- ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान इरफान सोल्तानी को ‘खुदा के खिलाफ युद्ध’ के आरोप में फांसी दी जा सकती है
- इरफान सोल्तानी को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उनकी फांसी की तारीख 14 जनवरी बताई जा रही है
- मानवाधिकार समूहों का दावा है कि सोल्तानी को कानूनी सहायता नहीं मिली, परिवार को केस फाइल तक पहुंचने से रोका गया
ईरान में हिंसक प्रदर्शन के बीच भारी तनाव का माहौल है. एक तरफ देश की आम जनता खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है. दूसरी ओर, तेहरान में सरकार के समर्थन में रैली निकाली जा रही है. इस बीच सरकार प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए हर वो पैंतरा आजमा रही है, जिससे स्थिति को काबू किया जा सकें. ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार पहली बार किसी प्रदर्शनकारी को फांसी देने की तैयारी कर रही है. 26 वर्षीय इरफान सोल्तानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
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कौन है इरफान सोल्तानी
इरफान सोल्तानी ईरान के करज शहर के पास फर्दिस इलाके से ताल्लुक रखते हैं. उन्हें 8 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जब वे देशभर में चल रहे प्रदर्शनों में शामिल थे. ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए थे और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ सबसे बड़े आंदोलनों में से एक बन गए. दुनियाभर के मीडिया आउटलेट्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सोल्तानी को करज शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था. उन्हें ईरानी कानून के तहत ‘खुदा के खिलाफ युद्ध' (waging war against God) का दोषी ठहराया गया है, जो मौत की सजा योग्य अपराध माना जाता है.
कब हो सकती है फांसी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, फांसी 14 जनवरी के दिन दी जा सकती है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोल्तानी का “एकमात्र अपराध आजादी की मांग करना” था. ईरान के लोकतंत्र समर्थक संगठन NUFD ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील की है. मानवाधिकार समूहों का दावा है कि सोल्तानी को कानूनी सहायता नहीं दी गई और उनकी बहन, जो पेशे से वकील हैं. फिर भी उसको केस फाइल तक पहुंचने से रोक दिया गया. परिवार को केवल एक बार मुलाकात की अनुमति दी गई, जब उन्हें बताया गया कि सजा अंतिम है.
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ईरान में क्या हो रहा है?
दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत से ही ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे. देश में बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और जरूरी सामानों की बढ़ती कीमतों से नाराज लोग सड़कों पर उतरे. यह आंदोलन अब राजनीतिक बदलाव और धार्मिक शासन समाप्त करने की मांग में बदल गया है. सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है.
स्थानीय मानवाधिकार समूहों के अनुसार, अब तक 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां और 500 से ज्यादा मौतें हुई हैं. ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” करार दिया है, जबकि मानवाधिकार संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि फांसी का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है. इस मामले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. कई मानवाधिकार संगठन और कार्यकर्ता ईरान से सोल्तानी की फांसी रोकने की अपील कर रहे हैं.
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यह मामला क्यों अहम है?
एक्सपर्ट का कहना है कि यह फांसी ईरान के दमनकारी रुख में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पहले प्रदर्शनकारियों को गोली मारने जैसी हिंसक कार्रवाई होती थी, लेकिन यह पहली बार है जब मौजूदा विरोध प्रदर्शनों से जुड़े किसी व्यक्ति को फांसी दी जा रही है. कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह कदम डर पैदा करने और आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए उठाया जा रहा है.
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