Zara Hatke News: एप्पल (Apple) जैसी बड़ी कंपनी, जो दुनिया भर में इस बात के लिए जानी जाती है कि वह अपने कर्मचारियों का बहुत ख्याल रखती है, उस पर एक पूर्व कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं. कर्मचारी का कहना है कि मानसिक बीमारी से जूझने के दौरान उसके बॉस और मैनेजमेंट ने उसकी कोई मदद नहीं की, जिसके चलते उसे मजबूरन अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी. उसने अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया है कि कैसे कंपनी के खराब रवैये ने उसे नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया.
कंपनी के बेस्ट कर्मचारी को नौकरी क्यों छोड़नी पड़ी?
अपनी पहचान छुपाते हुए इस शख्स ने Reddit पर बताया कि वह लगभग एक महीने पहले तक ऐप्पल में काम कर रहा था. पहले साल उसने बहुत बढ़िया काम किया और वह कंपनी के बेस्ट कर्मचारियों में से एक था. लेकिन, काम के भारी दबाव के कारण उसे बहुत ज्यादा घबराहट और बेचैनी होने लगी. कर्मचारी ने बताया कि कहने को तो यह नौकरी उसने खुद छोड़ी, लेकिन असल में हालात ऐसे बना दिए गए थे कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे, या फिर आगे चलकर कंपनी उसे निकाल देती.
Did anyone here receive support from management for health conditions ?
by u/One_Perception_4018 in Apple_Employees
डॉक्टर की रिपोर्ट देने के बाद भी नहीं मिली कोई मदद
इस कर्मचारी को दो तरह की मानसिक बीमारियां (ADHD और एगोराफोबिया) थीं. उसने सही तरीके से डॉक्टर का सर्टिफिकेट कंपनी को दिया और अपने बॉस को खुलकर बताया कि उसे काम करने में दिक्कत हो रही है. मैनेजमेंट ने कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए एक हेल्थ चेकअप तो करवा दिया, ताकि उसे काम में कुछ छूट या मदद मिल सके, लेकिन असलियत में किसी भी बॉस ने उस रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया. किसी ने उसकी परेशानी नहीं समझी. कानूनन जो सहूलियतें उसे मिलनी चाहिए थीं, वो उसे बिल्कुल नहीं दी गईं.
छुट्टी से लौटने पर मिला बेहद खराब बर्ताव
इसी बीच उसके एक करीबी दोस्त का निधन हो गया. तनाव और दुख के कारण उसे मेडिकल लीव लेनी पड़ी. लेकिन जब वह वापस काम पर आया, तो ऑफिस का माहौल उसके लिए एकदम बदल चुका था. यूजर ने लिखा, 'बॉस का रवैया मेरे लिए बहुत रूखा हो गया था. मुझे ऐसा लगने लगा जैसे सब जानबूझकर मुझे परेशान कर रहे हैं या मुझे निशाना बना रहे हैं.'
जब भी वह काम में फंसता और मदद मांगता, तो उसे इग्नोर कर दिया जाता. हद तो तब हो गई जब एक बॉस ने उसकी बीमारी को 'बकवास' कह दिया. बॉस का बेतुका तर्क था कि 'जब तुम अपने पहले साल में बिल्कुल ठीक थे, तो अब ये सब क्या है.'
नियमों के तहत क्या सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं?
इक्वालिटी एक्ट और कॉर्पोरेट नियमों के तहत, ADHD और एगोराफोबिया जैसी मानसिक समस्याओं वाले कर्मचारियों को कई कानूनी सहूलियतें मिलनी चाहिए. इनमें शोर से दूर शांत वर्कस्पेस, काम के बीच छोटे ब्रेक, लिखित निर्देश, भीड़ से बचने के लिए वर्क फ्रॉम होम या फ्लेक्सिबल टाइमिंग और पेड मेडिकल लीव जैसी सुविधाएं शामिल हैं. लेकिन पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि पक्के मेडिकल सर्टिफिकेट होने के बावजूद, एप्पल के मैनेजर्स ने उसे सुविधा नहीं दी और उसकी बीमारी को महज एक 'बहाना' बताकर खारिज कर दिया.
(अस्वीकरण: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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