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ईरान की महिला फुटबॉलरों ने कर दी बगावत, अब जान पर आफत

US Iran War: अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. इसके दो दिन बाद ऑस्ट्रेलिया में ईरानी महिला टीम का मुकाबला साउथ कोरिया से हुआ. लेकिन इस मैच से पहले ईरानी खिलाड़ियों ने अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया.

ईरान की महिला फुटबॉलरों ने कर दी बगावत, अब जान पर आफत
ईरान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने मैच के पहले राष्ट्रगान गाने से इनकार किया था
  • ईरानी महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में एशिया कप मैच से पहले राष्ट्रगान गाने से इनकार किया था
  • इस कदम को ईरानी इस्लामी गणराज्य के खिलाफ अवज्ञा के रूप में व्यापक रूप से देखा गया है
  • रजा पहलवी और जे.के. रोलिंग सहित कई लोगों ने ऑस्ट्रेलिया से इन खिलाड़ियों को शरण (असाइलम) देने की मांग की है
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अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के बीच एक खबर ऑस्ट्रेलिया से आई है. ऑस्ट्रेलिया में खेलने पहुंची ईरान की महिला फुटबॉल टीम परेशानी में फंसती दिख रही है. अब उनकी रक्षा करने की दुहाई दी जा रही है. दरअसल ईरानी महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों ने पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया में एशियाई कप टूर्नामेंट मैच से पहले ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया. इस कदम को व्यापक रूप से इस्लामी गणतंत्र के खिलाफ अवज्ञा के रूप में देखा जाता है. अब ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी से लेकर हैरी पॉटर लिखने वाली राइटर जे.के. रोलिंग तक ने आग्रह किया है कि ऑस्ट्रेलिया को इस खिलाड़ियों की शरण (असाइलम) देनी चाहिए.

अमेरिका में रहने वाले रजा पहलवी ने राजनेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और जे.के. रोलिंग के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया में इन महिला खिलाड़ियों को शरण देने की मांग की है. ईरान के आखिरी शाह के बेटे पहलवी ने कहा, "ईरानी महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की प्लेयर्स इस्लामिक गणराज्य से काफी दबाव और लगातार खतरे में हैं."

उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "मैं ऑस्ट्रेलियाई सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सभी आवश्यक सहायता देने का आह्वान करता हूं."

आखिर ईरान की खिलाड़ियों ने क्या किया?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. इसके दो दिन बाद ऑस्ट्रेलिया में ईरानी महिला टीम का मुकाबला साउथ कोरिया से हुआ. लेकिन इस मैच से पहले ईरानी खिलाड़ियों ने अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया. जवाब में, ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक एंकर ने इस टीम को "युद्धकालीन गद्दार" तक करार दिया.

हालांकि ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर जमा भीड़ ने ढोल बजाए और "ईरान के लिए शासन परिवर्तन" के नारे लगाए. इसके बाद उन्होंने "हमारी लड़कियों को बचाओ" के नारे लगाते हुए ईरानी टीम की बस को घेर लिया. सोमवार को, एएफपी के एक पत्रकार ने ईरानी टीम के खिलाड़ियों को अपने होटल की बालकनी से फोन पर बात करते देखा था. यानी वे अभी भी ऑस्ट्रेलिया में ही हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रचारक (कैंपेनर) ज़की हैदरी ने कहा कि अगर उन्हें ईरान वापस भेज दिया गया तो उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा, या इससे भी बदतर. हैदरी ने एएफपी को बताया, "इनमें से कुछ टीम के सदस्यों के परिवारों को पहले ही धमकी मिल चुकी होगी... वे वापस जा रही हैं... कौन जानता है कि उन्हें किस तरह की सजा मिलेगी?"

राइटर जे.के. राउलिंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "प्लीज, इन युवा महिलाओं की रक्षा करें".

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