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ट्विशा मामले में CJI सूर्यकांत को क्यों लेना पड़ा स्वतः संज्ञान? जान लीजिए क्या है पूरी कहानी

ट्विशा शर्मा केस में जांच की निष्पक्षता और न्यायपालिका पर उठे सवालों के चलते CJI सूर्यकांत ने स्वतः संज्ञान लिया. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 25 मई को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आए और भरोसा बहाल हो सके.

ट्विशा मामले में CJI सूर्यकांत को क्यों लेना पड़ा स्वतः संज्ञान? जान लीजिए क्या है पूरी कहानी
‘न्यायपालिका की छवि’ और निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के बीच CJI ने लिया स्वत: संज्ञान
  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा मौत मामले का स्वतः संज्ञान लेकर 25 मई को सुनवाई तय की है.
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जांच में कथित पक्षपात और प्रक्रियागत गड़बड़ियों को गंभीर माना है.
  • CJI का मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए इस मामले को स्वतंत्र और दबाव-मुक्त एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए.
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नई दिल्ली:

ट्विशा शर्मा मौत मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल केस का स्वतः संज्ञान लेते हुए 25 मई को सुनवाई तय कर दी है. कोर्ट ने मामले को 'वैवाहिक घर में अस्वाभाविक मौत और जांच में कथित पक्षपात' से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है, जिससे साफ है कि शीर्ष अदालत इस केस की निष्पक्ष जांच को लेकर चिंतित है.

क्यों लिया CJI ने SUO-MOTU?

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. आरोप थे कि जांच में प्रक्रियागत गड़बड़ियां हुई हैं और कुछ स्तर पर न्यायपालिका के दखल की वजह से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का मानना है कि ऐसे आरोप न सिर्फ जांच पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि उन्होंने खुद हस्तक्षेप करते हुए मामले का स्वतः संज्ञान लिया.

जांच पर सवाल और ‘संस्थागत पक्षपात' के आरोप

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा जांच की निष्पक्षता को लेकर है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि केस में प्रक्रियागत गड़बड़ियां हुईं और कुछ स्तर पर न्यायपालिका के दखल के कारण जांच प्रभावित हो सकती है. इन्हीं आरोपों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियों से जुड़ा मामला मानते हुए गंभीरता से लिया है.\

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न्यायपालिका की छवि को लेकर चिंता

CJI सूर्य कांत का मानना है कि अगर किसी केस में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं, तो यह केवल एक केस का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डालता है. इसी चिंता के चलते उन्होंने स्वतः संज्ञान लेकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि न्यायपालिका निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी.

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‘निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच' की जरूरत

सूत्रों के अनुसार CJI का स्पष्ट मत है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए. उनका मानना है कि केवल स्वतंत्र और दबाव-मुक्त जांच ही इस केस की सच्चाई सामने ला सकती है और सभी सवालों का जवाब दे सकती है.

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सिस्टम पर भरोसा बहाल करने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करना भी है. ट्विशा केस में लगातार उठ रहे सवालों ने जनता के बीच शंका पैदा की थी, जिसे अब शीर्ष अदालत दूर करना चाहती है.

25 मई को अहम सुनवाई

CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी. इस दौरान जांच की दिशा, एजेंसी और प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश सामने आ सकते हैं.

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