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Exclusive: क्या भारत अब अमेरिका से तेल आयात करेगा? मार्को रूबियो ने बताई वजह

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं. इस दौरे में भारत-अमेरिका संबंधों में नये आयाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है. एनडीटीवी से खास बातचीत में मार्को रूबियो ने भारत की ऊर्जा जरूरतों और अमेरिका के बिजनेस लक्ष्यों पर बात की.

Exclusive: क्या भारत अब अमेरिका से तेल आयात करेगा? मार्को रूबियो ने बताई वजह
मार्को रूबियो अमेरिकी विदेश मंत्री बनने से पहले भी भारत से दोस्ती के पक्ष में रहा करते थे.
  • अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक देश है और प्रतिदिन विशाल मात्रा में ऊर्जा निकालता है
  • अमेरिका ने भारत से आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अमेरिका फर्स्ट वीजा शेड्यूलिंग टूल लॉन्च किया है
  • यह नया वीजा टूल उन व्यापारिक पेशेवरों को प्राथमिकता देता है जो अमेरिका-भारत आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देते हैं
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दुनिया भर में तेल-गैस का संकट छाया हुआ है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद हर देश तेल-गैस की बढ़ती कीमतों से परेशान है. अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक देश है. अमेरिका में प्रतिदिन लगभग 1.35 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 10.5 अरब घन फुट से ज्यादा प्राकृतिक गैस निकाली जाती है. अब अमेरिका चाहता है कि भारत तेल-गैस उससे खरीदे? पर क्या भारत ऐसा चाहेगा?

मार्को रूबियो ने बताई वजह

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि  'इंडिया बहुत बुद्धिमानी से अपने ऊर्जा जरूरतों के लिए कई देशों को साध रहा है. वो दुनिया के किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहते. होर्मुज इसका एक उदाहरण है. भारत ने ऊर्जा आयात में विविधता लाकर बुद्धिमानी का परिचय दिया है. अमेरिका के पास निर्यात के लिए पर्याप्त ऊर्जा भंडार है. ये भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी. वेनेजुएला से भी ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकती हैं. तो इस तरह से दोनों देशों के लिए ऊर्जा सहयोग महत्वपूर्ण है.'

"अमेरिका फर्स्ट" वीजा 

मार्को रुबियो ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों के कामकाज को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयास के तहत "अमेरिका फर्स्ट" वीजा शेड्यूलिंग टूल पेश किया है. भारत की अपनी चार दिवसीय उच्चस्तरीय राजनयिक यात्रा के दौरान, रुबियो ने इस वीजा टूल के बारे में बात की, जो व्यावसायिक पेशेवरों और उन लोगों को प्राथमिकता देता है जिनकी यात्रा अमेरिका के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को सीधे मजबूत करती है. रुबियो ने अमेरिका-भारत संबंधों की नींव पर प्रकाश डाला और बताया कि ये संबंध उन तरीकों से भी विकसित हो रहे हैं, जो हमेशा सुर्खियों में नहीं आते. उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत ने 20 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के साथ अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार किया है.

किसको मिलेगा ये वीजा

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि धीमी या अनिश्चित कांसुलर प्रक्रिया उन आदान-प्रदानों में बाधा बन सकती है, जैसे कि व्यापारिक दौरे, निवेश यात्राएं और साझेदारी बैठकें, जो इन संबंधों को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं. इस बाधा को दूर करने के लिए एक बेहतर समय-निर्धारण प्रणाली की आवश्यकता है. यह टूल एक ही प्राथमिकता सिद्धांत पर आधारित है कि जो आवेदक संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करते हैं, उन्हें शेड्यूलिंग में पहले प्रवेश मिलता है. व्यवहार में, इसका मतलब व्यावसायिक पेशेवर हैं, यानी वे लोग जो सौदे करने, समझौते पर हस्ताक्षर करने, संचालन का विस्तार करने या अमेरिकी बाजारों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए आते हैं.

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