Viral Video: 'स्लो लाइफ' जीने के लिए गुजरात के रहने वाले राधिका और एकांश ने 7 साल बाद बेंगलुरु छोड़ दिया है और गोवा में एक फ्लैट लेकर रहने लगे हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी शिफ्टिंग का खर्च बताया है. साथ ही यह जानकारी भी दी है कि जो लाइफ वो सोचकर वहां गए थे, क्या वे ऐसी जी भी पा रहे हैं या नहीं. उनके इस वीडियो को देखकर यकीनन गोवा में बसने का ख्वाब देखने वाले लोगों को अपने सभी सवालों के जवाब मिल गए हैं.
बेंगलुरु से गोवा शिफ्ट होने में कितना खर्च आया?
एकांश ने बताया, 'बेंगलुरु वाली सोसाइटी छोड़ने के लिए हमें 3,000 रुपये देने पड़े. इसके बाद 4,000 रुपये फर्नीचर को पैक करने पर खर्च हुए. 24,000 रुपये फर्नीचर को बेंगलुरु से गोवा भेजने में खर्च हुए. 4,000 रुपये उसे गोवा में एक महीने के लिए स्टोर करने पर खर्च हुए. कार को गोवा तक ले जाने में 5,000 रुपये का पेट्रोल लगा. साथ ही साथ सर्विस और PUC के 4,000 रुपये और लगे. 1,000 रुपये टोल टैक्स देना पड़ा. 1,000 रुपये का खाना हम घर से पैक करके ले गए थे. करीब 1,000 रुपये हमारे रास्ते में खाने पर खर्च हो गए. हमने गोवा पहुंचकर घर फाइनल करने का फैसला किया था. इसीलिए शुरुआत के 3 हफ्ते Airbnb में रुके जिसका खर्च 45 हजार रुपये आया. हालांकि हमने इसे कुल खर्च में शामिल नहीं किया है. इसके अलावा, गोवा में सब्जी खरीदकर बनाने और बाहर खाने में 12 हजार रुपये खर्च हो गए. करीब 5,000 रुपये गोवा में घर ढूंढते वक्त हमने पेट्रोल पर खर्च कर दिए. घर मिलने के बाद एसी रि-इंस्टॉल जैसे बाकी खर्चों को मिलाकर हमने 9,500 रुपये खर्च किए. यानी हमारे कुल 73,500 रुपये खर्च हुए.'
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पेरेंट्स को समझाया, रेडिट-यूट्यूब से देखा कहां जाएं
प्रोडक्ट मैनेंजमेंट की नौकरी करने वाले कपल ने दूसरे वीडियो में बताया, 'जब हमने अपनी फैमिली को रिमोट जॉब मिलने के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि गोवा क्यों जाना, हमारे पास ही रहो. लेकिन धीरे-धीरे हमने उन्हें मना लिया. इस दौरान हमारी मदद रेडिट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर और फेसबुक कम्युनिटी ने की. हमने वहां लोगों के एक्सपीरियंस देखे और उन लोगों के संपर्क में आए. बाद में उन्होंने ही हमारी वहां शिफ्ट होने में मदद की.
'लिंक्डइन से ढूंढी वर्क फ्रॉम होम वाली जॉब'
राधिका ने इस पर एक अलग वीडियो बनाते हुए कहा, 'मैंने फरवरी में लिंक्डइन पर वर्क फ्रॉम होम वाली प्रोडक्ट मैनेजमेंट जॉब ढूंढनी शुरू की. मुझे कई जॉब नजर भी आईं, लेकिन उन रोल्स के आखिर में एक लाइन लिखी होती कि आपको सुबह 4 बजे तक काम करना होगा. इसीलिए मैंने उन जॉब को इग्नोर किया और अपनी तलाश जारी रखी. जिस भी कंपनी की वैकेंसी मुझे पसंद आती थी, उन कंपनी के पेज पर जाकर मैं वहां के सीनियर एम्प्लाइज से कनेक्ट करती थी और उनके रेफरेंस की मदद से अपना सीवी एचआर तक पहुंचाती थी. ऐसे इंटरव्यू कॉल आने के चांस ज्यादा होते हैं. मेरे साथ यही हुआ और मुझे जॉब मिल गई.'
गोवा जाकर भी वो क्या चीज थी जो हासिल नहीं हुई?
आईआईटी ग्रेजुएट एकांश ने कहा, 'बेंगलुरु से गोवा आने के बाद हमें किसी भी जगह से काम करने की आजादी तो मिली, लेकिन मेरा समय अब भी मेरे हाथ में नहीं था. अगर किसी मंगलवार को मेरा पिक्चर देखकर सोने का मन है, तो मैं वो नहीं कर सकता, क्योंकि दोपहर 2 बजे मेरी मीटिंग होती है. लोग कहते हैं बिजनेस चलाना मुश्किल है. लेकिन ये भूल जाते हैं कि जॉब भी तो आसान नहीं है. इसीलिए मैंने फैसला किया है कि मैं अपने बच्चों को उस ट्रैप में नहीं फंसने दूंगा कि वो भी हर महीने के आखिर में आने वाले सैलरी क्रेडिट नोटिफिकेशन का इंतजार करे.'
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'बेंगलुरु में तो बस मशीनी जिंदगी है'
इस कपल के वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इन्हें देखकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
एक यूजर ने कहा, 'गोवा में आपका स्वागत है. बस इसे बेंगलुरु जैसा मत बना देना.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'किस्मत वाले हो तुम लोग. यह तो जन्नत है. गोवा में अपनी जिंदगी अच्छे से जियो. बेंगलुरु में तो बस मशीनी जिंदगी है.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'क्या भारत में एक जगह से दूसरी जगह जाना कोई अपराध है? कुछ कमेंट्स तो बहुत ही बुरे हैं. जैसे कि यहां मत आओ वगैरह. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उसने आपसे आपकी जगह मांगी थी?'
चौथे यूजर ने लिखा, 'मेरे अनुभव ने मुझे सिखाया है कि रिमोट वर्क से आपकी जिंदगी धीमी हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. गांव में रहने से भी ऐसा नहीं होता. मैं पिछले 5 सालों से अपने गांव से रिमोट वर्क कर रहा हूं, लेकिन आजकल मेरा लगभग पूरा दिन कंप्यूटर के सामने ही बीतता है. आखिरकार, आप चाहे कहीं भी रहें, काम की भागदौड़ भरी दिनचर्या आप तक पहुंच ही जाती है. किसी शांत जगह पर रहने का मतलब अपने आप एक शांत जीवनशैली होना नहीं है.'
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