- अमेरिका में पहली बार किसी दोषी को सेना गोली मारकर मौत की सजा देगी, इसका लाइव प्रसारित किया जाएगा
- मेजर निदाल मलिक हसन को 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड बेस पर 13 लोगों की हत्या का दोषी पाया गया है
- निदाल मलिक हसन अमेरिकी सेना के मेडिकल विभाग में अधिकारी था
अमेरिका के इतिहास में पहली बार किसी दोषी को गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी, खास बात यह है कि इस सजा को पूरा अमेरिका टीवी पर लाइव देखेगा. जिस शख्स को ये सजा दी जानी है वह 13 लोगों की हत्या का दोषी है. साल 2009 में टेक्सास में हुई गोलीबारी के मामले में वह दोषी करार दिया गया है. उसे 3 दिसंबर 2026 को गोली मारी जाएगी, इस सजा का लाइल टेलीकास्ट किया जाएगा. 13 लोगों के हत्यारे का नाम है मेजर निदाल मलिक हसन.
कौन है निदाल मलिक हसन?
यह शख्स अमेरिकी सेना में मेजर रह चुका है. निदाल का जन्म 8 सितंबर, 1970 को वर्जीनिया में हुआ था. उनके माता-पिता फिलिस्तीनी मूल के अमेरिकी नागरिक थे. पहले वे यरूशलेम के पास वेस्ट बैंक के अल-बिरेह शहर में रहा करते थे. बाद में वे अमेरिका में आकर बस गए थे. निदाल हसन के पिता का 1998 में 51 साल की उम्र में निधन हो गया था. उसकी मां भी तीन साल बाद 49 साल की उम्र में चल बसीं. उसका एक भाई वर्जीनिया में और दूसरा भाई यरूशलेम में रहता था.
अमेरिकी सेना के मेडिकल डिपार्टमेंट में बना अधिकारी
निदाल हसन ग्रेजुएशन के बाद 1988 में अमेरिकी सेना में भर्ती हुआ था. इस दौरान उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई जारी रखी और 1992 में वर्जीनिया वेस्टर्न कम्युनिटी कॉलेज से विज्ञान में एसोसिएट डिग्री ली. उसे 1997 में सेना के मेडिकल डिपार्टमेंट में एक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था.
निदाल मलिक ने कैसे ली 13 लोगों की जान?
5 नवंबर 2009 को आर्मी में मेजर के पद पर तैनात निदाल फोर्ट हूड में बने एक आर्मी बेस की बिल्डिंग में लेजर पिस्टल के साथ घुसा और वहां अंधाधुंध फायरिंग की. इस हमले में एक प्रेग्नेंट सैनिक समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई. वहीं 32 लोग घायल भी हुए थे. इस हमले में निदाल को भी गोलियां मारी गईं. जिसके बाद उनके कमर के नीचे के हिस्से में लकबा मार गया था. कोर्ट मार्शल कर उसे सेना से बाहर निकाल दिया गया था.
सेना ने की थी मौत की सजा की मांग?
सेना ने उसे मौत की सजा देने की मांग की थी. उसने खुद भी हमले की बात स्वीकार कर ली थी. उसे फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर फायरिंग स्क्वाड की सजा यानी कि गोली मारी जाएगी. 1961 के बाद ये पहली बार होगा जब अमेरिका में किसी को मौत की सजा दी जाएगी. तब से अब तक किसी भी दोषी को अमेरिकी सेना ने मौत की सजा नहीं दी है. पेटागन के मुताबिक, मौत की इस सजा का लाइव प्रसारण किया जाएगा.
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