- सऊदी अरब के निमंत्रण पर शहबाज शरीफ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए एक दिवसीय यात्रा पर गए हैं
- पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल सितंबर में पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था
- पाकिस्तान ने ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच सऊदी अरब पर हो रहे हमलों पर शांति प्रयासों को प्राथमिकता दी है
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बृहस्पतिवार को सऊदी अरब के संक्षिप्त आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं. सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते के चलते पाकिस्तान की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है. दोनों देशों ने पिछले साल सितंबर में एक पारस्परिक रक्षा समझौता किया था, जिसमें तीसरे देश द्वारा हमले की स्थिति में एक-दूसरे की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी. यह समझौता तब हुआ था, जब इजरायल ने कतर में हमास के नेताओं पर हमला किया था. अब ईरान-इजरायल जंग के बीच सऊदी अरब पर हो रहे हमलों के बीच पाकिस्तान की चुप्पी ने दोनों देशों के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सिर्फ दिलासे दे रहा पाकिस्तान
ईरान के साथ अपने अच्छे संबंधों और भौगोलिक निकटता को देखते हुए, इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब से हुए समझौते के तहत इस युद्ध में कूदेगा. एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा था कि पाकिस्तान सऊदी अरब के लिए "जरूरत पड़ने से पहले ही" मौजूद रहेगा. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर यह यात्रा कर रहे हैं.
बयान में आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात करेंगे, जिसमें वे "क्षेत्र में जारी तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श करेंगे. यह यात्रा कूटनीतिक क्षेत्र में पाकिस्तान की सकारात्मक भूमिका को उजागर करती है, और पाकिस्तान इस भूमिका को निभाता रहेगा."
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री एक दिवसीय सऊदी अरब यात्रा पर रवाना हो गए हैं. उन्होंने कहा कि उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी प्रधानमंत्री के साथ इस यात्रा पर जा रहे हैं. यह यात्रा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से संबंधित मामलों पर पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच चल रहे समन्वय का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस यात्रा को क्षेत्र में संवाद और कूटनीति का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे व्यापक राजनयिक प्रयासों के हिस्से के रूप में भी देखा जाना चाहिए. रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएफ) और सेना प्रमुख (सीओएएस) फील्ड मार्शल असीम मुनीर की 7 मार्च को सऊदी अरब यात्रा और रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान अल सऊद से मुलाकात के बाद यह सऊदी अरब की दूसरी उच्च स्तरीय यात्रा है.
पाकिस्तान युद्ध रुकवाने में जुटा
तब सेना के मीडिया मामलों के विभाग ने बताया था कि दोनों ने "ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के परिणामस्वरूप उत्पन्न सुरक्षा स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की." उन्होंने पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए "रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते" के ढांचे के भीतर ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक संयुक्त उपायों पर भी चर्चा की. इस यात्रा के अलावा, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने सऊदी समकक्ष से कई बार बातचीत की.
राजनयिक सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास कर रहा है और प्रधानमंत्री शहबाज और उप प्रधानमंत्री डार ने खाड़ी देशों और अन्य मुस्लिम देशों के कई नेताओं से बात की है. प्रधानमंत्री ने बुधवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बात की. इससे पहले, डार ने पिछले सप्ताह मीडिया को बताया था कि उन्होंने टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान अपने ईरानी समकक्ष से सऊदी अरब पर हमला न करने का आग्रह किया था. हालांकि, पाकिस्तान के इन प्रयासों का कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं. इससे ये भी साबित हो गया है कि सऊदी से समझौते के बावजूद पाकिस्तान इस य़ुद्ध में उसका सैन्य स्तर पर साथ नहीं देने जा रहा है.
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