मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा. ईरान से जुड़े युद्ध ने एशिया की खाद्य सुरक्षा पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और वैश्विक संस्थाओं के डेटा बताते हैं कि यह संकट आने वाले महीनों में और गहरा सकता है.
होर्मुज पर असर: खाद सप्लाई पर सीधा झटका
Reuters और Bloomberg की रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के चलते उर्वरक (फर्टिलाइजर) और उससे जुड़े कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतों में 30-40% तक उछाल दर्ज किया गया है.
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चीन का एक्सपोर्ट कंट्रोल: संकट और गहरा
World Trade Organization और International Fertilizer Association के डेटा के अनुसार, चीन ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट पर नियंत्रण कड़ा किया है. इसका सीधा असर आयात पर निर्भर देशों जैसे वियतनाम और फिलीपींस पर पड़ा है, जहां खाद की उपलब्धता तेजी से घट रही है.

खेती पर असर: उत्पादन घटने का खतरा
Food and Agriculture Organization के आकलन के मुताबिक, महंगे और सीमित फर्टिलाइजर के कारण किसान कम उपयोग कर रहे हैं, जिससे फसल उत्पादन घटने का जोखिम बढ़ गया है. FAO का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले फसल चक्रों में चावल, गेहूं और दालों की पैदावार पर असर दिख सकता है.
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करोड़ों लोगों पर असर संभव
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम और वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी है कि खाद संकट और बढ़ती कीमतें मिलकर खाद्य असुरक्षा (food insecurity) को तेज कर सकती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरे तो 2026 के अंत तक करोड़ों लोग भूख के जोखिम में आ सकते हैं.
एजेंसी रिपोर्ट्स और वैश्विक संस्थाओं (FAO, WFP, World Bank, WTO, IFA) के डेटा साफ संकेत देते हैं कि यह सिर्फ तेल की जंग नहीं रही. ईरान से शुरू हुआ संकट अब सीधे एशिया की थाली तक पहुंच चुका है, जहां आने वाले समय में सबसे बड़ा असर खाने पर दिख सकता है.
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