ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच पिछले 40 दिनों से चल रही जंग से मिडिल ईस्ट में तबाही का मंजर है. जान-माल का जमकर नुकसान हुआ. हर कोई यही सोच रहा है कि ट्रंप इसलिए रुकने को तैयार नहीं थे क्यों कि इससे अमेरिका तो जमकर फायदा हो रहा था. लेकिन ये बात गलत है. युद्ध में अमेरिका को भी आर्थित तौर पर खूब नुकसान उठाना पड़ा है.अब तक अमेरिका के 7.49 लाख करोड़ रुपये ($80.4 बिलियन) स्वाहा हो चुके हैं. इस बीच सवाल ये है कि अगर युद्ध से अमरिका को फायदा नहीं हुआ तो फिर किसे हुआ?
जंग से रूस-चीन ने कैसे कमाया फायदा?
इस सवाल का जवाब है जंग का सबसे बड़ा फायदा रूस और चीन को हुआ है. यह युद्ध रूस और चीन दोनों के लिए एक रणनीतिक फायदा साबित हुआ है. अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्रीय अस्थिरता में उलझे रहे, जबकि रूस-चीन को अपने वैश्विक हितों को आगे बढ़ाने का मौका मिल गया. दोनों ने ही सीधे तौर पर जंग के बीच में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस युद्ध का रणनीतिक तरीके से फायदा जरूर उठाया.
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आर्थिक लाभ: युद्ध की वजह से वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक आपूर्ति में आई रुकावट की वजह से रूस को 2026 बजट राजस्व में 45 अरब डॉलर से 151 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त इनकम हो सकती है.
रणनीतिक ध्यान भटकाना: इस जंग की वजह से अमेरिका, यूक्रेन से सैन्य संसाधन, खुफिया संसाधन और राजनीतिक पूंजी हटाकर मिडिल ईस्ट की ओर लगाने के लिए मजबूर हो गया.
तेल खरीद-बेच से फायदा: रूस ने तेल बेचकर फायदा कमाया तो चीन ने ईरान से तेल खरीदकर. ये दावा किया गया है निवेश बैंक जेफरिज की एक रिपोर्ट में. इस रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के बीच रूस और चीन सबसे बड़े आर्थिक लाभार्थी के रूप में उभरे हैं. निवेश बैंक जेफरिज की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि टेंशन बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछलीं, जिसकी वजह से रूस की एनर्जी इनकम में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई. उसने तेल बेचकर खूब पैसे कमाए. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में रूस की स्थिति और मजबूत हुई.

Photo Credit: (Photo: Unsplash)
रिपोर्ट में इस बात को भी उजागर किया गया है कि बदलते हालातों और बढ़ती कीमतों के बीच रूस की ऊर्जा आपूर्ति फिर से अहम बन गई. होर्मुज बंद होने की वजह से तेल के हजार वहीं फंसे थे. जिसकी वजह से रूस को अपना तेल बड़ी मात्रा में बेचने का सुनहरा मौका मिल गया. रूस तेल बेच कर पैसा कमा रहा था. उसने भारी छूट पर तेल और गैस बेचकर अपना रेवेन्यू बढ़ाया.
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जंग से चीन को कैसे हुआ फायदा?
चीन ने सस्ते दामों पर तेल और गैस खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया. वहीं रूसी बाजार में भी चीन का दबदबा कायम हो गया. संकट के बीच पश्चिमी कंपनियों के जाने की वजह से बाद रूसी बाजार में चीनी कारों, मोबाइल और अन्य उत्पादों की धाम जम गई. मतलब यह कि सैन्य हस्तक्षेप के बिना भी उसे कई फायदे हुए हैं.
रियायती ऊर्जा: चीन इस समय ईरानी तेल का अहम खरीदार बना हुआ है. उसने जंग के समय रणनीतिक साझेदारी बनाए रखकर, वैश्विक बाजार दर से काफी कम कीमतों पर ईरानी तेल-गैस की दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित कर ली है.
प्रशांत क्षेत्र में सक्रियता: अमेरिकी नौसेना और वायु सेना इज़राइल का साथ देने के लिए इस समय अपना ध्यान फारस की खाड़ी पर लगाए हुए है. इस वजह से बीजिंग को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में "राहत" मिली है. उसके ऊपर सैन्य दबाव कम है, जिस वजह से वह दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास ज्यादा एक्टिव है.
सीजफायर में चीन ने निभाई मीडिएटर की भूमिका!
सूत्रों के मुताबिक ईरान को युद्धविराम के लिए चीन ने मनाया. चीनी अधिकारियों ने सीधे बातचीत की. चीन ईरान का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर और ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है.जंग खत्म होना चीन के हित में है. स्टेट ऑफ हॉर्मुज़ को नॉर्मलाइज करना चीन के लिए जरूरी था, ताकि तेल आपूर्ति बाधित न हो. चीन की तेल पर आर्थिक निर्भरता है. ईरान के कच्चे तेल पर चीन को भारी डिस्काउंट मिलता रहा है. सप्लाई रुकने से चीन को नुकसान उठाना पड़ता. चीन ने मीडिएटर की भूमिका निभाई तो ट्रंप ने भी तारीफ की है.
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