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वाराणसी का 1930 का दुर्लभ वीडियो, 94 साल पहले कैसे दिखते थे काशी विश्वनाथ मंदिर और मणिकर्णिका घाट

सोशल मीडिया पर 1930 में शूट किया गया बनारस का एक दुर्लभ वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें 94 साल पुराने गंगा घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर और शहर की सड़कों पर चलते ऊंट-बैलगाड़ियों की अनदेखी झलक दिखाई गई है.

वाराणसी का 1930 का दुर्लभ वीडियो, 94 साल पहले कैसे दिखते थे काशी विश्वनाथ मंदिर और मणिकर्णिका घाट
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 94 साल पुराने बनारस का यह दुर्लभ वीडियो.
Youtube@TheBharatArchives

VIRAL VIDEO: अगर आपको टाइम मशीन में बैठकर लगभग एक सदी पीछे जाने का मौका मिले, तो बनारस कैसा दिखेगा? सोशल मीडिया पर इन दिनों 1930 का एक दुर्लभ वीडियो खूब देखा जा रहा है, जो आपको 94 साल पुरानी काशी की गलियों और घाटों पर ले जाता है. इस ऐतिहासिक फुटेज को जे. शिपली डिक्सन (J. Shipley Dixon) ने अपने कैमरे में कैद किया था और इसे 'द भारत आर्काइव' (The Bharat Archive) यूट्यूब चैनल पर शेयर किया गया है.

घाटों की रौनक और आस्था की डुबकी

वीडियो की शुरुआत बनारस की जान यानी गंगा के घाटों से होती है. सुबह की हलचल के बीच पारंपरिक धोती-कुर्ता और साड़ी पहने सैकड़ों लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगाते नजर आते हैं. कोई सूर्य को जल चढ़ा रहा है, तो कोई घाट की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा-पाठ में मग्न है. चेहरे अलग हैं, लेकिन आस्था का भाव आज जैसा ही जीवंत है.

जीवन और मृत्यु का संगम: मणिकर्णिका घाट

कैमरा जब मणिकर्णिका घाट की तरफ मुड़ता है, तो काशी का वह रूप दिखता है जहां मौत को भी मोक्ष माना जाता है. घाट पर जलती चिताएं और पारंपरिक तरीके से होता अंतिम संस्कार जीवन और मृत्यु के शाश्वत चक्र को बिना किसी बनावट के सामने रखता है.  

संकरी गलियां, बैलगाड़ी और पुराने मंदिर

घाटों से निकलकर जब आप शहर के भीतर आते हैं, तो उस दौर का असली बनारसीपन दिखता है. संकरी गलियों में अपने रोजमर्रा के कामों में जुटे लोग, पुरानी इमारतें और आज की गाड़ियों की जगह सड़कों पर चलते ऊंट और बैलगाड़ियां आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं. वीडियो में काशी विश्वनाथ मंदिर और दुर्गा मंदिर की झलक भी है, जहां भक्तों की भारी भीड़ और मंदिरों की भव्य बनावट साफ देखी जा सकती है.

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सांप और नेवले की लड़ाई का तमाशा

वीडियो के आखिरी हिस्से में उस दौर के मनोरंजन की एक अनोखी झलक मिलती है. इसमें सड़क किनारे सांप और नेवले की लड़ाई का एक दुर्लभ दृश्य है, जो बताता है कि 90 साल पहले आम लोगों के मनोरंजन के साधन कितने अलग और देसी हुआ करते थे.

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कौन थे फिल्म निर्माता डिक्सन

J. Shipley Dixon 1930-1940 के दशक के एक शौकिया फिल्म निर्माता और ट्रैवलर थे. 1930 के दशक के दौरान भारत और दक्षिण अमेरिका सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की. वहां के दृश्यों को कैमरे में कैद किया. उनके द्वारा बनाई गई फिल्में आज ऐतिहासिक दस्तावेजों के रूप में बेहद कीमती हैं डिक्सन ने  साल 1937 और 1938 के दौरान ब्रिटिश भारत का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने दिल्ली, आगरा और फतेहपुर सीकरी जैसी ऐतिहासिक जगहों के रंगीन और ब्लैक-एंड-व्हाइट वीडियो शूट किए थे. उनके द्वारा बनाए गए वीडियो में उस दौर के मुगल स्मारकों, कुतुब मीनार, जामा मस्जिद और भारत के तत्कालीन जनजीवन (जैसे सड़कों पर सांपों का खेल दिखाते सपेरे और स्थानीय बाजार) को बेहद करीब से दिखाया गया है.

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