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अमेरिका में 53 साल बाद फिर आवाज से तेज उड़ेंगे विमान! NASA ने 'शांत' सुपरसोनिक प्लेन बनाया

सोनिक बूम की वजह से अमेरिकी सरकार ने 1973 में सुपरसोनिक विमानों को बैन कर दिया था. लेकिन NASA ने उसका तोड़ निकाल लिया, X-59 आवाज से तेज तो भागती है लेकिन सिर्फ हल्की-सी आवाज पैदा करती है.

अमेरिका में 53 साल बाद फिर आवाज से तेज उड़ेंगे विमान! NASA ने 'शांत' सुपरसोनिक प्लेन बनाया
NASA ने 'शांत' सुपरसोनिक एयरक्राफ्ट X-59 का सफल परिक्षण किया
  • अमेरिकी सरकार सुपसोनिक उड़ानों पर लगे 53 साल से ज्यादा पुराने बैन को खत्म करने की तैयारी कर रही है
  • अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA ने इसी महीने अपने एक्सपेरिमेंट वाले X-59 विमान का सफल परीक्षण किया है
  • X-59 आवाज की रफ्तार से तेज तो उड़ती है लेकिन तेज धमाके जैसी आवाज यानी सोनिक बूम पैदा नहीं करती

अमेरिका में साउंड या ध्वनि की रफ्तार से भी तेज उड़ान भरने वाले सुपरसोनिक प्लेन वापस आने वाले हैं. अमेरिकी सरकार इन सुपसोनिक उड़ानों पर लगे 53 साल से ज्यादा पुराने बैन को खत्म करने की तैयारी कर रही है. अमेरिकी सरकार ने एक नया प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें ऐसे विमानों के लिए शोर (न्वाइज) के आधार पर सीमा तय की गई है. अमेरिकी परिवहन विभाग ने मंगलवार, 30 जून को यह कदम उठाया. इससे पहले अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA ने इसी महीने अपने एक्सपेरिमेंट वाले X-59 विमान का सफल परीक्षण किया था. यह विमान आवाज की रफ्तार से भी तेज उड़ा, लेकिन इससे आमतौर पर होने वाली तेज धमाके जैसी आवाज (सोनिक बूम) नहीं हुई.

सोनिक बूम इतनी तेज आवाज होती है कि इससे खिड़कियां हिल सकती हैं और ज्यादा तेज होने पर इमारतों को भी नुकसान पहुंच सकता है. अब अमेरिका का परिवहन विभाग (FAA) का नया प्रस्ताव 1973 से लागू उस नियम की जगह लेगा, जिसमें जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर पूरी तरह रोक थी. नए प्रस्ताव के अनुसार, अगर विमान की आवाज तय सीमा से कम रहती है, तो वह जमीन के ऊपर भी मैक 1 (यानी आवाज की रफ्तार, करीब 767 मील प्रति घंटा) से ज्यादा गति से उड़ सकेगा.

तैयारी क्या है?

FAA इस साल के अंत में एक और नियम लाने की तैयारी कर रहा है. इसमें सुपरसोनिक विमानों के उड़ान भरने और उतरने के समय होने वाले शोर की सीमा तय की जाएगी. दोनों नियमों को 2027 के बीच तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है. PTI की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल अमेरिका में किसी भी एयरलाइन को मैक 1 से तेज उड़ान भरने के लिए FAA से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है. यह अनुमति सिर्फ रिसर्च और टेस्टिंग के लिए, सुनसान इलाकों में उड़ान भरने के लिए दी जाती है.

NASA की सुपरसोनिक लेकिन शांत उड़ान

इसी महीने की शुरुआत में नासा ने अपनी 'शांत' सुपरसोनिक उड़ान का प्रदर्शन किया. X-59 विमान ने 43,400 फीट की ऊंचाई पर 713 मील प्रति घंटा (मैक 1.1) की अधिकतम रफ्तार हासिल की थी. नासा ने 5 जून को कहा था कि X-59 को इस तरह बनाया गया है कि वह आवाज की रफ्तार से तेज उड़ सके, लेकिन तेज धमाके जैसी आवाज यानी सोनिक बूम की जगह सिर्फ हल्की-सी आवाज पैदा करे.

अमेरिकी परिवहन मंत्री शॉन पी. डफी ने कहा, "जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों की वापसी सिर्फ तेज रफ्तार की बात नहीं है. यह अमेरिका की नई खोजों को बढ़ावा देने और हवाई यात्रा के नए सुनहरे दौर की शुरुआत करने का कदम है."

रफ्तार का दूसरा नाम थी कॉनकॉर्ड की फ्लाइट

पहले एयर फ्रांस और ब्रिटिश एयरवेज ने कॉनकॉर्ड विमान शुरू किया था. यह विमान आवाज की रफ्तार से दोगुनी (मैक 2) गति से उड़ता था और अटलांटिक महासागर को करीब साढ़े तीन घंटे में पार कर लेता था. हालांकि, इतनी तेज रफ्तार से उड़ान सिर्फ समुद्र के ऊपर ही भरने की अनुमति थी. जमीन के ऊपर इसे सामान्य रफ्तार से उड़ना पड़ता था. लेकिन ज्यादा खर्च होने की वजह से 2003 में कॉनकॉर्ड सेवा बंद कर दी गई.

नासा के अलावा बूम सुपरसोनिक और स्पाइक एयरोस्पेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भी सुपरसोनिक विमान बना रही हैं. उनका लक्ष्य भविष्य में अटलांटिक महासागर के पार की उड़ान चार घंटे से भी कम समय में पूरी करना है.

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