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6 महीने में समझ आया रियल एस्टेट का खेल, पूर्व मैनेजर ने बताइए ऐसी रियलिटी, चौंक जाएंगे आप

हरियाणा के एक पूर्व कॉर्पोरेट एंप्लॉय ने रियल एस्टेट ब्रोकर बनने के बाद छह महीने की रियलिटी शेयर की है. उसकी पोस्ट पर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है.

6 महीने में समझ आया रियल एस्टेट का खेल, पूर्व मैनेजर ने बताइए ऐसी रियलिटी, चौंक जाएंगे आप
ब्रोकर ने रियल एस्टेट की बताई रियलिटी
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कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर रियल एस्टेट ब्रोकर बने एक शख्स की पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. दरअसल, हरियाणा के एक टियर-3 शहर में काम कर रहे इस एक्स प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि नौकरी छोड़ने के छह महीने के भीतर उसने चार प्रॉपर्टी डील पूरी कर ली हैं और इस दौरान रियल एस्टेट बिजनेस की कई ऐसी रियालिटी को करीब से देखा, जिनके बारे में पहले उसे कोई अंदाजा नहीं था. उसकी पोस्ट पर काफी संख्या में लोग रिएक्शन दे रहे हैं और अपने अनुभव भी शेयर कर रहे हैं.

शख्स ने 6 महीने में बदली जिंदगी

रेडिट (Reddit) पर लिखी अपनी पोस्ट में शख्स ने बताया कि उसने कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की नौकरी छोड़कर छोटे लेवल पर प्रॉपर्टी ब्रोकर का काम शुरू किया. इस दौरान उसने कई डील्स में हिस्सा लिया और कमीशन भी कमाया, लेकिन इस फिल्ड में काम करते हुए उसे कई ऐसी बातें पता चलीं, जिन्होंने उसे हैरान कर दिया.

कमीशन देने में आनाकानी करते हैं लोग

ब्रोकर का कहना है कि अगर वह किसी कस्टमर को 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी 95 लाख रुपये में दिला दे, तब भी कई लोग उसकी सर्विस फीस या कमीशन देने में आनाकानी करते हैं. उसके मुताबिक रियल एस्टेट में असली कमाई सही समय पर सस्ती प्रॉपर्टी पहचानने और बाद में उसे बेहतर कीमत पर बेचने में होती है. जो व्यक्ति अच्छी डील जल्दी पकड़ लेता है, वही ज्यादा फायदा कमाता है.

दस्तावेजों में भारी पड़ सकती है गलती

ब्रोकर ने कहा कि प्रॉपर्टी खरीदते समय दस्तावेजों को लेकर कोई भी शॉर्टकट नहीं अपनाना चाहिए. डॉक्यूमेंट की कमी फ्यूचर में प्रॉपर्टी बेचते समय बड़ी प्रॉबलम बन सकती है. उसका कहना है कि कई खरीदार आखिरी समय में अपना फैसला बदल देते हैं. ऐसे में केवल भरोसे या रिलेशन के आधार पर काम करना मुश्किल हो जाता है.

सिस्टम को समझे बिना काम मुश्किल

रियल एस्टेट बिजनेस में सिर्फ पैसा होना काफी नहीं है. ब्रोकर के अनुसार, जिस व्यक्ति का लोकल लेवल पर मजबूत नेटवर्क होता है वह अक्सर सबसे सफल साबित होता है. पोस्ट में ब्रोकर ने दावा किया कि कई जगहों पर काम जल्दी कराने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते हैं. उसके अनुसार, यह रियल एस्टेट सेक्टर की एक कड़वी सच्चाई है जिससे कई लोग दो-चार होते हैं. उसने कहा कि इस क्षेत्र में काम करते हुए उसे एहसास हुआ कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी और इन्वेस्टमेंट मौजूद है.

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बड़े खिलाड़ी भी कर जाते हैं गलत फैसले

ब्रोकर का मानना है कि रियल एस्टेट में कोई भी फ्यूचर की पूरी तरह प्रेडिक्शन नहीं कर सकता. कई बार अरबों रुपये की प्रोपर्टी वाले अनुभवी इन्वेस्टर भी ऐसी जगह इन्वेस्टमेंट कर देते हैं, जहां बाद में कीमतें नहीं बढ़तीं.

सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर किए अनुभव

जानकारी के अनुसार, पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने रियल एस्टेट ब्रोकर्स के साथ अपने अनुभव शेयर किए. एक यूजर ने कहा कि मैं ब्रोकरेज देने को तैयार हूं, लेकिन इंडियन ब्रोकर्स 'सर्विस' का मतलब ही नहीं समझते. कस्टमर की जरूरतों को समझने की कोशिश किए बिना बस बेकार प्रॉपर्टीज देना सर्विस नहीं है. वहीं एक और यूजर ने कहा कि भाई, मैं भी इस दौर से गुजरा हूं. प्रोजेक्ट्स को समझने और यह पता लगाने के लिए कि इंडिया में 'बायर-सेंटर्ड मॉडल' क्यों काम नहीं करता, मैंने बहुत मेहनत की. आखिर में मैंने इंटीरियर डिजाइनिंग कंपनी शुरू करने का फैसला किया.

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