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अमेरिका का EA-37B विमान आखिर क्यों है इतना खास, जो दुश्मन की देखने-सुनने की ताकत छीन लेता है

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक इस विमान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में लगाया गया है. यह विमान आमतौर पर सीक्रेट मिशनों में ही इस्तेमाल होता है. इसकी तैनाती की जानकारी बहुत सीमित लोगों को ही होती है.

अमेरिका का EA-37B विमान आखिर क्यों है इतना खास, जो दुश्मन की देखने-सुनने की ताकत छीन लेता है
ईरान की परेशानी बढ़ाएगा अमेरिका का ये विमान
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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए एक खास तरह का विमान तैनात किया है. यह विमान पारंपरिक हथियारों से अलग है. यह न तो बम गिराता है और न ही मिसाइल दागता है.यह दुश्मन के कम्युनिकेशन और रडार सिस्टम पर अदृश्य हमला करता है. इसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट कहा जाता है. अमेरिका ने EA-37B “कंपास कॉल” विमान को मिशन में उतारा है. इसे “फ्लाइंग हैकर” भी कहा जाता है. क्योंकि यह हवा में ही दुश्मन के सिस्टम को हैक या जाम कर सकता है.यह विमान दुश्मन के रडार, रेडियो और GPS सिस्टम को ठप कर देता है. इससे दुश्मन की सेना आपस में संपर्क नहीं कर पाती. उनकी मिसाइलें और फाइटर जेट्स भी भ्रमित हो जाते हैं. इससे अमेरिकी सेना को हमला करने में बड़ी बढ़त मिलती है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक इस विमान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में लगाया गया है. यह विमान आमतौर पर सीक्रेट मिशनों में ही इस्तेमाल होता है. इसकी तैनाती की जानकारी बहुत सीमित लोगों को ही होती है.EA-37B विमान गल्फस्ट्रीम G550 प्लेटफॉर्म पर बना है.पायलट और को-पायलट के अलावा इसमें कुल 9 लोगों की टीम होती है.बाकी सदस्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ऑपरेट करते हैं.इसमें SWORD-A नाम का आधुनिक सिस्टम लगा है.यह सिस्टम जरूरत पड़ने पर खुद को अपडेट कर लेता है.अगर कोई नया दुश्मन सिग्नल सामने आए, तो यह तुरंत प्रतिक्रिया देता है. इससे विमान हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक खतरे से निपट सकता है .

जानकारी के मुताबिक  ऐसे दो विमान अमेरिका से मिडिल ईस्ट भेजे गए हैं.ये 30 मार्च को एरिजोना से उड़ान भरकर पहले ब्रिटेन पहुंचे.इसके बाद इन्हें आगे तैनात किया गया. इससे यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा रहा है.इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर आज के युद्ध का अहम हिस्सा बन चुका है.इसमें तीन मुख्य काम होते हैं. पहला दुश्मन के सिस्टम को जाम करना होता है तो दूसरा अपने सिस्टम को सुरक्षित रखना है वही तीसरा काम है. दुश्मन की जानकारी जुटाना.विशेषज्ञों के अनुसार अब युद्ध सिर्फ बम और मिसाइल से नहीं जीते जाते. अगर दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन को “अंधा” कर दिया जाए, तो जीत आसान हो जाती है. इसी रणनीति को “इलेक्ट्रॉनिक कोहरा” कहा जाता है. दुनिया के कई देश इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं. सीधे अर्थों में कहे तो इसका काम बिना गोली चलाये दुश्मन की युद्ध क्षमता को कमजोर करना है.

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