- ईरान जंग लड़ते-लड़ते डोनाल्ड ट्रंप ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें से भिड़ गए हैं
- पूरे विवाद से ट्रंप अपने धार्मिक समर्थकों को नाराज कर सकते हैं, खासकर नवंबर के अहम मिडटर्म चुनाव में
- तीन बार शादी कर चुके अरबपति ट्रंप लंबे समय से चुनावों में अमेरिका के ईसाई लोगों का समर्थन लेते रहे हैं
President Donald Trump vs Pope Leo XIV: ईरान के साथ जंग लड़ते-लड़ते अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें से भिड़ गए हैं. कभी ट्रंप खुले आम पोप की आलोचना कर रहे हैं तो कभी AI फोटो डालकर खुद को ईसा मसीह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ट्रंप अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं, अपने कट्टर वोट बैंक से दुश्मनी मोल ले रहे हैं. चलिए पूरे विवाद को समझते हैं और यह भी जानते हैं कि यह ट्रंप के लिए कैसे बैकफायर कर सकता है.
चरम पर है विवाद
पोप लियो ने ट्रंप सरकार की कई नीतियों की आलोचना की है. शुरुआत प्रवासियों पर सख्ती, वेनेजुएला में दखल से की और अब ईरान जंग के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है. ट्रंप ने खुलकर उनकी आलोचना की. रविवार को ट्रंप ने कहा कि पोप क्राइम के मोर्चे पर कमजोर रुख रखते हैं और वे विदेश नीति में खराब कहा. उन्होंने यह भी कहा कि पोप लियो को मई 2025 में मेरी वजह से ही पोप के पद पर चुना गया. इसके बाद ट्रंप ने अपनी AI से बनी एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह यीशु जैसे दिख रहे थे. खूब बवाल मचा तो बाद में उन्होंने यह तस्वीर हटा दी. सोमवार को उन्होंने कहा कि उन्हें लगा यह तस्वीर उन्हें एक डॉक्टर के रूप में दिखा रही है.
अमेरिका की राजनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस पूरे विवाद से ट्रंप अपने धार्मिक समर्थकों को नाराज कर सकते हैं, खासकर नवंबर के अहम मिडटर्म चुनाव में.

ट्रंप ने AI फोटो डाली थी जिसमें वो खुद ईसा मसीह जैसे दिख रहे थे, विवाद के बाद फोटो डिलीट की
ट्रंप को क्यों नुकसान पहुंचा सकता है विवाद?
तीन बार शादी कर चुके अरबपति ट्रंप लंबे समय से चुनावों में अमेरिका के ईसाई लोगों का समर्थन लेते रहे हैं. उन्होंने अपने विचारों से उन्हें अपनी तरफ किया है. इन लोगों ने 2016 और 2024 के चुनाव में ट्रंप का समर्थन किया. लेकिन अब इन्हीं लोगों के नाराज होने का डर है. अमेरिका के कैथोलिक बिशप्स के प्रमुख आर्चबिशप पॉल कोकले ने कहा, “मुझे दुख है कि राष्ट्रपति ने पोप के बारे में ऐसे बुरे शब्द लिखे.”
व्हाइट हाउस के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि धार्मिक समर्थक भी नाराज हो रहे हैं, खासकर जो पहले ट्रंप के साथ थे. अगर ट्रंप समर्थन कम हुआ, तो रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि वे नवंबर के चुनाव में संसद (कांग्रेस) का नियंत्रण खो सकते हैं. ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था भी चिंता का कारण है.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी इतिहास में, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के विभिन्न पोपों के साथ नीतिगत मतभेद रहे हैं. लेकिन वेटिकन और धार्मिक इतिहास के एक्सपर्ट मानते हैं कि जिस तरह ईरान युद्ध में अमेरिका की भूमिका की पोप की निंदा पर ट्रंप और लियो के बीच वार-पलटवार हुआ है, वैसा कभी नहीं दिखा है. नोट्रे डेम यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डेविड कैंपबेल ने कहा है, "यह एक अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पोप की अभूतपूर्व आलोचना है."
कंजरवेटिव टिप्पणीकार राइली गेंस ने भी AI तस्वीर की आलोचना की है. उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने यह क्यों पोस्ट किया.” उन्होंने ट्रंप से विनम्र रहने को कहा. साथ ही कहा कि भगवान का मजाक नहीं उड़ाया जा सकता.
ट्रंप का लॉयल वोट बैंक
एपी की रिपोर्ट के अनुसार 2024 चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को जीत दिलाने में सफेद ईवेंजेलिकल (जन्म से दोबारा धर्म अपनाने वाले) ईसाइयों का बड़ा योगदान था. ट्रंप के कुल वोटरों में से 34% ऐसे ईसाई थे, जबकि हैरिस के वोटरों में सिर्फ 8% ही ऐसे थे. कुल वोटरों में ये लोग लगभग 20% (हर 10 में 2) थे, और इनमें से 79% ने ट्रंप को वोट दिया. एक सर्वे (फरवरी) में पाया गया कि ऐसे ईसाइयों में से लगभग दो-तिहाई लोग ट्रम्प के काम से खुश हैं, जबकि एक-तिहाई नाखुश हैं. लेकिन कैथोलिक ईसाई ट्रंप से ज्यादा खुश नहीं हैं. उनमें से सिर्फ 40% (10 में 4) लोग उनके काम को सही मानते हैं, जो लगभग पूरे अमेरिका के औसत जैसा ही है.
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