- ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स ने सबसे अच्छे शहर चुनने के लिए 5 पैमाने तय किए.
- इस आधार पर दुनिया के 1000 शहरों को जांचा-परखा गया और फिर 10 शहरों को चुना गया.
- खास बात ये है कि इन 10 शहरों में 5 अमेरिका के हैं, मगर चीन और रूस के एक भी शहर शामिल नहीं हैं.
दुनिया भर में एक से बढ़कर एक सुंदर शहर हैं. अगर घूमने और रहने के लिए इनमें से किन्हीं 10 को सबसे अच्छा बताना हो तो ये तय करना बहुत मुश्किल काम होता है. किसी को पुराने शहर पसंद आ सकते हैं तो किसी को नये बसे शहर. किसी को शांति पसंद आ सकती है तो किसी को चमक-दमक. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स ने सबसे अच्छे शहर चुनने के लिए 5 पैमाने तय किए. ये हैं गवर्नेंस, इकोनॉमिक्स, ह्यूमन कैपिटल, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता.
गवर्नेंस में ट्रैफिक से लेकर साफ-सफाई और कानून-व्यवस्था सब आ जाती है. अगर आप या कोई भी कहीं घूमने जाएगा तो ये तो चाहेगा ही. दूसरे पैमाना है इकोनॉमिक्स का. अगर किसी शहर के लोग बहुत गरीब हैं तो जाहिर है वहां गवर्नेंस तो अच्छी नहीं ही हो सकती है. क्योंकि किसी भी सरकार को काम करने के लिए पैसे की जरूरत होती है. अगर लोग गरीब हैं तो जाहिर है कि वहां से सरकार को टैक्स मिलेगा नहीं और फिर वहां डेवलपमेंट उतना होगा नहीं. तो जगह अगर सुंदर भी हुई तो गंदगी से लेकर आने-जाने की परेशानी से लेकर कानून व्यवस्था से आपको दो-चार होना पड़ेगा. यही बाकी पैमानों के साथ भी है. इन 5 पैमानों पर 1,000 शहरों को परखा गया और अंतत: इन्हें चुना गया.

इस साल की लिस्ट में न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस सबसे ऊपर हैं, जबकि सिएटल और डबलिन जैसे शहरों को भी अच्छी रैंकिंग मिली है. दुनिया के टॉप शहरों में 'ह्यूमन कैपिटल' (मानव पूंजी) का अच्छा स्कोर देखने को मिलता है. यह पैमाना वहां के लोगों की स्किल्स, शिक्षा और विविधता को मापता है. टैलेंट और नए विचारों के आने से वहां के इलाकों, खाने-पीने और संस्कृति में ऐसे बदलाव आते हैं, जिनसे स्थानीय लोगों और यात्रियों, दोनों को फायदा होता है. सीधे शब्दों में कहें तो आपको बेहतर माहौल मिलता है.
इस इंडेक्स में सातवें नंबर पर मौजूद बोस्टन ने 'ह्यूमन कैपिटल' में बहुत अच्छा स्कोर किया है. इसकी एक बड़ी वजह वहां मौजूद कई बेहतरीन यूनिवर्सिटी और कॉलेज हैं. अपनी मजबूत "नॉलेज इकॉनमी" की वजह से यह शहर दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शहरों में से एक है. इस कमाई का कुछ हिस्सा सार्वजनिक जगहों को बेहतर बनाने में लगाया जाता है, जैसे 'रोज कैनेडी ग्रीनवे'. यह पहले एक ऊंचा हाईवे हुआ करता था, लेकिन अब इसके किनारे बगीचे, फव्वारे और पब्लिक आर्ट बनाए गए हैं. साथ ही, हार्वर्ड आर्ट म्यूजियम जैसे संस्थान भी आम लोगों के लिए खुले हैं.

रात में न्यूयार्क कुछ इस तरह ऊपर से नजर आता है.
छठे स्थान पर मौजूद डबलिन को ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन जैसे संस्थानों से समर्थित अत्यधिक कुशल कार्यबल का लाभ मिलता है, जो गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और एक्सेंचर जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करता है. यही संसाधन लिफी नदी के आसपास के पुराने डॉकलैंड्स और सार्वजनिक स्थानों को सुंदर बनाए रखने में योगदान देते हैं.
लंदन एक पुराना शहर है, मगर ह्यूमन कैपिटल के कारण यह इंडेक्स में काफी आगे है. यहां दुनिया भर से लोग काम करने आते हैं और शहर की कुल आबादी में लगभग 40% लोग विदेशों में जन्मे हैं. शहर की विविधता ने यहां के खाने-पीने के माहौल को बदलने में मदद की है, जिसे यात्री ब्रिक लेन से लेकर बोरो मार्केट तक कहीं भी आजमा सकते हैं.

लंदन की खूबसूरती आज भी कायम है.
हालांकि, सिर्फ आर्थिक ताकत ही किसी शहर को आकर्षक नहीं बनाती. कुल मिलाकर तीसरे नंबर पर रहने वाला पेरिस, जीवन की गुणवत्ता के मामले में बहुत आगे है. इसकी वजह है यहां के लोगों की लंबी उम्र और संस्कृति तक बेहतरीन पहुंच. शहर में लगभग 130 म्यूज़ियम हैं. इनमें से 11 म्युनिसिपल म्यूजियम में 2001 से ही परमानेंट कलेक्शन देखने के लिए मुफ्त एंट्री मिलती है, चाहे आपकी राष्ट्रीयता या रहने का देश कोई भी हो. कई अन्य म्यूजियम में भी महीने में कम से कम एक बार मुफ्त एंट्री मिलती है.
चौथे स्थान पर रहने वाले सिएटल को भी 'जीवन की अच्छी गुणवत्ता' वाले स्कोर का फायदा मिला है. रिपोर्ट में शहर की कला से जुड़ी खूबियों, जैसे सिएटल आर्ट म्यूजियम और ग्रंज म्यूज़िक के इतिहास (जिससे निर्वाणा और पर्ल जैम जैसे रॉक बैंड निकले) का ज़िक्र किया गया है. शहर ने हाल ही में अपना 20 एकड़ का वॉटरफ़्रंट पार्क पूरा किया है. इसमें एक तोड़ी गई मोटरवे की जगह एक वॉकवे बनाया गया है, जिसमें नए कम्युनिटी पियर और बाइक लेन हैं, साथ ही यहां से प्यूजेट साउंड का नजारा भी दिखता है.

पेरिस आज भी पर्यटकों की टॉप पसंद बना हुआ है.
कोई शहर रोमांचक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो सकता है, लेकिन अगर पर्यावरण खराब हो तो सब बेकार है. पहाड़ों, नदियों के पास साफ-सफाई हो, आसमान और हवा साफ हो तो वो जीने का आनंद कई सौ गुणा बढ़ा देते हैं. लंदन पर्यावरण से जुड़े पैमानों पर भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करता है. ऑक्सफ़र्ड इकोनॉमिक्स का कहना है कि 'कंजेशन चार्ज' और 'अल्ट्रा-लो एमिशन जोन' जैसी नीतियां ट्रैफ़िक और प्रदूषण को कम करने में मदद करती हैं; इन बदलावों को यात्री शहर के बीच की उन सड़कों पर महसूस कर सकते हैं, जहां कारों की आवाजाही कम हो गई है.
सैन फ्रांसिस्को भी पर्यावरण के मामले में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. इंडेक्स के अनुसार, यहां के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की वजह से लोग और यहां आने वाले सैलानी कारों पर कम निर्भर हैं, जिससे प्रदूषण कम होता है और हवा की गुणवत्ता अच्छी बनी रहती है. डबलिन का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा रहा है, क्योंकि यहां प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से कम है और जलवायु से जुड़े कई बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं, जिनमें 2030 तक 'क्लाइमेट न्यूट्रैलिटी' हासिल करना शामिल है.

स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख भारतीय सैलानियों के लिए खास जगह रखता है.
इंडेक्स में आने वाले कुछ शहरों की तरक्की में टेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका है. कुल मिलाकर आठवें स्थान पर रहे सैन होजे में प्रति व्यक्ति GDP सबसे ज्यादा रही, क्योंकि अल्फाबेट (गूगल), एप्पल और एनवीडिया जैसी कंपनियां सिलिकॉन वैली में स्थित हैं. पास के ही सैन फ्रांसिस्को में, जहां मेटा, उबर और सेल्सफोर्स जैसी कंपनियां हैं, बिना ड्राइवर वाली कारें अब रोजमर्रा के ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बन चुकी हैं. ये यात्रियों को भविष्य में अर्बन मोबिलिटी के स्वरूप की एक झलक दिखाती हैं.यहां आकर आपको लगता है कि आप एक अलग दुनिया में हैं.
एस्टोनिया की राजधानी टैलिन भी इस इंडेक्स की ध्यान देने लायक शहर की लिस्ट में शामिल हुई है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां टेक इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और दूसरी यूरोपीय राजधानियों के मुकाबले यहां AI का इस्तेमाल बहुत ज्यादा हो रहा है. 'रेल बाल्टिका' जैसे हाई-टेक प्रोजेक्ट्स—जो 2030 तक बाल्टिक देशों को रेल से जोड़ने वाले हैं—पूरी तरह से "डिजिटल नेटिव" रेलवे के तौर पर बनाए जा रहे हैं. इसका मतलब है कि ये 100% रिन्यूएबल एनर्जी से चलेंगे और इनमें फिजिकल सिग्नल लाइट की जगह 5G कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल होगा.
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