- पोप लियो XIV ने ट्रंप प्रशासन से डरने से इंकार करते हुए शांति के संदेश को जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया
- पोप लियो ने स्पष्ट किया कि उनकी बातें किसी पर हमला नहीं बल्कि शांति और सुलह के लिए आमंत्रण हैं
- इटली के राजनीतिक दलों ने पोप लियो के शांति मिशन का समर्थन किया और ट्रंप की आलोचनाओं को गंभीर माना
अमेरिका में जन्मे पोप लियो XIV ने सोमवार को कहा कि उन्हें ट्रंप प्रशासन से डर नहीं लगता. लियो ने एसोसिएटेड प्रेस से अल्जीरिया जा रहे पोप के विमान में कहा, "मेरे संदेश को राष्ट्रपति के संदेश के समान मानना, मेरे विचार से अच्छी बात के संदेश को न समझना है. मुझे यह सुनकर दुख हुआ, लेकिन मैं उस मिशन को जारी रखूंगा. जिसे मैं आज दुनिया में चर्च का मिशन मानता हूं."
पोप लियो ने खींच दी सीमा
इतिहास के पहले अमेरिकी मूल के पोप ने इस बात पर जोर दिया कि शांति के लिए उनकी सामान्य अपील और "सर्वशक्तिमान होने के भ्रम" वाली बात कहकर वह ट्रंप या किसी और पर सीधा हमला नहीं कर रहे थे. पोप लियो ने कहा “मैं किसी बहस में नहीं पड़ूंगा. मेरी कही बातें किसी पर हमला करने के इरादे से नहीं कही गई हैं. मेरी बात का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है: ‘धन्य हैं शांति स्थापित करने वाले'. मैं सभी लोगों को शांति और सुलह के पुल बनाने के तरीके खोजने और जब भी संभव हो युद्ध से बचने के उपाय तलाशने के लिए आमंत्रित करने से पीछे नहीं हटूंगा.” अन्य पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे ट्रंप प्रशासन से कोई डर नहीं है.”

ट्रंप ने ऐसा क्या कहा था
- रविवार रात को ट्रंप ने लियो के खिलाफ एक असाधारण हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका में जन्मे पोप अच्छा काम कर रहे हैं और वे एक बहुत उदारवादी व्यक्ति हैं. साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पोप को कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद कर देना चाहिए. फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर लियो की कड़ी आलोचना की और विमान से उतरने के बाद भी हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में अपनी आलोचना जारी रखी.
- ट्रंप ने साफ कहा, “मैं पोप लियो का फैन नहीं हूं” ट्रंप की ये टिप्पणी तब आईं जब लियो ने सप्ताहांत में सुझाव दिया कि “सर्वशक्तिमान होने का भ्रम” ईरान में अमेरिका-इजरायल युद्ध को हवा दे रहा है. हालांकि पोप और राष्ट्रपतियों के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन पोप की तरफ से किसी अमेरिकी नेता की सीधे तौर पर आलोचना करना बेहद दुर्लभ है — और ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया भी उतनी ही असामान्य है, बल्कि उससे भी अधिक.
- राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, “पोप लियो अपराध के मामलों में नरम हैं और विदेश नीति के लिए बेहद खराब हैं. मैं ऐसा पोप नहीं चाहता जो यह मानता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना जायज है.”
इटली के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने लियो के प्रति एकजुटता दिखाई. प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने उनके शांति मिशन के लिए समर्थन का संदेश भेजा, जबकि मुख्य विपक्षी दल की नेता एली श्लाइन ने सीधे तौर पर ट्रंप के हमलों को "बेहद गंभीर" बताया.
खुद को यीशु मसीह जैसा शक्तिशाली दिखाया
बाद में, ट्रंप ने एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने यीशु मसीह जैसी संत-समान शक्तियों का संकेत दिया. बाइबिल शैली का चोला पहने ट्रंप एक बिस्तर पर पड़े व्यक्ति पर हाथ रखे हुए दिखाई दे रहे हैं, उनकी उंगलियों से प्रकाश निकल रहा है, जबकि एक सैनिक, एक नर्स, एक प्रार्थना करती महिला और बेसबॉल टोपी पहने एक दाढ़ी वाला व्यक्ति सभी उन्हें प्रशंसा भरी निगाहों से देख रहे हैं. ऊपर आकाश में चीलें, एक अमेरिकी झंडा और धुंधली छवियां दिखाई दे रही हैं.

कब से शुरू हुआ ये सब और क्या क्या बोला
यह सब शनिवार को सेंट पीटर बेसिलिका में लियो द्वारा आयोजित शाम की प्रार्थना सभा के बाद हुआ, उसी दिन अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान में नाजुक युद्धविराम के दौरान आमने-सामने की बातचीत शुरू की. पोप ने अमेरिका या ट्रंप का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका लहजा और संदेश ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों की ओर प्रतीत हुआ, जिन्होंने अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता का दावा किया है और युद्ध को धार्मिक आधार पर उचित ठहराया है.
लियो सोमवार से शुरू होने वाली 11 दिवसीय अफ्रीका यात्रा पर हैं. वो पहले कह चुके हैं कि ईश्वर "युद्ध करने वालों की प्रार्थना नहीं सुनता, बल्कि उन्हें अस्वीकार कर देता है." उन्होंने यशायाह की पुस्तक के पुराने नियम के एक अंश का भी हवाला देते हुए कहा है कि "चाहे तुम कितनी भी प्रार्थना करो, मैं नहीं सुनूंगा - तुम्हारे हाथ खून से सने हैं."
युद्धविराम से पहले, जब ट्रंप ने ईरानी बिजली संयंत्रों और अन्य अवसंरचनाओं पर बड़े पैमाने पर हमले की चेतावनी दी थी और कहा था कि "आज रात एक पूरी सभ्यता नष्ट हो जाएगी", तब लियो ने ऐसी भावनाओं को "बिल्कुल अस्वीकार्य" बताया था. हालांकि, रविवार रात को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में, ट्रंप ने लियो की आलोचना करते हुए ईरान युद्ध से कहीं आगे बढ़कर बात की.
राष्ट्रपति ने लिखा, “मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला करना भयानक था, एक ऐसा देश जो अमेरिका को भारी मात्रा में ड्रग्स भेज रहा था. मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे क्योंकि मैं वही कर रहा हूं जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था. अगर मैं व्हाइट हाउस में नहीं होता, तो लियो वेटिकन में नहीं होते. लियो को पोप के रूप में अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, सामान्य ज्ञान का इस्तेमाल करना चाहिए, कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद करना चाहिए और एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए, न कि एक राजनेता बनने पर. इससे उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे कैथोलिक चर्च को नुकसान हो रहा है!”
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