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लाल सागर में गदर मचाने वाले हूती कौन हैं, सऊदी अरब से क्या है उनकी लड़ाई

यमन के एक बड़े इलाके पर कब्जा करने के बाद हूती संगठन एक बार फिर चर्चा में है. आइए जानते हैं कि कौन हैं ये हूती और सऊदी अरब के साथ क्या है उनकी लड़ाई.

लाल सागर में गदर मचाने वाले हूती कौन हैं, सऊदी अरब से क्या है उनकी लड़ाई
नई दिल्ली:

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही गुट ने दक्षिणी लाल सागर में रणनीतिक रूप से अहम कुछ और द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. इससे प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग अल-मंदेब स्ट्रेट पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है. अल-मंदेब स्ट्रेट को होर्मुज स्ट्रेट का वैकल्पिक समुद्री मार्ग माना जाता है. अल मंदेब स्ट्रेट स्वेज नहर के जरिए यूरोप और सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों को हिंद महासागर और पूरे एशिया से जोड़ता है. हूतियों ने कहा है कि इससे इंटरनेशनल शिपिंग के लिए कोई खतरा नहीं हैं. उनका कहना है कि वो सऊदी अरब के जहाजों पर अपना हमला जारी रखेंगे. हूतियों की इस बढ़त का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखा जा रहा है. कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं.  हूतियों की इस बढ़त के बाद वो एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. आइए हम जानते हैं कि हूती कौन हैं और वो सऊदी अरब से लड़ क्यों रहे हैं.  

कौन हैं यमन के हूती

हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया 'जैदी' समुदाय का एक हथियारबंद समूह है.इस समूह को ईरान का समर्थन हासिल है. इस गुट का यमन के घनी आबादी वाले उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े भाग पर नियंत्रण है. अक्टूबर 2023 में गाजा पर इजरायली हमले के बाद से इजरायल और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण हूतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि मिली.इस गुट ने 1990 के दशक में यमन के तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए इस समूह का गठन हुसैन अल हूती ने किया था. हुसैन अल हूती के नाम पर ही इसका नाम हूती पड़ा. हूती खुद को 'अंसार अल्लाह' यानी ईश्वर के साथी भी कहते हैं.

हूती आंदोलन 1990 के दशक में उभरा. साल 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक़ पर हुए हमले में हूती विद्रोहियों ने नारा दिया था, 'ईश्वर महान है. अमेरिका का खात्मा हो, इसराइल का खात्मा हो. यहूदियों का विनाश हो और इस्लाम की विजय हो.' हूती ने गाजा के हमास और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर इसराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान के नेतृत्व वाली 'प्रतिरोध की धुरी'(Axis of Resistance) का हिस्सा बताया था.

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Photo Credit: PTI

किससे प्रेरणा लेते हैं हूती

हूती को प्रेरणा लेबनान के सशस्त्र शिया समूह हिज्बुल्लाह से मिलती है. माना जाता है कि हिज्बुल्लाह ही हूतियों को 2014 से ट्रेनिंग दे रहा है. हूती खुद को ईरान का सहयोगी बताते हैं, क्योंकि उनका साझा दुश्मन सऊदी अरब है. माना जाता है कि हूती विद्रोहियों को हथियार ईरान से मिलता है. 

दरअसल यमन पिछले काफी समय से गृहयुद्ध का सामना कर रहा है. राजधानी सना समेत उसके कुछ हिस्सों पर हूतियों का नियंत्रण रहा है. हूतियों ने यमन की सरकार को 2014 में बेदखल कर दिया था. यह देखकर सऊदी अरब ने 2015 में यमन की सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया. उसने हूतियों के खिलाफ गठबंधन की सेना बनाई. उसे डर है कि उसकी दक्षिणी सीमा के पास यमन में हूती के मजबूत होने से उसका प्रभाव कम होगा. इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होगा.

हूती लड़ाके सऊदी अरब के शहरों और तेल-ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करते रहते हैं. हालिया हमला बीते गुरुवार को सऊदी अरब के महत्वपूर्ण पाइप लाइन पर किया गया. करीब 12 सौ किमी लंबी इस पाइपलाइन से प्रतिदिन करीब पांच मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है. यह पाइप लाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है. इससे सऊदी अरब को होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने की सुविधा मिलती है. यह स्ट्रेट फरवरी में ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद से काफी हद तक बंद है.इसके बाद सऊदी अरब ने यमन में 50 से अधिक हवाई हमले किए हैं. 

इस हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और बढ़ गया है. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं. जुलाई के बाद यह पहली बार है, जब तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई है. 

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