Jammu And Kashmir News: श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर बुधवार को अपनी बाइक के साथ खड़ी 'बाइकर गर्ल' कंचन उगुरसंडी की खुशी का ठिकाना नहीं है. उन्होंने यहां तिरंगा फहराकर इसे उन सीनियर सिटिजन राइडर्स को समर्पित किया है, जो खुद यहां आकर झंडा नहीं फहरा सके. कंचन अपने रॉयल एनफील्ड राइडर्स क्लब की इकलौती महिला राइडर हैं, जो अक्सर रविवार को गुरुग्राम और मुरथल की ब्रेकफास्ट राइड पर जाती हैं.
जब कश्मीर में बुजुर्ग से उतरवाया गया था तिरंगा
कंचन बताती हैं कि कुछ साल पहले एक 65 वर्षीय बुलेट राइडर ने उन्हें लद्दाख यात्रा के दौरान कश्मीर में हुए अपने कड़वे अनुभव के बारे में बताया था. वहां के स्थानीय लोगों ने जबरदस्ती उनकी बुलेट से तिरंगा हटाकर कहा था कि 'यह कश्मीर है, भारत नहीं'. वहां मौजूद पुलिस ने भी झंडा हटाने को कहा था, जिससे आहत होकर वे बुजुर्ग रो पड़े थे. उस वक्त कंचन ने उनसे लाल चौक पर उनकी तरफ से तिरंगा फहराने का वादा किया था. उन्होंने कहा था, 'अंकल, जब भी मैं कश्मीर जाऊंगी, तो आपकी तरफ से लाल चौक पर तिरंगा फहराऊंगी'. आज इस वादे को उन्होंने पूरा कर दिखाया.
मैं अपने रॉयल एनफील्ड राइडर्स क्लब की इकलौती महिला राइडर हूँ। हम अक्सर रविवार को गुरुग्राम और मुरथल में ब्रेकफ़ास्ट राइड पर जाते हैं। कुछ साल पहले मेरी मुलाक़ात 65 साल के एक बुलेट राइडर से हुई। उन्होंने मुझे लद्दाख राइड के दौरान हुए अपने बुरे अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा… pic.twitter.com/6yutiE2Tab
— Kanchan Ugursandi - 𑢬𑣁𑣓𑣏𑣉𑣓 𑢧𑣋𑣃𑣜𑣞𑣁𑣓 (@BikerGirlkancha) August 5, 2026
झारखंड की रहने वाली हैं 34 वर्षीय कंचन
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के बिदरी गांव की मूल निवासी कंचन उगुरसंडी आदिवासी 'हो' समाज से आती हैं. 34 वर्षीय कंचन के पिता घनश्याम उगुरसंडी रेलवे कर्मचारी हैं और मां मुन्नी उगुरसंडी गृहिणी हैं. पिता की खड़गपुर में पोस्टिंग के कारण कंचन की स्कूली पढ़ाई खड़गपुर से हुई, जिसके बाद उन्होंने बेंगलुरु से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. पिछले दो वर्षों से वे नयी दिल्ली नगर निगम (MCD) में कार्यरत हैं.
कौन है माइनस 40 डिग्री से टकराने वाली कंचन?
कंचन माउंटेन बाइकिंग की दुनिया में कोई नया नाम नहीं हैं. पूरे देश में उनका अच्छा-खासा जलवा है. आपको याद दिला दें कि वो दुनिया की सबसे ऊंची सड़क पर अकेले बाइक दौड़ाने वाली विश्व की पहली महिला हैं. उन्होंने माइनस 40 डिग्री की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भारतीय सेना की बनाई आखिरी सड़क तक पहुंचकर यह शानदार रिकॉर्ड बनाया था. उत्तरी हिमालय के 18 सबसे खतरनाक पहाड़ी रास्तों को अकेले पार करके उन्होंने जो कारनामा किया था, उसकी तारीफ खुद रक्षा मंत्रालय भी कर चुका है. इसके अलावा, उमलिंगला पास फतह करने वाली भी वो पहली महिला सोलो बाइकर हैं. इतना ही नहीं, दिल्ली से मनाली, लेह, उमलिंगला होते हुए वापस दिल्ली तक का 3187 किलोमीटर का लंबा सफर उन्होंने एक ही झटके में नाप दिया था.
'बॉर्डर गर्ल' के नाम 22 दर्रों और सरहदों का रिकॉर्डअपनी बेमिसाल यात्राओं की वजह से कंचन को लोग 'बॉर्डर गर्ल' भी कहते हैं. वो अब तक हिमालय के 22 सबसे खतरनाक पहाड़ी रास्तों को पार कर चुकी हैं. इसके अलावा, उन्होंने गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के बॉर्डर पर एकदम आखिरी छोर तक अपनी बाइक दौड़ाई है. इन मुश्किल यात्राओं के पीछे उनका एक ही मकसद है- सरहद पर डटे हमारे जवानों का हौसला बढ़ाना और देश की महिलाओं को सशक्त करना. कंचन का मानना है कि उनका यह सफर बाकी लोगों को भी अपनी हदें पार करने और महिलाओं की ताकत का खुलकर सपोर्ट करने के लिए हिम्मत देगा.
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