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This Article is From Mar 24, 2026

8वीं पास शख्स का कमाल! जुगाड़ से बना डाला 'विश्वगुरु चूल्हा', 30 मिनट में 25 लोगों का खाना हो जाता है तैयार

मोहम्मद शेर खान की यह कहानी साबित करती है कि हुनर और मेहनत के दम पर कोई भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. उनका ‘विश्वगुरु चूल्हा’ आज न सिर्फ लोगों का काम आसान बना रहा है, बल्कि पर्यावरण को बचाने में भी मदद कर रहा है.

8वीं पास शख्स का कमाल! जुगाड़ से बना डाला 'विश्वगुरु चूल्हा', 30 मिनट में 25 लोगों का खाना हो जाता है तैयार
LPG महंगी पड़ी तो बना डाला ‘विश्वगुरु चूल्हा’, अब हर जगह हो रही चर्चा

राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले मोहम्मद शेर खान इन दिनों अपने खास आविष्कार ‘विश्वगुरु चूल्हा' को लेकर चर्चा में हैं. शेर खान ने सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई की, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और हुनर से ऐसा चूल्हा बना दिया, जो आज हजारों लोगों के काम आ रहा है. वह पेशे से लोहार हैं और पिछले करीब 27 सालों से धातु के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि गांवों में खाना बनाने में बहुत समय लगता था, लकड़ी ज्यादा खर्च होती थी और धुएं से महिलाओं की सेहत पर भी असर पड़ता था. इसी समस्या को हल करने के लिए उन्होंने यह खास चूल्हा तैयार किया.

3-इन-1 चूल्हा, कम ईंधन में ज्यादा काम

‘विश्वगुरु चूल्हा' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 3-इन-1 सिस्टम पर काम करता है. नीचे दाल या सब्जी पकती है. बीच में तलने का काम होता है और ऊपर रोटी या बाटी सेंकी जाती है. इस चूल्हे में सिर्फ 2 किलो लकड़ी लगती है और 30 मिनट में 25–30 लोगों का खाना तैयार हो जाता है. इसका डिजाइन ऐसा है कि गर्मी बेकार नहीं जाती और धुआं भी बहुत कम निकलता है, जिससे पर्यावरण और सेहत दोनों को फायदा होता है.

देखें Video:

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ Video

शेर खान ने अपने चूल्हे का डेमो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें वह एक साथ दाल, बाटी और चूरमा बनाते दिखते हैं. यह वीडियो लोगों को खूब पसंद आ रहा है और लोग इस जुगाड़ की तारीफ कर रहे हैं. कई लोग हैरान हैं कि इतनी कम लकड़ी में इतना ज्यादा खाना कैसे बन सकता है.

कीमत और बढ़ती मांग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेर खान अब तक 10,000 से ज्यादा चूल्हे बेच चुके हैं. इसकी कीमत लगभग 6,500 रु से 10,000 रु के बीच है. यह खासतौर पर बड़े परिवारों, गांवों, ढाबों और छोटे होटलों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है. कई जगहों पर लोग इसे LPG के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल करने लगे हैं.

पर्यावरण और समय दोनों की बचत

शेर खान का मकसद सिर्फ एक प्रोडक्ट बनाना नहीं, बल्कि लोगों का समय बचाना और ईंधन की खपत कम करना है. उनका यह आविष्कार दिखाता है कि अगर किसी समस्या को सही तरीके से समझा जाए, तो बिना बड़ी डिग्री के भी बड़ा इनोवेशन किया जा सकता है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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