घर में किसी एक सदस्य को शराब की लत हो तो उसका असर अक्सर पूरे परिवार पर पड़ता है. रोज की बहस, बच्चों पर पड़ता असर और सेहत की चिंता के बीच घरवाले शराब छुड़ाने के हर संभव तरीके तलाशने लगते हैं. इसी दौरान उनकी नजर ऐसे विज्ञापनों पर भी पड़ती है जिनमें दावा किया जाता है कि खाने या चाय में चुपके से कुछ बूंदें मिला देने से शराब छूट जाएगी.
मुश्किल तब शुरू होती है जब परिवार इसे आसान और सुरक्षित उपाय मानकर आजमाने लगता है. मरीज की जानकारी के बिना कोई दवा देना जोखिम भरा हो सकता है.
बिना बताए शराब छुड़ाने वाली दवा देने से क्या होगा
बिना बताए शराब छुड़ाने वाली ज्यादातर दवाओं में 'डाईसल्फिरम' नाम का सॉल्ट होता है. Disulfiram एक दवा है, जिसे डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लिया जाना चाहिए.
- जब कोई आम इंसान दो पैग पीता है, तो उसका लिवर उस शराब को तोड़कर धीरे-धीरे शरीर से बाहर फेंक देता है.
- लेकिन जब ये दवा पेट में होती है, तो ये लिवर का काम बीच में ही रोक देती है.
- अब होता ये है कि जैसे ही बंदा शराब का एक घूंट भी गले से नीचे उतारेगा, Disulfiram लेने के बाद शराब पीने पर शरीर में acetaldehyde का स्तर बढ़ सकता है, जिससे गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है.
- चेहरा लाल हो सकता है. इसके अलावा दिल की धड़कने तेज, सांस फूलना और भयंकर उल्टियां हो सकती हैं.
- अगर बीपी अचानक गिर गया या दिल कमजोर हुआ, तो हार्ट फेल का खतरा हो सकता है.
शराब अंदर ही अंदर शरीर की क्या हालत करती है
लिवर की सेहत: लिवर फिल्टर की तरह काम करता है. और सबसे चौंकाने वाली बात ये कि जब तक लिवर 70-80 परसेंट तक खराब नहीं हो जाता, तब तक दर्द का अहसास भी नहीं होता. पहले फैटी लिवर बनता है, फिर लिवर पर सूजन आती है और आखिर में लिवर सिरोसिस की स्थिति आ जाती है.
पेट की सेहत पर असर : रोज-रोज शराब अंदर जाने से आंतों की अंदरूनी मुलायम झिल्ली जलने लगती है. हर वक्त खट्टी डकारें, जी मिचलाना और पेट में जलन रहने लगती है.
पैंक्रियाज के लिए: शराब हमारे पैंक्रियाज को अंदर तक खराब कर सकती है. जब इसमें सूजन (पैंक्रियाटाइटिस) आती है, तो पेट के ऊपरी हिस्से में ऐसा भयानक दर्द उठता है जो सीधे पीठ में जाकर लगता है. मरीज को तेज दर्द होता है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस पूरे मामले पर हमने बात की इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रो साइंसेज, शारदाकेयर - हेल्थसिटी (ShardaCare - Healthcity) के डायरेक्टर (हेपेटोलॉजिस्ट एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट) डॉ. अभिषेक दीपक (Dr Abhishek Deepak) से. डॉ. दीपक को पेट और लिवर की बीमारियों के इलाज का 17 साल से ज्यादा का लंबा तजुर्बा है और उन्होंने देश के सबसे नामी संस्थानों में से एक, एसजीपीजीआई (SGPGIMS) लखनऊ से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में अपनी डीएम की पढ़ाई पूरी करी है.
डॉ. अभिषेक दीपक दो कहते हैं कि शराब पीने वाले को बिना बताए कोई भी दवा देना खुदकुशी कराने जैसा है. शराब की लत कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे सिर्फ डांट-डपट या चोरी-छिपे दवा देकर रातों-रात छुड़ा दिया जाए. सालों-साल पीने के बाद इंसान का दिमाग और नसें शराब की आदी हो चुकी होती हैं.
डॉ. दीपक बताते हैं कि अगर किसी एल्कोहोल एडिक्ट की बोतल अचानक जबरदस्ती बंद करा दी जाए, तो उसका शरीर झटके खाने लगता है जिसे मेडिकल में 'विड्रॉल' कहते हैं. हाथ-पांव कांपने लगते हैं, माथे से ठंडा पसीना बहने लग सकता है, दिल की धड़कन 140 पार हो सकती है. इसके अलावा मरीज को मिर्गी जैसे दौरे पड़ सकते हैं.
अगर इस हालत में मरीज को जल्दी अस्पताल में भर्ती न कराया जाए, तो दिमाग की नस फट सकती है. इसलिए शराब छुड़ाने का काम हमेशा डॉक्टर की निगरानी में, धीरे-धीरे और लिवर की जांच कराके ही किया जाना चाहिए.

तो फिर शराब छुड़ाने का सही और सुरक्षित रास्ता क्या है
अगर आप सचमुच अपने घर के इंसान को जिंदा और सही-सलामत देखना चाहते हैं, तो इन चार बातों पर अमल करिए.
ताने मारना और लड़ना बंद करिए: जब वो नशे में हो तब बहस करने का कोई फायदा नहीं होता. जब सुबह उसका नशा उतरे और दिमाग शांत हो, तब प्यार से बात करिए. उसे कोसने के बजाय ये दिखाइए कि उसकी इस आदत से उसके बच्चे और घरवाले कितनी तकलीफ में हैं.
किसी अच्छे गैस्ट्रो या मनोरोग डॉक्टर को दिखाइए: शराब की लत छुड़ाने की ऐसी दवाएं भी आती हैं जो दिमाग में शराब की तलब (क्रेविंग) को कम करती हैं और इंसान को बीमार भी नहीं करतीं. लेकिन ये दवाएं डॉक्टर मरीज का लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड देखकर लिखते हैं.
खाने में पौष्टिक चीजें बढ़ाइए: जो लोग खूब दारू पीते हैं, वो खाना-पीना लगभग छोड़ देते हैं. इससे उनके शरीर में विटामिन बी1 और खून की भारी कमी हो जाती है. उन्हें दूध, दलिया, हरी सब्जियां, फल और खूब सारा पानी दीजिए ताकि अंदरूनी कमजोरी दूर हो.
शाम का वक्त : जिस समय व्यक्ति को आमतौर पर शराब पीने की तलब होती है, उस दौरान उसके triggers को पहचानना और ध्यान दूसरी गतिविधियों में लगाना मददगार हो सकता है.
इन लक्षणों को हल्के में मत लीजिए
अगर आपके घर में कोई लंबे समय से शराब पी रहा है और उसके बदन में ये चीजें दिखने लगें, तो समझ लीजिए कि समस्या बड़ी हो चुकी है.
- आंखों का सफेद हिस्सा या पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाना.
- पेट अचानक बाहर निकल आना और उसमें पानी भर जाना.
- पैरों के टखनों पर सूजन आ जाना, जहां उंगली दबाने पर गड्ढा बन जाए.
- मुंह से अचानक खून की उल्टी हो जाना या फिर लैट्रिन का रंग काला आना.
- मरीज का अजीब हरकतें करना, अपने ही घर के लोगों को न पहचानना या बात करते-करते सो जाना.
चोरी-छिपे दवा देकर किसी की जान के साथ जुआ मत खेलिए. शराब एक जिद्दी बीमारी है, और बीमारी का इलाज हकीमों के नुस्खों या दीवार के इश्तिहारों से नहीं, बल्कि अस्पताल में डॉक्टर की टेबल पर बैठकर ही होता है.
एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. अभिषेक दीपक अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और एंडोस्कोपिस्ट हैं. उन्हें इस क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का क्लिनिकल अनुभव है. उन्होंने लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में DM की पढ़ाई पूरी की है.
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