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‘भारत को देखो, उनके पास भंडार…’ होर्मुज संकट में बेबस पाकिस्तान, PAK के पेट्रोलियम मंत्री ने माना भारत का लोहा

होर्मुज संकट और ईरान युद्ध के बीच बढ़े तेल संकट पर पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने माना कि भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल और विदेशी मुद्रा भंडार हैं, जबकि पाकिस्तान सिर्फ कुछ दिनों के कमर्शियल रिज़र्व पर निर्भर है, जिससे वह ज्यादा प्रभावित हुआ.

‘भारत को देखो, उनके पास भंडार…’ होर्मुज संकट में बेबस पाकिस्तान, PAK के पेट्रोलियम मंत्री ने माना भारत का लोहा
नई दिल्ली:

ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए वैश्विक तेल संकट ने पाकिस्तान की कमजोर तैयारियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है. पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत जैसे मजबूत रणनीतिक भंडार और विदेशी मुद्रा रिजर्व की तुलना में पाकिस्तान इस झटके को सह नहीं पा रहा, जबकि भारत पर इसका असर बेहद सीमित रहा है.

पाक के ही मंत्री ने खोली पाक की पोल

एक टीवी टॉक शो में बोलते हुए अली परवेज मलिक ने भारत और पाकिस्तान की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है. देश केवल कमर्शियल रिजर्व पर निर्भर है, जो बेहद कम समय के लिए पर्याप्त है. मंत्री के मुताबिक पाकिस्तान के पास सिर्फ 5 से 7 दिन का कच्चा तेल मौजूद है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास रिफाइंड उत्पाद महज 20-21 दिन तक चल सकते हैं.

भारत की रणनीति की हुई तारीफ

उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'हम भारत जैसे नहीं हैं, जिसके पास 60 से 70 दिन का तेल भंडार है और जिसे एक पेन की सिग्नेचर से रिलीज किया जा सकता है.' मलिक ने माना कि भारत न केवल रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व के कारण बल्कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार की वजह से भी इस संकट को आसानी से झेल पाया.

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पाक मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है, जिससे उसे ईंधन कीमतों पर टैक्स घटाने और आम लोगों को राहत देने की वित्तीय गुंजाइश मिली. इसके उलट पाकिस्तान IMF की सख्त शर्तों में बंधा हुआ है, जिसके कारण सरकार को पेट्रोल और डीजल पर लेवी लगानी पड़ी.

IMF के आगे गिड़गिड़ाया पाकिस्तान

मलिक के अनुसार, बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों के चलते पाकिस्तान सरकार को IMF से बातचीत करनी पड़ी. हालांकि बाद में डीजल पर लेवी शून्य कर दी गई और पेट्रोल पर बोझ बढ़ाया गया, लेकिन इसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी. पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत घटाकर 378 रुपये प्रति लीटर जरूर की गई, लेकिन यह राहत भी सरकारी लेवी के जरिए ही दी गई.

इसके उलट भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं. केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती, रणनीतिक भंडार के इस्तेमाल, विविध देशों से कच्चे तेल की खरीद और मजबूत विदेशी मुद्रा रिज़र्व के दम पर वैश्विक झटके से अर्थव्यवस्था को बचाए रखा.

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बेबस हुआ पाकिस्तान

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री का यह बयान न सिर्फ होर्मुज संकट में पाकिस्तान की बेबसी को दिखाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि कैसे दीर्घकालिक योजना और मजबूत भंडार भारत को ऐसे वैश्विक संकटों में स्थिर बनाए रखते हैं.

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