Viral News: चेन्नई की एक प्रमुख आईटी कंपनी के डिलीवरी मैनेजर ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कैसे उन्हें अपनी टीम के 12 सदस्यों को निकालने का क्रूर आदेश मिला है. मैनेजर के लिए यह फैसला इसलिए बेहद दर्दनाक है क्योंकि उनके कर्मचारी उन्हें 'अन्ना' (बड़ा भाई) बुलाते हैं और जिनमें से कई इस समय होम लोन, कैंसर के इलाज और परिवार की अन्य गंभीर जिम्मेदारियों से जूझ रहे हैं. पार्किंग में कार के भीतर बैठकर रोते हुए मैनेजर ने अपना दर्द बयां किया.
न कोई बातचीत, न कुछ सोचने का मौका
फेसबुक पर Madras Techies पेज पर एक पोस्ट में मैनेजर ने बताया कि उसे बंद कमरे में बुलाकर उन लोगों की लिस्ट थमा दी, जिन्हें नौकरी से निकाला जाना था. इतना बड़ा फैसला लेने से पहले न कोई चर्चा, न ही कुछ सोचने का मौका दिया गया. मैनेजर ऑफिस की पार्किंग के बेसमेंट में कार में बैठकर रोता रहा. पर वह अपने साथियों के लिए कुछ नहीं कर पाया. जैसे ही कंपनी के लीडरशिप ने मैनेजर को नौकरी से निकाले जाने वाले कर्मचारियों की लिस्ट थमाई, उसी वक्त वह टूट गया.
मैनेजर बोला- हम एक साथ बड़े हुए हैं
फेसबुक में बताया गया कि सुबह लीडरशिप ने मैनेजर को एक बंद मीटिंग रूम में बुलाया, दरवाज़ा बंद किया और एक एक्सेल शीट थमा दी. उन्होंने मैनेजर से कहा कि इस शुक्रवार तक, अपनी टीम से 12 लोगों को निकालना होगा. कोई बातचीत नहीं, कोई चेतावनी नहीं, कोई दूसरा मौका नहीं. बस उन्हें 15 मिनट की मीटिंग में बुलाना है और उनकी नौकरी खत्म कर देनी है. मैनेजर ने कहा कि ये 12 लोग मेरे लिए सिर्फ कोई आम कर्मचारी नहीं हैं.
हम 2016 से हर दिन एक साथ काम कर रहे हैं. पूरे दस साल हो गए हैं. हम इस कंपनी में एक साथ बड़े हुए हैं. हम रात के 3:00 बजे तक ऑफिस में रुककर प्रोडक्शन से जुड़ी समस्याओं को सुलझाते थे, साथ में देर रात का खाना खाते थे, टेक पार्क के बाहर चाय की टपरी पर चाय पीते थे, और एक-दूसरे की शादियों में भी शामिल हुए हैं. मैनेजर का कहना है कि उसने उनके नवजात बच्चों को अपनी गोद में खिलाया है. वे मुझे सिर्फ 'मैनेजर' नहीं कहते, बल्कि पूरे सम्मान और प्यार से 'अन्ना' (बड़े भाई) कहकर बुलाते हैं. जब भी कंपनी को वीकेंड या छुट्टियों पर एक्स्ट्रा काम की ज़रूरत पड़ी, तो इन 12 लोगों ने कभी मना नहीं किया. उन्होंने बिना थके काम किया क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा था.
कई के सिर पर लोन, तो कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहा
अब, मुझे अपने ही हाथों से उनकी ज़िंदगी बर्बाद करनी है. फेसबुक पोस्ट के अनुसार, एक सीनियर डेवलपर ने चार महीने पहले ही एक बड़ा होम लोन लिया है. एक और साथी की मां अस्पताल में कैंसर से लड़ रही हैं और कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ही उनके इलाज का एकमात्र सहारा है. एक और साथी की पत्नी गर्भवती है, जिसकी डिलीवरी अगले महीने होनी है. शुक्रवार को मैं उनकी आंखों में देखकर कैसे कहूंगा कि 'आपका एक्सेस डीएक्टिवेट कर दिया गया है, अपना सामान समेटिए और यहां से चले जाइए'? टॉप मैनेजमेंट आलीशान कमरों में बैठता है, कॉस्ट-कटिंग और प्रॉफिट मार्जिन की बातें करता है, और सारा मुश्किल काम मुझ जैसे मिडिल मैनेजरों पर छोड़ देता है.
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उन्हें किसी के आंसू नहीं देखने पड़ते. उन्हें यह नहीं देखना पड़ता कि कैसे एक बड़ा-भला इंसान उनके सामने टूट जाता है और अपने परिवार को बचाने के लिए गिड़गिड़ाता है. मैनेजर ने भावुक होते हुए बताया कि कल सुबह, मुझे ऑफिस के फ्लोर पर जाना है. वे मेरी तरफ देखकर मुस्कुराएंगे और कहेंगे, "गुड मॉर्निंग, अन्ना." वे मेरे परिवार के बारे में पूछेंगे, और मुझे उनके सामने एक बनावटी चेहरा बनाकर देखना होगा, यह जानते हुए कि दो दिन बाद, मैं उन्हें सड़क पर ला खड़ा करने वाला हूं. मैनेजर ने कहा कि उसने इस्तीफा देने के बारे में सोचा, ताकि उसे यह सब न करना पड़े, लेकिन उसकी पत्नी ने याद दिलाया कि अगर वह इस्तीफा दे भी दे, तो कोई और उन्हें नौकरी से निकाल ही देगा, और ऊपर से मेरा अपना परिवार भी बिना कमाई के रह जाएगा.
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