर से काम करने वाले प्रोफेशनल्स इस बात से बेहद जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, "कर्मचारियों पर भरोसा और काम में लचीलापन ही उन्हें कंपनी से जोड़े रखने का सबसे बड़ा जरिया है. लोगों को समझदार मानना माइक्रो-मैनेजमेंट से कहीं बेहतर है." वहीं कुछ लोगों ने आज के दौर के कड़वे सच को भी सामने रखा कि कंपनियां काम तो समय पर चाहती हैं, लेकिन काम करने वालों की परवाह बहुत कम लोगों को होती है.
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